जोधपुर. रियासत काल में पादरी जी के अस्पताल के नाम से विख्यात रहे खांडाफलसा आयुर्वेद अस्पताल को जिला अस्पताल बनाने के बाद धीमी गति से मिल रहे बजट के कारण कई बड़ी सुविधाएं शुरू नहीं हो पा रही हैं।
पंचकर्म हॉल, ऑपरेशन थियेटर और लेबर रूम की सुविधा के लिए शहर विधायक ने अपने कोष से हाल ही 12 लाख रुपए आबंटित किए हैं। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद सृजित करने के प्रस्ताव भी बनाए गए हैं।
संभागीय स्तर के एक मात्र इस आयुर्वेदिक अस्पताल में वर्तमान में 29 बेड हैं। इसे बढ़ाकर 50 बेड करने का प्रस्ताव भी सरकार को भेजे एक अरसा हो गया है लेकिन आज तक इस अस्पताल को 50 बेड का दर्जा नहीं मिल सका है। जबकि इस अस्पताल को क्रमोन्नत करने के लिए 25 लाख के प्रस्ताव अलग से भेजे गए थे, लेकिन सरकार से स्वीकृति नहीं मिलने से कामकाज शुरू नहीं हो पाया।
अस्पताल भवन भी खस्ता हाल है। बारिश में छत से पानी टपकता है। इसकी मरम्मत के लिए अस्पताल को 1.65 लाख रुपए का बजट मिला है। इससे अस्पताल की छत से हो रहे पानी के रिसाव को रोकने के लिए मरम्मत सार्वजनिक निर्माण विभाग से करवाने की स्वीकृति मिल चुकी है।
चिकित्सा अधिकारी निवास में कार्यालय : अस्पताल में ही चिकित्सा अधिकारी का निवास है लेकिन गत डेढ़ दशक से इसमें जिला आयुर्वेद अधिकारी कार्यालय संचालित हो रहा है। इस कारण यहां भर्ती रोगियों को रात्रिकालीन सेवाएं नहीं मिल पाती। अस्पताल में आए गंभीर मरीज के लिए नाइट कॉल की ही व्यवस्था है जबकि सरकारी कागजों में यह भवन चिकित्सा अधिकारी के नाम है।
एंबुलेंस है ना अन्य वाहन : अस्पताल में एंबुलेंस नहीं है। इसके अलावा कोई अन्य वाहन भी नहीं है। हालत यह है कि 132 आयर्वेद अस्पतालों के निरीक्षण के लिए जिला आयुर्वेद अधिकारी के लिए भी वाहन की सुविधा नहीं है।
सर्जन नहीं, ऑपरेशन थियेटर है : अस्पताल में माइनर ऑपरेशन थियेटर बना हुआ है लेकिन सर्जन नहीं होने से यहां आज तक कोई सर्जरी नहीं हुई। इधर प्रसव करवाने वाली विशेषज्ञ दो चिकित्सक यहां तैनात हैं, लेकिन लेबर रूम नहीं होने से अब तक कोई किलकारी यहां नहीं गूंज सकी है। इसी तरह पैथोलॉजी लैब, एक्सरे आदि की सुविधा भी नहीं है।
शल्य क्रिया के उपकरण कमरे में बंद : 6 माह पूर्व केंद्र सरकार की सहायता से करीब एक लाख रुपए के पंचकर्म शल्य क्रिया के उपकरण तो आ गए लेकिन इसके लिए अलग से थियेटर नहीं होने और शल्य चिकित्सक के अभाव में इनको कमरे में रखा हुआ है।
एक नजर बजट पर : अस्पताल में मरीजों की रसोई के लिए सालाना 60 हजार रुपए। रोगी के लिए कपड़े और गद्दे बिस्तर आदि के लिए 6 हजार रुपए,आउटडोर मरीजों के लिए 2 रुपए प्रति मरीज, इनडोर मरीजों के लिए 6 रुपए प्रति मरीज के हिसाब से बजट मिलता है। गत वर्ष अस्पताल को 5.13 लाख रुपए का बजट मिला था।
कुछ पुराने तो कुछ नए बेड : अस्पताल में इनडोर सुविधा है। इसके लिए 10 नए बेड लगाए गए हैं। शेष 29 बेड अभी भी पुराने व फटेहाल हैं। अस्पताल में वर्तमान में 12 मरीज भर्ती हैं।
अस्पताल को आधुनिक बनाने के लिए शहर विधायक सूर्यकांता व्यास ने विधायक कोटे से 12 लाख रुपए दिए हैं। अस्पताल के निर्माण कार्य के बाद रोगियों के लिए सुविधाएं बढ़ेंगी।
—डॉ. नागेश कल्ला, चिकित्सा अधिकारी,खांडा फलसा, आयुर्वेद अस्पताल।