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ना रंगारंग उद्घाटन समारोह और ना ही औपचारिक समापन, बावजूद इसके पांच महीने तक आयोजित हुआ था 20वीं सदी का पहला ओलिंपिक। जी हां, वर्ष 1900 में पेरिस को इस महाकुंभ की मेजबानी मिली थी, जो 14 मई से 28 अक्टूबर तक चला था। इस टूर्नामेंट में कुछ इस तरह की अजीबो-गरीब स्पर्धाएं हरुई, जो ओलिंपिक इतिहास में पहली व आखिरी बार आयोजित की गइ। घुड़सवर्ाी में ऊंची व लंबी कूद आयोजित हुई, तो तैराकी में बाधा दौड़। इनके अलावा दो दिवसीय क्रिकेट मैच व जिंदा कबूतरों पर निशानेबाजी कुछ इसी तरह की स्पद्धाएं थी, जो बाद में कभी नहीं हरुई।
पहले ओलिंपिक (एथेंस, 1896) में महिला एथलीट द्वारा अकेले ट्रैक पर दौड़ कर विरोध प्रदर्शन करने का सुखद परिणाम सामने आया और पेरिस में पहली बार महिला एथलीटों को भी शामिल किया गया। मेजबान फ्रांस ने सबसे ज्यादा 101 पदक (26 स्वर्ण, 41 रजत व 34 कांस्य) जीते, जबकि 47 पदकों (19 स्वर्ण, 14 रजत व 14 कांस्य) के साथ अमेरिका दूसरे व 30 पदक (15 स्वर्ण, 6 रजत व 9 कांस्य) जीतकर ब्रिटेन तीसरे स्थान पर रहा।
पूरा विश्व समाया है पेईचिंग के शुभंकर फुवा में
पेईचिंग (बीजिंग) ओलिंपिक के शुभंकर फुवा (शाब्दिक अर्थ : गुडलक गुड़िया) में पूरा विश्व समाया है, जिसके पांचों प्रतीक अलग-अलग संदेश देते हैं। हर प्रतीक का रंग ओलिंपिक की पांच रिंग्स जैसा है, जो पांच महाद्वीपों की प्रतीक हैं। हर प्रतीक का अलग-अलग नाम है, जिनमें से चार नाम चीन के प्रमुख जानवरों (फिश, पांडा, तिब्बती एंटीपोल व स्वेलो) के नाम पर रखे गए हैं। पांचवां प्रतीक ओलिंपिक मशाल का प्रतीक है। इन प्रतीकों के नाम क्रमश: बीबी (फिश), जिंगजिंग (पांडा), हुयानहुयान (ओलिंपिक मशाल), यिंगयिंग (एंटीपोल) व निनि (स्वेलो)। इन नामों के शुरुआती अक्षरों को मिलाया जाए, तो ‘बीजिंग हुयानयिंग नि’ शब्द बनता है, जिसका अर्थ है बीजिंग में आपका स्वागत है।
शुभंकर में पांच प्रतीक बनाने का एक उद्देश्य यह भी था कि चीनी संस्कृति में जल, धातु, आग, लकड़ी व पृथ्वी को मानव के लिए आवश्यक माना गया है। पहले इस शुभंकर का नाम द फ्रेंडलाइज सोचा गया था, लेकिन बाद में आयोजकों को चिंता हुई कि कहीं इसका गलत अर्थ नहीं निकाल लिया जाए अर्थात इस नाम को फ्रेंडलैस या फ्रेंड लाइज नहीं समझ लिया जाए, इसलिए बाद में शुभंकर का नाम फुवा रखा गया।
भुलाए ना भूले
एल्विन क्राइंजलिन ने 60 मी., 110 मी. व 220 मी. बाधा दौड़ के अलावा लंबी कूद स्पर्धा का स्वर्ण जीता। किसी भी एथलेटिक्स स्पर्धा में एक साथ स्वर्ण जीत का यह रिकॉर्ड आज तक कायम है।
चारलोट कूपर पहली महिला ओलिंपिक चैंपियन बनीं, जिन्होंने टेनिस की एकल स्पर्धा में स्वर्ण जीता। बाद में उन्होंने युगल में भी स्वर्ण पर कब्जा किया था।
बचपन में पोलियो से ग्रसित रे इवेरी ने एक ही दिन में एथलेटिक्स की तीन स्पर्धाएं (हाई जंप, लोंग जंप व ट्रिपल जंप ) जीतीं।
अमेरिका के तीन मैराथन धावकों ने यह कहते हुए विरोध किया कि पहले दो स्थान पर रहने वाले फ्रांसीसी धावकों ने तय ट्रैक पर रेस पूरी नहीं की, बल्कि शॉर्टकट रास्ता अपनाया। उनका तर्क था कि ये धावक ही ऐसे थे, जिनके शरीर पर कीचड़ का एक भी धब्बा नहीं था।
क्रिकेट व पोलो सहित 13 खेल पहली बार ओलिंपिक में शामिल किए गए, जबकि एथेंस ओलिंपिक में शामिल वेटलिफ्टिंग व कुश्ती को हटा दिया गया। क्रिकेट में सिर्फ दो टीमों ने भाग लिया।
रग्बी चैंपियन टीम के सदस्य व पत्रकार फ्रेंट्ज रिशेल बाद में 1924 के पेरिस ओलिंपिक की आयोजन समिति के सचिव बने।
अधिकांश विजेताओं को पदक नहीं, ट्रॉफी व कप दिए गए।
अमेरिकी एथलीट मेयर प्रिनस्टेन ने धार्मि मान्यता के कारण रविवार को आयोजित लंबी कूद के फाइनल में भाग लेने से इनकार कर दिया। बाद में एल्विन ने यह चैंपियनशिप जीती। इस हार से मेयर इतना गुस्सा हुए कि उन्होंने एल्विन के चेहरे पर मुक्का जड़ दिया।