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डेढ़ करोड़ में कुत्तों की नसबंदी

भिलाई. शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या हर किसी के लिए सिरदर्द है। रात में हर चौक-चौराहों पर कुत्तों का झुंड देखा जा सकता है। कुत्तों के कारण कई गलियों में तो राहगीरों का गुजरना मुश्किल हो जाता है।

पैदल चलने वाले ही नहीं मोटर साइकिल व चार पहिए वाहन वालों को भी दौड़ाते हैं। कुत्ते से बचने के प्रयास में वाहन चालक अपना नियंत्रण खो बैठते हैं और दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं। शहर में ऐसे कई उदाहरण हैं।

कुत्तों की नसबंदी होगी : पहले आवारा कुत्तों को खाने में जहर देकर मार दिया जाता था। सरकार ने पिछले कुछ सालों से इस पर प्रतिबंध लगा दिया है। यही वजह है कि अब इसकी संख्या पर नियंत्रण के लिए नसबंदी की योजना बनाई गई है। इसके लिए निगम प्रशासन ने ग्लोबल टेंडर जारी कर देश भर से अनुभवी एजेंसियों व इस क्षेत्र में कार्य करने वाले एनजीओ को आमंत्रित किया है।

घूम-घूमकर पकड़ेंगे कुत्ते : जो भी एजेंसी या एनजीओ इसका ठेका लेगा पहले वे शहर में अवारा कुत्तों का सर्वे करेंगे। उन्हें निगम के हर जोन में केयर सेंटर खोलना होगा। कुत्तों को पकड़ने उनका विशेष दस्ता रहेगा। खास डिजाइन किए हुए क्रेज में ही कुत्तों को लाया जाएगा। केयर सेंटर में पांच वेटनरी डाक्टरों की टीम रहेगी, जो कुत्ते को बगैर कोई शारीरिक नुकसान पहुंचाए नसबंदी करेंगे।

एक कुत्ते पर 2000 खर्च : निगम अधिकारियों के मुताबिक एक कुत्ते की नसबंदी पर दो हजार रुपए खर्च होगा। नसबंदी के बाद सात दिन तक उसे केयर सेंटर में ही रखा जाएगा। इसके बाद उसे फिर गलियों में छोड़ दिया जाएगा। नसबंदी कुत्ते की पहचान के लिए उसके कान पर टेग लगाया जाएगा।





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