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मुंह भी नहीं देख पाए परिजन

हिसार. एक परिवार के पास बेटे के जिंदा होने की सूचना थी तो दूसरे के पासअपने का दाह संस्कार करना तो दूर, अंतिम दर्शन भी न कर पाने का असहनीय गम। यह दास्तां है विकास और सतबीर के परिजनों की। मंगलवार को सेक्टर 9-11 से बरामद हुआ अधजला शव विकास का नहीं, बल्कि सीसवाला निवासी सतबीर निकला। शव बरामद होने के बाद इसकी पहचान नवदीप कॉलोनी निवासी विकास के रूप में हुई।

विकास की माता कृष्णा व भाई राजेश ने शव की शिनाख्त की थी। राजेश ने बयानों में विकास द्वारा डीजल छिड़क कर आत्मदाह करने की बात कही थी, जिसके बाद मामला वहीं खत्म हो गया था। मामले ने यू टर्न उस समय लिया जब मंगलवार शाम को ही विकास का फोन भाई राजेश के मोबाइल पर आया।

तेजी से उलझा, तेजी से सुलझा
विकास के परिजनों ने जब सिविल लाइन पुलिस थाने में ये सूचना दी कि विकास जिंदा है और शव किसी और का है तो मामला उलझता नजर आने लगा। एक ही दिन में तेजी से इतना कुछ घटित हो गया कि पुलिस भी असमंजस की स्थिति में रही।

जिस गति से मामला उलझा, उसी तेजी से मामला सुलझ भी गया। कारण, सीसवाला निवासी सतबीर के परिजन उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने सिविल लाइन थाने पहुंच गए। पुलिस ने उन्हें शव की फोटो, उसके पास से बरामद प्लास्टिक कैन और कुछ अन्य चीजें दिखाईं तो परिजनों ने शव सतबीर का होने की पुष्टि कर दी। इसके बाद मामला क्लीयर हो गया।

सतबीर के भाई को डबल सदमा
सतबीर के बड़े भाई कृष्ण और अन्य परिजनों के चेहरों पर न केवल इस बात का गम झलक रहा था कि उसके भाई की मौत हो गई है, बल्कि इस बात का अफसोस भी साफ दिखाई दे रहा था कि उन्हें मौत के बाद सतबीर का चेहरा तक देखने को नसीब नहीं हुआ। कृष्ण ने बताया कि उन्हें भाई की मौत का गम जिंदगी भर सालता रहेगा।

पिता के बाद हुई पति की मौत
सतबीर (30) की पत्नी निर्मला पर तो जैसे दुखों का पहाड़ ही टूट पड़ा । वह पति के साथ न्यू मॉडल टाउन में रहती थी। लेकिन रविवार को निर्मला के पिता ढाणी ईस्सर (फतेहाबाद) निवासी कांशीराम का देहांत हो गया था। उस समय सतबीर निर्मला को वहीं छोड़ आया था।

निर्मला को क्या पता था कि उसके पति की मौत की खबर तो दूर अंतिम समय में उसे पति के दर्शन भी नसीब नहीं होंगे। एक सप्ताह के अंदर पिता और फिर पति की मौत देखने वाली महिला की स्थिति का अंदाजा कोई भी आसानी से लगा सकता है। सतबीर के दो बेटे 10 वर्षीय अजय और 7 वर्षीय विकास हैं। सतबीर दूध का काम कर परिवार का पालन-पोषण करता था।

अंत्येष्टि के बावजूद सुकून
दूसरी तरफ विकास के परिजनों को दाह संस्कार करने के बावजूद विकास के जिंदा होने का सुकून मिल गया। हालांकि विकास के पिता नफेसिंह और माता कृष्णा उसके चाल-चलन से काफी दुखी हैं। इसके चलते नफेसिंह ने विकास को अपनी चल-अचल संपत्ति से बेदखल भी किया हुआ है।

नफेसिंह व कृष्णा ने कहा कि उन्हें उसके आवारापन का काफी गम है, जिसके चलते उनकी बदनामी हुई है। उन्हें भी इस बात का दुख है कि विकास समझकर जिसका अंतिम संस्कार उन्होंने किया, उसके परिजन उसके अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाए। सिविल लाइन पुलिस ने सतबीर के परिजनों द्वारा शिनाख्त के बाद सतबीर के न्यू मॉडल टाउन स्थित कमरे का निरीक्षण किया। पुलिस इस मामले की जांच में जुटी है।

कैमरा बना महत्वपूर्ण कड़ी
मामले को उलझने से बचाने में पुलिस विभाग का फोटो कैमरा महत्वपूर्ण साबित हुआ। यदि फोटो कैमरे में फोटो नहीं होती तो शायद इतनी जल्दी दोबारा शिनाख्त हो पाना मुश्किल हो जाता। जैसे ही सतबीर के परिजन गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने सिविल थाना पहुंचे तो पुलिस ने सबसे पहले उन्हें शव की फोटो दिखाई, जिससे पहचान आसान हो गई।

पल-पल रंग बदलता रहा मामला
मंगलवार सुबह हिसार के सेक्टर 9-11 के सुनसान इलाके से जली अवस्था में एक शव बरामद हुआ मृतक की पहचान नवदीप कॉलोनी निवासी विकास के रूप में हुई। परिजनों ने विकास के रूप में शिनाख्त कर पुष्टि तक की। पुलिस ने पंचनामे के बाद शव सामान्य अस्पताल पहुंचाया।

अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। परिजनों ने अस्पताल से शव को सीधे श्मशानघाट पहुंचाया और अंतिम संस्कार कर दिया।
दाह संस्कार के करीब सवा घंटे बाद विकास का फोन आया
विकास के परिजनों ने उसके जिंदा होने की सूचना पुलिस को दी
केस उलझा और सवाल खड़ा हुआ कि आखिर शव किसका था
अंतिम संस्कार के कारण मृतक की पहचान होना भी हुआ मुश्किल

अंधकार में उम्मीद की किरण। सतबीर के परिजन पहुंचे थाना सिविल लाइन में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने पुलिस ने शव की एकमात्र बची पहचान कैमरे में कैद मृतक का फोटो सतबीर के परिजनों को दिखाया। केस जितनी जल्दी उलझा, उतनी जल्दी निपटा। परिजनों ने शव सतबीर का होने की पुष्टि की और मामला साफ हो गया





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