बीकानेर. राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय में सामान्य प्रक्रिया के तहत होने वाले कार्यो के लिए भी छात्रों व प्राध्यापकों को कई महीने और सालों तक इंतजार करना पड़ता है।
रिक्त पदों की भर्ती हो या प्राध्यापकों की पदोन्नति, सभी के लिए मिन्नतें करने के बाद भी कार्य आगे नहीं बढ़ रहा है। लगभग एक वर्ष पहले विवि ने कैरियर एडवांसमेंट कराया था लेकिन तब 49 प्राध्यापक ऐसे थे जिन्हें सीनियर से सेलेक्शन ग्रेड मिलना चाहिए था लेकिन विवि ने उन्हें कुछ महीने बाद पदोन्नति देने का भरोसा दिलाया था।
अप्रैल 2008 में कैरियर एडवांसमेंट होना था लेकिन जून भी बीत गया लेकिन पदोन्नति के कोई प्रयास नहीं हुए। खास बात यह है कि सरकार ने उन असिस्टेंट प्रोफेसरों को सीनियर से सेलेक्शन ग्रेड देने की अनुमति जारी कर दी जो 2006 में पात्र हो गए हैं।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने भी ऐसे लोगों को सेलेक्शन ग्रेड देने पर रजामंदी दे दी लेकिन विवि निर्णय में देरी कर रहा है। पिछले वर्ष हुए कैरियर एडवांसमेंट में सीनियर व सेलेक्शन ग्रेड दोनो एक साथ मिलना चाहिए था लेकिन विवि ने सिर्फ सीनियर स्केल ही दिया। जब प्राध्यापक कुलपति से मिले तो अप्रैल 2008 में वादा पूरा करने के लिए कहा।
पदोन्नति की आस में वे एसोसिएट प्रोफेसर भी बैठे हैं जो 2004 में पात्र हो गए थे। ये सभी 1996 में एसोसिएट प्रोफेसर बन गए थे और अब प्रोफेसर पद के योग्य हो गए हैं। विवि के सामने अब कोई समस्या भी नहीं है। सेलेक्शन कमेटी से लेकर बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के सदस्य भी तय कर दिए गए हैं लेकिन पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी।
मांग को लेकर असिस्टेंट प्रोफेसर कई बार कुलपति से मिले हैं जो उन्हें आश्वासन दे देते हैं लेकिन जिन्हें एसोसिएट से प्रोफेसर बनना है वे अब तक कुलपति से नहीं मिले। जानकारों का कहना है कि प्राध्यापकों में एकजुटता नहीं होने के कारण विवि प्रशासन भी इसका फायदा उठा रहा है। असिस्टेंट प्रोफेसर एसोसिएट की बात नहीं करता और एसोसिएट असिस्टेंट प्रोफे सर का समर्थन नहीं कर रहे हैं। इस कारण दोनों ही वर्ग के प्राध्यापक अपनी मांग पूरी नहीं करा पा रहे हैं।
सीएस के प्रयास किए जा रहे हैं। जो हकदार हैं उन्हें उनका हक मिलेगा लेकिन प्रक्रिया में समय लगता है। पहले भी इस संबंध में प्राध्यापको से बात हो गई थी।
-डॉ.प्रताप नारायण, कुलपति, राजस्थान कृषि विवि