जोधपुर.
जोधपुर बाइपास रेलवे क्रॉसिंग पर लगने वाले जाम की समस्या से निजात पाने के लिए रेलवे प्रशासन ने ओवरब्रिज का निर्माण शुरू कर दिया है। ओवरब्रिज का निर्माण करने वाली कार्यकारी एजेंसी सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने यह काम जोधपुर की ठेका फर्म को सौंपा है। यह काम दो चरणों में पूरा होगा।
पहले चरण में ओवरब्रिज बनाया जाएगा। दूसरे चरण में ओवरब्रिज के दोनों ओर संपर्क सड़कें बनाने का काम होगा। दोनों कार्यो पर लगभग चार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। ओवरब्रिज का निर्माण कार्य अगले वर्ष जुलाई-अगस्त तक पूरा होने की संभावना है।
बासनी-सालावास के बीच सांगरिया फांटा पर रेलवे यातायात के भारी दबाव के कारण घंटों तक लगने वाले जाम की शिकायत को देखते हुए लंबे समय से रेलवे ओवरब्रिज बनाने की मांग उठती रही, लेकिन रेलवे प्रशासन ने इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया। हाईकोर्ट की फटकार के बाद रेलवे प्रशासन ने ओवरब्रिज बनाने के लिए राशि आबंटित की। इसके बाद ओवरब्रिज बनाने का रास्ता साफ हो गया। पहले तो यह राशि रेलवे को दी गई, लेकिन उसके हाथ खड़े करने के बाद यह काम सीमा सड़क संगठन को सौंपा गया है।
संपर्क सड़क के टेंडर भूला रेलवे : रेलवे प्रशासन ओवरब्रिज बनाने के लिए तो टेंडर जारी कर दिए, लेकिन इसके लिए बनने वाली संपर्क सड़क के टेंडर भूल गया। जिला प्रशासन ने जैसलमेर-जोधपुर व पाली-जोधपुर बाइपास तक की सड़क का निर्माण तो कर दिया गया है, लेकिन ओवरब्रिज के दोनों तरफ की सड़क का काम होना बाकी है। संपर्क सड़क के निर्माण पर लगभग दो करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। सड़क निर्माण के साथ सुरक्षा दीवार का भी निर्माण करवाया जाएगा। रेलवे प्रशासन संपर्क सड़क के निर्माण के लिए टेंडर जारी नहीं कर पाया है।
भूमि अवाप्ति का काम पूरा : ओवरब्रिज के लिए रेलवे प्रशासन ने दोनों तरफ की सौ-सौ फीट जमीन अवाप्त करने का काम पूरा कर लिया है। फिलहाल एक ट्रैक है, लेकिन निर्माणाधीन ओवरब्रिज के नीचे से तीन ट्रैक का प्रावधान रखा गया है।
जोधपुर-अहमदाबाद रेल मार्ग के इस रेलवे क्रॉसिंग से 24 घंटे के भीतर करीब 40-45 ट्रेनें गुजरती हैं। जिससे यातायात पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। क्रॉसिंग बंद होते ही दोनों तरफ वाहनों की कतारें लग जाती हैं। जोधपुर व लूनी स्टेशन से ट्रेन छुटने के साथ ही क्रॉसिंग को बंद कर दिया जाता है। ऐसे में 10 से 12 मिनट तक क्रॉसिंग को बंद रखना पड़ता है।
बीम टेस्टिंग शुरू : ओवरब्रिज के निर्माण के लिए ठेका फर्म ने जमीन में 60 फीट का गड्ढा खोदकर फाइल फाउंडेशन लेने का काम शुरू कर दिया है। इसके बाद 5 टन का वजन देकर फाइल फाउंडेशन की टेस्टिंग की जाएगी। इसके बाद आरसीसी का ढांचा खड़ा करने की कवायद शुरू होगी।
प्रोजेक्ट इंजीनियर अनिल कुमार बोहरा ने बताया कि सेकेंड ए क्लास रोड होने व आर्मी के वाहनों की आवाजाही को देखते हुए ओवरब्रिज पर 5 सौ टन के वजन की टेस्टिंग की जा रही है। इसके लिए सौ फीट लंबे और 75 टन वजनी तीन गार्डर लगाई जाएगी। उन्होंने बताया कि सब कुछ ठीक रहा तो छह में ओवरब्रिज का ढांचा बनकर तैयार हो जाएगा और अगले छह माह में ओवरब्रिज का काम पूरा हो जाएगा।
आरओबी पर भी महंगाई की मार : रेलवे प्रशासन ने पूर्व में जब इसके निर्माण का बीड़ा उठाया था तो इसकी प्रस्तावित लागत आधी आंकी गई थी,लेकिन रेलवे के हाथ खड़ा करने के बाद जब टेंडर दोबारा हुए तो स्टील,सीमेंट व डीजल के दाम कम थे,लेकिन टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्टील,सीमेंट व डीजल के दामों में बढ़ोतरी होने से इसकी लागत बढ़ गई। ठेका फर्म के मालिक विनोद सहगल की मानें तो स्टील,सीमेंट व डीजल के दामों में बढ़ोतरी के कारण प्रस्तावित लागत में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है।