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यूआईटी को कैसे दी सीएडी ने जमीन

कोटा. सीएडी कोटा द्वारा नगर विकास न्यास को डेढ़ साल पहले दी गई 139.24 हैक्टेयर भूमि को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य सरकार ने इसे अनुचित ठहराते हुए सीएडी प्रशासन से पूछा है कि किस आधार पर यह भूमि दी गई।

न्यास को सशर्त दी गई यह भूमि दरई मुख्य नहर के नीचे वाले हिस्से की भूमि है। इसमें उम्मेदगंज तालाब की वह भूमि भी शामिल है, जहां नगर विकास न्यास द्वारा राष्ट्रीय स्तर का पक्षी विहार विकसित किया जाना प्रस्तावित है।

समूची भूमि वैसे पर्यटन दृष्टि से विकसित करने के लिए दी थी, लेकिन कोटड़ी तालाब की जो भूमि दी गई थी, उसमें से तालाब की मुख्य पाल वाली 0.16 हैक्टेयर भूमि पर बजरंगनगर क्षेत्र के लिए श्मशान का निर्माण किया जाना प्रस्तावित था। न्यास ने इसके लिए लेआउट प्लान भी तैयार कर लिया था। उम्मेदगंज में पक्षी विहार बनाने सहित अन्य योजनाओं की रूपरेखा भी तैयार की जा रही थी।

कहां की कितनी भूमि : संसदीय सचिव भवानीसिंह राजावत की अध्यक्षता में 26 अक्टूबर 06 को सर्किट हाउस में हुई बैठक में सीएडी ने नगर न्यास को सशर्त भूमि हस्तांतरित करने की कार्रवाई की थी। न्यास को दी गई भूमि में कोटड़ी तालाब की 9.48 हैक्टेयर, रायपुरा की 79.26 हैक्टेयर और उम्मेदगंज तालाब की 50.50 हैक्टेयर भूमि शामिल थी।

न्यास को भूमि देने की शर्ते

भूमि पर स्वामित्व सीएडी कोटा का यथावत रहेगा तथा जरूरत हुई तो सीएडी इस भूमि को वापस अपने उपयोग के लिए ले सकेगा। इसका कोई हर्जाना देय नहीं होगा।

>> कलेक्टर की देखरेख में न्यास द्वारा निर्माण कार्य कराए जाएंगे।
>> समय- समय पर रखरखाव व मरम्मत आदि की जिम्मेदारी न्यास की होगी।
>> उम्मेदगंज तालाब में पक्षी विहार एवं अन्य तालाबों को पर्यटन की दृष्टि से आकर्षक बनाने के लिए न्यास द्वारा योजना तैयार की जाएगी।
>> यह योजना जलाशयों की श्रृंखला में बनेगी। भूमि का अन्य कार्य में उपयोग नहीं होगा।

यूआईटी को भूमि देने के संबंध में राज्य सरकार ने स्पष्टीकरण मांगा है कि किस आधार पर भूमि दी गई। सरकार से इसकी स्वीकृति लेना चाहिए था। चूंकि न्यास स्वायत्तशासी संस्था है, इसलिए भी भूमि नहीं दी जा सकती।’
-हेमसिंह टाक, एसई, सीएडी, कोटा





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