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लाइफ पर रेडलाइन खींचते रेलवे क्रांसिंग

बीकानेर. rail ये ही नहीं पिछले छह महीने में जिले में ट्रेनों की चपेट में आने से आठ जनों की मौत हुई है। इतनी मौतें होने के बाद भी न तो रेलवे प्रशासन ने इस ओर कोई कदम उठाए हैं और न ही जिला प्रशासन ने।

रेलवे और प्रशासन की उदासीनता से लोगों की जान पर बन आई है। रेलवे अधिकारी ऐसी दुर्घटनाओं का कारण लोगों की जल्दबाजी की प्रवृत्ति बता कर इतिश्री कर रहे हैं। विडम्बना तो यह है कि रानीबाजार इंडस्ट्रीयल एरिया के रेलवे क्रॉसिंग के अलावा कहीं पर भी रेलवे सुरक्षा नियमों का बोर्ड ही नजर नहीं आएगा। सर्वाधिक दुर्घटनाएं कोटगेट रेलवे क्रॉसिंग पर हो रही है। जानकार लोगों का कहना है कि शहर के मुख्य मार्ग का यह गेट 24 घंटे में करीब 18-20 बार बंद होता है।

एक बार बंद हुआ रेलवे गेट करीब 15-20 मिनट बाद खुलता है। बार-बार बंद होते फाटकों से परेशान लोग बंद फाटकों के नीचे से गुजरने की जोखिम तक उठा लेते हैं। लोगों का कहना है कि व्यस्ततम मार्ग होने के बाद भी इस गेट को सबसे बाद में खोला जाता है और बंद सबसे पहले कर दिया जाता है।

इस स्थिति से कई बार रेल अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी वे इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं जबकि चौखूंटी, गजनेर रोड और रानीबाजार रेलवे फाटक से गाड़ी के गुजरते की खोल दिया जाता है। रेलवे कर्मचारी काम के प्रति कितने संवेदनशील है इसका अंदाजा तो मई माह में हुई घटना से ही लगाया जा सकता है।

इस घटना में बीकानेर रेलवे स्टेशन से लालगढ़ के लिए रणकपुर एक्सप्रेस के रैक को रवाना किया गया। कोटगेट क्रॉसिंग पार होने के बाद भी चौखूंटी रेलवे फाटक को बंद नहीं किया गया। इस क्रॉसिंग पर कार्यरत कर्मचारी शराब के नशे में धुत था। हालांकि गाड़ी चालक को कॉशन देकर भेजा गया फिर भी मोहल्लेवासियों के प्रयासों से आवागमन को रोक दिया गया था।

कोटगेट रेलवे क्रॉसिंग पर होती है सर्वाधिक दुर्घटनाएं
शहर के व्यस्ततम मार्ग कोटगेट पर स्थित रेलवे क्रॉसिंग पर सर्वाधिक दुर्घटनाएं होती है। पिछले तीन महीने में इस रेलवे क्रॉसिंग पर चार ऐसी दुर्घटनाएं हो चुकी है। एक घटना में तो युवक और उसकी बाइक दोनों की ट्रेन की चपेट में आ गए।

पिछले दो महीने में ही यहां तीन घटनाएं हो चुकी है। इसके अलावा हर दिन इस क्रॉसिंग पर दुर्घटना होने की आशंका बना रहती है। रेलवे क्रॉसिंग पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में जानने की कोशिश की गई तो अधिकारी बस यह कहते रहे कि रेलवे अधिकारी अब हर क्रॉसिंग पर तो जाने से रहे।

यह है रेलवे सुरक्षा नियम
रेल अधिनियम 1989 के अनुसार रेल सेवक के कर्तव्यों में बाधा डालने वाले व्यक्ति को छह माह का कारावास, एक हजार रुपए का अर्थदंड या दोनों सजाए एक साथ देने का प्रावधान है।

समतल रेलवे क्रॉसिंग के फाटक को खोलने या तोड़ने वाले व्यक्ति को तीन साल के कारावास की सजा और यदि कोई व्यक्ति रेलवे क्रॉसिंग जो सड़क के दोनों और यातायात बंद करने के लिए बंद कर दिया गया है उसे तोड़ता है तो उसे पांच वर्ष के कारावास की सजा देने का प्रावधान है। रेलवे सुरक्षा नियम बताने वाला यह बोर्ड बीकानेर शहर में एक स्थान पर ही लगा हुआ है जबकि ऐसा बोर्ड हर क्रॉसिंग पर लगाने का प्रावधान है।





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