जयपुर. बिहार की तर्ज पर जयपुर नगर निगम में भी चारा घोटाला सामने आया है। निगम की तीन गोशालाओं में करीब साढ़े चौदह हजार मृत गायें दो लाख रुपए का चारा खा र्गई। निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक यह चारा इन गायों को उसी दिन खिलाया गया, जिस दिन इनकी मृत्यु हुई। इन गौशालाओं में चारे-पानी और सफाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से गायें लगातार मर रही हैं।
नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 2006-07 में सांगानेर, पुरानी कोतवाली और हिंगोनिया गोशालाओं में 14 हजार 546 पशुओं की मृत्यु हुई। इनमें सर्वाधिक 13 हजार 340 गाय हिंगोनिया गोशाला में मरीं। सांगानेर गोशाला में 932 गायों की मौत हुई। इस अवधि में हिंगोनिया गोशाला में 17 हजार 698, सांगानेर गोशाला में 13 हजार 661 और पुरानी कोतवाली गौशाला में 804 गायों को लाया गया।
निगम की ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस दिन गायों को कुट्टी और खाखला खिलाया जाए, उसी दिन गायें मर जाएं, ऐसा एक-दो पशुओं के मामले में तो हो सकता है, लेकिन 14 हजार 546 गायों के मामले में यह संभव नहीं है। वह भी उस स्थिति में जब एक पशु को तीन किलो चारा खिलाया गया हो।
यह मात्रा भी एक पशु के हिसाब से पर्याप्त है। इतनी बड़ी संख्या में गायों के मरने का क्या कारण रहा? इस बारे में कोई चिकित्सकीय रिपोर्ट भी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
मानव अधिकार आयोग भी कुछ नहीं कर पाया
पिछले दिनों यह मामला मानव अधिकार आयोग में भी गया। आयोग की टीम ने हिंगोनिया गौशाला का निरीक्षण भी किया और माना कि वहां गायों को रखने की व्यवस्था सही नहीं थी। टीम ने साफ-सफाई की व्यवस्था ठीक नहीं होने से बीमारियां फैलने के कारण गायों की मौत होना माना था। आयोग ने नगर निगम को बार-बार गौशालाओं की व्यवस्था ठीक करने के निर्देश दिए, लेकिन निगम अधिकारियों ने सब पर लीपापोती कर दी।
भ्रष्टाचार तो है, लेकिन व्यवस्था तो ठीक हो
पार्षद सुनीता मावर का कहना है कि नगर निगम की गौशालाओं में भ्रष्टाचार तो है, लेकिन कम से कम गायों के रखरखाव की व्यवस्था तो ठीक हो। यहां वह भी नहीं है। उन्होंने कई बार यह मामला उठाया। बस्सी में 5 अप्रैल 2008 को धरना भी दिया और निगम मुख्यालय पर भी प्रदर्शन किया, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात वाला ही रहा। आज भी गौशालाओं की मॉनीटरिंग की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है। रिकॉर्ड में फर्जी एंट्रियां करके भुगतान उठा लिया जाता है।
‘मामले की जांच कराएंगे’
हिंगोनिया गौशाला में आए दिन गायों के मरने की खबर आती है। गायों के मरने और चारे से संबंधित सभी मामलों की जांच कराई जाएगी। निगम के स्तर पर जो जांचें हुई हैं, उनकी भी जानकारी ली जाएगी।
—अखिल अरोरा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नगर निगम