इंदौर. मंगलवार दोपहर बस ऑपरेटर्स की हड़ताल टूटी और बुधवार से ट्रकों के चक्के थम गए। ट्रक ऑपरेटर्स की हड़ताल भी बेमियादी है। इसके चलते उन्होंने बुकिंग भी बंद कर दी है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस, नई दिल्ली द्वारा आहूत बंद का समर्थन इंदौर सहित प्रदेश के सभी ट्रांसपोर्ट संगठन कर रहे हैं।
इसी कारण बुधवार सुबह से ही ट्रांसपोर्टनगर, लोहामंडी, देवास नाका, पंचकुइया, रिंगरोड क्षेत्र के तीन हजार ट्रांसपोर्ट संचालकों ने कारोबार पूरी तरह बंद कर दिया। इंदौर ट्रक ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों का दावा है माल लादना या डिलीवरी तो दूर किसी ने बुकिंग भी नहीं की। जो ट्रक जहां था वहीं खड़ा हो गया।
आज संभागायुक्त को ज्ञापन देंगे
ट्रांसपोर्टनगर में एसोसिएशन की बैठक में आगामी रणनीति तय की गई। बैठक में अध्यक्ष राजेंद्रसिंह त्रेहान, महासचिव परविंदरसिंह भाटिया, अखिल म.प्र. सड़क परिवहन संघर्ष समिति के अध्यक्ष मदनलाल डाबी सहित अन्य लोग उपस्थित थे। पदाधिकारियों ने तय किया गुरुवार सुबह 11 बजे संभागायुक्त कार्यालय जाकर उन्हें प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेंगे।
प्रदेश में 24 प्रतिशत टैक्स क्यों?
श्री त्रेहान और श्री डाबी के अनुसार पंजाब-हरियाणा सरकार पेट्रोलियम पदार्थो पर 8 प्रतिशत टैक्स ले रही है जबकि म.प्र. में 24 प्रतिशत। सड़कें भी जर्जर हैं। कई सड़कें बनी हैं तो उन पर डेढ़ से 3 रुपए प्रति किलोमीटर टोल टैक्स लिया जा रहा है।
दोपहर तक आते रहे बाहरी ट्रक
हड़ताल मंगलवार देर रात ही शुरू हो गई थी और यहां से ट्रक रवाना करना भी बंद कर दिया गया लेकिन बाहर के ट्रक दोपहर तक आते रहे। करीब सौ ट्रकों के चक्के उसके बाद ही थमे।
इनका भी समर्थन
म.प्र. युवा (ट्रक) ट्रांसपोर्ट कांग्रेस महासंघ, इंदौर नवयुक ट्रांसपोर्ट एसो., म.प्र. नवयुवक मोटर ऑनर्स (ट्रक-बस) ऑपरेटर्स की संस्थाओं ने हड़ताल का समर्थन किया। मनोहरलाल शर्मा, ओमप्रकाश दीक्षित, भरत राठौर, मोतीलाल परिहार ने कहा जब तक मांगें पूरी नहीं होती हड़ताल जारी रहेगी।
प्रमुख मांगें
टोल टैक्स बंद किया जाए।
बीओटी आधारित सड़कों पर टोल टैक्स की अवधि कम कर टोल दरों में प्रतिवर्ष वृद्धि नहीं की जाए।
केंद्र-राज्य सरकार डीजल पर टैक्स कम करें। देशभर में पेट्रोलियम पदार्थो का मूल्य एकसमान हो।
जिन पुलों पर लागत मूल्य वसूल किया जा चुका है, वहां टोल टैक्स बंद करें।
डिलीवरी, क्रॉसिंग, कमीशन एजेंट, गोडाउन भाड़ा 13.5 प्रतिशत सर्विस टैक्स मांगना सर्विस टैक्स समझौते के विरुद्ध है।