अजमेर.
पर्यावरण संतुलन को बिगाड़ने और अरावली को विनाश के कगार पर पहुंचाने में जिले में जारी खनन गतिविधियां भी उत्तरदायी हैं। राज्य सरकार की ओर से राजस्व की पूर्ति के लिए लगातार खनन पट्टों का आवंटन जारी है। अवैध रूप से भी पहाड़ों का सीना चीरकर बहुमूल्य खनिज निकाले जा रहे हैं।
खनिज महकमे के दावे के मुताबिक पिछले तीस वर्ष में अकेले ब्यावर स्थित श्री सीमेंट को आवंटित की गई खान से ही लगभग 3 करोड़ 30 लाख टन लाइम स्टोन का दोहन हो चुका है। महकमे ने 1978 में श्री सीमेंट को ब्यावर में 856.8 हैक्टेयर क्षेत्र खनन के लिए लीज पर आवंटित किया था। सूत्रों के अनुसार ब्यावर के इस क्षेत्र में स्थित पहाड़ी क्षेत्र में लाइम स्टोन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।
कंपनी प्रतिदिन लगभग 3 हजार टन लाइम स्टोन का दोहन यहां करती है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2005-06 में इस क्षेत्र से श्री सीमेंट ने 11 लाख 78 हजार 201 टन खनिज का दोहन किया। अगले वित्तीय वर्ष में साढ़े चौदह लाख टन से अधिक खनिज का दोहन हुआ।
पिछले वित्तीय वर्ष में भी लगभग 12 लाख टन खनिज के दोहन की जानकारी है। महकमे ने 1999 में लीज का नवीनीकरण किया था और आगामी 30 साल के लिए और खनन की मंजूरी दे रखी है। महकमे की रिपोर्ट के मुताबिक इस खान को मिलाकर जिले में प्रधान व अप्रधान खनिजों की लगभग 550 खानें हैं। साथ ही अवैध रूप से जारी खनन गतिविधियां अलग से हैं।
खनन के कारण पर्यावरण को बचाने के लिए पौधरोपण किया जाता है। जो पहाड़ियां नंगी हो जाती हैं, उन पर ड्रिल करके पेड़ लगाए जाते हैं।
- पीसी झंवर, सहा. उपाध्यक्ष (कार्मिक एवं प्रशासन) श्री सीमेंट
श्रीनगर बेल्ट में तबाही
भवन निर्माण के लिए पत्थर, पटाव व पट्टियों की अच्छी क्वालिटी के लिए विख्यात श्रीनगर इलाके में लगातार खनन ने तबाही का मंजर पैदा कर दिया है। इस इलाके में दूर दूर तक वैध-अवैध खनन ही नजर आता है।
हालात यह हो गए हैं कि पहाड़ के पहाड़ साफ होते चले जा रहे हैं। 24 घंटे इस इलाके में पत्थर तोड़ने के लिए धमाके गूंजते रहते हैं। बड़े पैमाने पर हो रहे खनन से वर्षा के दिनों में स्वर्ग जैसी हो जाने वाली श्रीनगर इलाके की पहाड़ियां तेजी से बंजर हो रही हैं। इन पहाड़ियों के विशाल कैचमेंट से श्रीनगर और बीर जैसे बड़े तालाबों में साल भर का पानी जमा हो जाता था, लेकिन अब नुकसान होने लगा है।
पौध लगाएं, देखभाल करें
खनन के लिए पेड़ काटे जाते हैं, यह भूमि के इरोजन (क्षरण) को और बढ़ाएगा.. नतीजा रेगिस्तान का प्रसार। ‘प्रोजेक्ट पुष्कर गैप’ के बारे में बताते हैं जिसमें उन्होंने बांसेली, डुमाड़ा, अंधेरी देवरी, मांगलियावास जैसे गांवों को चिह्न्ति किया, यहां रेगिस्तान का प्रसार हो रहा था।
पानी तो कम था ही पेड़-पौधे प्राकृतिक रूप से पनप सकें, ऐसी परिस्थितियां भी खत्म हो र्गई थीं। यहां उन्होंने कुछ विशेष किस्मों के पौधे रोपे, जिन्हें खाद व पूरी देखभाल दी गई। तभी वे तेजी से बढ़े। इसी अवधि में रोप कर प्राकृतिक रूप से बढ़ने के लिए छोड़े गए पौधों में नाम मात्र की बढ़त थी। यह बताता है कि खनन से हमने जो जख्म पृथ्वी को दिए हैं, उसे भरने के लिए देखभाल भी खुद को करनी होगी।
-डॉ. मोहनलाल यादव, पूर्व शोधकर्ता,मदसविवि
खुले हाथों लुटा खजाना
डूमाड़ा, श्रीनगर, नारेली, अजयसर, बोराज, किशनगढ़, ब्यावर, कोटड़ा, सोमलपुर, तारागढ़, पालरा, लोहागल, होकरा, मसूदा, केकड़ी, भिनाय, राजगढ़। ये हैं जिले के कुछ इलाके जहां इंसान प्रकृति का बेरहमी से दोहन कर रहा है। विकास के नाम पर विनाश लीला का तांडव हो रहा है।
खनिज पदार्र्थो की दृष्टि से विश्व के सर्वाधिक समृद्ध जिलों में से एक अजयमेरू में खनिज पदार्र्थो की बेदर्दी से लूट हो रही है। जिस तेजी से पहाड़ों का सीना छलनी हो रहा है उससे वो दिन दूर नहीं जब भीषण प्राकृतिक आपदाएं बिन बुलाए मेहमान की तरह चुपके से चली आएंगी और जानो माल का भारी नुकसान करेंगी। वर्षा के बाद दूर-दूर तक मैदानों में खनन से हुई बर्बादी के नजारे देखे जा सकते हैं।