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कच्चे तेल की कीमतों से बिगड़ा व्यापार संतुलन

मुंबई.import अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें जिस तेजी से बढ़ रही हैं, देश अपने निर्यात लक्ष्य से उतना ही दूर हो रहा है। कमजोर निर्यात की तुलना में आयात की मात्रा बढ़ने से देश के विदेश व्यापार में असंतुलन की स्थिति पैदा हो गई है।

कैसे पैदा हुआ असंतुलन
27 मई 2008 तक देश का आयात 27 फीसदी तक बढ़ा है, जबकि निर्यात में महज 13 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इसी वर्ष अप्रैल से मई के मध्य आयात 31.7 फीसदी बढ़े, जबकि निर्यात में 22 फीसदी की ही वृद्धि हो पाई।

तेल का आयात बढ़ा
व्यापार संतुलन बिगड़ने का सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त तेजी आना है।
मई 2007 के दौरान देश में तेल का आयात 51 फीसदी तक बढ़ गया था।
अप्रैल-मई 2008 में तेल के आयात में 48.5 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया, जिस पर सरकार को पहले की तुलना में कहीं ज्यादा खर्च करना पड़ा।

और बिगड़ी स्थितियां
तेल आयात के अलावा गैर तेल आयात में अप्रैल-मई 2008 के बीच 25 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि में निर्यात में 21.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।

निर्यात लक्ष्य पूरा होना मुश्किल
वर्तमान स्थितियों में देश का 200 अरब डॉलर का निर्यात लक्ष्य पूरा होता नहीं दिखाई दे रहा। वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी तथा बढ़ती महंगाई के कारण निर्यात प्रभावित होने की आशंका है, जबकि तेल आदि कमोडिटी का आयात बढ़ने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता। इस कारण देश का आयात बिल वर्ष 2007-08 की तुलना में इस वर्ष बढ़ने की आशंका है।

बढ़ा व्यापार घाटा
मई 2008 20.640 अरब डॉलर
मई 2007 13.919 अरब डॉलर





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Anuj Mandliya
Thursday, 3rd Jul 2008, 13:21
we should think about it if condition remain same than we have to suffer a huge loss in our foreign reserve.