लीडरशिप मंत्र. हममें से अधिकांश लोग मानते हैं कि काम कराने में हमारा कोई जोड़ नहीं। इस सोच के फेर में हम दूसरों को कमतर आंकने की भूल भी कर बैठते हैं। इस क्रम में मुझे एक कंपनी से जुड़ी घटना याद आ रही है, जहां मेरा मित्र मार्केटिंग इंचार्ज था। वह हमेशा अपने एमडी की तारीफ कर उन्हें एक महान लीडर बताते नहीं थकता था।
वह कहता था कि किस तरह उसका एमडी उन्हें प्रोत्साहित कर उनका सर्वश्रेष्ठ निकलवा लेता है। उसी कंपनी को एक नया उत्पाद लांच करना था और इसकी जिम्मेदारी फंक्शनल हेड्स को सौंपी गई। एमडी ने सभी हेड्स से कहा कि वे अपने बल पर शुरुआती रणनीति बनाएं और वह उसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा।
हरेक इससे उत्साहित हो जी-जान से जुट गया, लेकिन इस बीच एमडी एक-एक करके हेड्स को बुलाता और उन्हें काम के बाबत अपनी राय देता जाता। वास्तव में एमडी उन सभी के दिमाग में अपरोक्ष ढंग से अपने विचार रोपित कर रहा था। नतीजा यह निकला कि कोई भी टीम सही रणनीति का खाका नहीं खींच सकी। तब टीम को अहसास हुआ कि एमडी उन्हें प्रोत्साहित करने की बजाय अपनी ही चलाने की विधि अपना रहा था।
निष्कर्ष यह निकलता है कि भले ही आपको मालूम हो कि काम कैसे किया जाना है, लेकिन दूसरों को जिम्मेदारी देने के बाद उसका शुरुआती परिणाम आने दें। अगर आप शुरुआत से ही दखल देते रहेंगे तो चीजें चूं चूं का मुरब्बा बन कर रह जाएंगी।
इसके लिए अपनी टीम में विश्वास का भाव समाहित करना होगा कि वे अकेले दम भी किसी काम को पूरा करने में सक्षम हैं। अपने विचार जबरन थोप कर आप चीजें और बिगाड़ते ही हैं।
लेखक नेतृत्व प्रशिक्षण संस्था लीडकैप के संस्थापक हैं।