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स्टे के बावजूद ईओ रिलीव

डूंगरपुर. डूंगरपुर से जहाजपुर नगरपालिका के लिए रिलीव करने के दो दिन बाद चुप्पी तोड़ते हुए नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (ईओ) दिनेश शर्मा ने अपने स्वर मुखर कर दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों के अतिक्रमण हटाने पर उनको रिलीव किया गया।

चेयरमैन ने नियम विरुद्ध रिलीव किया जबकि जबकि अदालत ने उनके स्थानांतरण पर स्टे दे रखा है। श्री शर्मा ने बुधवार को कहा कि करीब एक वर्ष पूर्व उनका तबादला डूंगरपुर से जहाजपुर नगरपालिका में हुआ था। इस पर हाइकोर्ट ने स्टे दे रखा है। इस प्रकरण की अगली सुनवाई आगामी दो सितंबर को है और इस संबंध में नगरपालिका चेयरमैन शंकरसिंह सोलंकी को सूचना दे चुके थे।

कार्यालय पहुंचने से पहले ही रिलीव : शर्मा ने आरोप लगाया कि अदालत के आदेशों को दरकिनार करते हुए पालिकाध्यक्ष सोलंकी ने सोमवार सुबह उनको कार्यालय पहुंचने से पूर्व ही ऑन पेपर रिलीव कर दिया। ऐसी क्या इमरजेंसी थी जिसके कारण उनको दफ्तर पहुंचने से पूर्व ही रिलीव किया जबकि स्थान पर नदबई से स्थानांतरित होकर आने वाले नए अधिशासी अधिकारी भी यहां पहुंचे नहीं थे।

द्वेषतापूर्ण कार्रवाई : इस संबंध में पूछे जाने पर ईओ शर्मा ने कहा कि पालिकाध्यक्ष ने द्वेषतावश यह कार्रवाई की। तबादला आदेशों की सूची देखने से ही जाहिर हो जाता है। इस सूची में उनके साथ ही डूंगरपुर नगरपालिका में लेखाधिकारी के पद पर कार्यरत दिलीपकुमार गुप्ता का तबादला बीकानेर कर दिया गया, लेकिन उन्हें रिलीव नहीं किया गया। इसकी बजाए चेयरमैन ने ईओ का चार्ज भी गुप्ता को सौंप दिया।

प्रभावशालियों के अतिक्रमण हटाने से नाराजगी : ईओ दिनेश शर्मा का आरोप है कि पिछले दिनों हाऊसिंग बोर्ड में हुई वार्ड चौपाल में कलेक्टर ने कुछ स्थानों पर अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे। जिनमें हाऊसिंग बोर्ड क्षेत्र में पार्षद राजकुमारी शर्मा के पति द्वारा किया गया अतिक्रमण भी था। इस दौरान चौपाल में पालिकाध्यक्ष शंकरसिंह सोलंकी भी मौजूद थे।

कलेक्टर के निर्णय पर उनकी भी सहमति भी थी। शर्मा का कहना है कि कानून के दायरे में रहते हुए उन्होंने अवैध अतिक्रमणों को हटाने की कार्रवाई शुरू की थी, जो कईयों को नागवार गुजरी। संभवत: इसी बात को लेकर चेयरमेन की भी उनसे नाराजगी रही होगी।

सभी से निकटता : पालिका उपाध्यक्ष केके गुप्ता से नजदीकी संबंधी बात पर ईओ शर्मा ने कहा है कि वे स्वयं डूंगरपुर शहर के निवासी हैं, इसलिए उनकी उपाध्यक्ष से ही नहीं, बल्कि पालिकाध्यक्ष सहित सभी पार्षदों व शहरवासियों से भी विशेष निकटता है।

ईओ दिनेश शर्मा का तबादले संबंधी मामला अदालत में विचाराधीन है। ऐसे में उन्हें रिलीव किए जाने से पूर्व अदालत के आदेश की पालना की जानी चाहिए थी। इसके बावजूद चेयरमेन ने ईओ को रिलीव किया है तो कुछ सोच समझकर ही निर्णय किया होगा। मेरी उनसे निकटता इतनी ही है कि ईओ भी डूंगरपुर शहर के रहने वाले हैं। साथ ही वे पालिका में ठीक काम कर रहे है इनके खिलाफ कोई शिकायत नहीं मिली है।
—केके गुप्ता, नगरपालिका उपाध्यक्ष, डूंगरपुर

ईओ दिनेश शर्मा के स्थानांतरण पर अदालत के स्टे संबंधी कोई जानकारी मुझे नहीं है। गत वर्ष ईओ का स्थानांतरण जहाजपुर नगरपालिका में हुआ था, जिस पर वे हाईकोर्ट का स्टे लेकर आए थे। स्वायत्त शासन विभाग ने उनका उक्त तबादला ही निरस्त कर दिया था।

अब उसमें कौनसी कार्रवाई बाकी बची है। रही बात लेखाधिकारी के स्थानांतरण की तो उनके तबादला आदेश में बांसवाड़ा से बीकानेर स्थानांतरण करना बताया था। हमने इस भूल सुधार के लिए स्वायत्त शासन विभाग को लिखा है। वहां से संशोधित होकर नया आदेश आ गया है। अब जब नया ईओ आएगा तो हम उसे रिलीव कर देंगें।

लेखाधिकारी का पद नहीं होने के बावजूद छह माह पुराने आदेश पर दिलीप गुप्ता को ज्वाइन कराने के संबंध में जहां तक मेरी जानकारी है उनका तबादला आदेश करीब एक दो माह पुराना है, जिसके आधार पर उन्हें नियुक्ति दी गई है। पार्षद पति सहित अन्य के अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से नाराज होकर उनका तबादला कराने पर मुझे इतना ही कहना है कि मैं तो एक साल पहले ही ईओ दिनेश शर्मा का स्थानांतरण जहाजपुर करा चुका था। वे कोर्ट का स्टे लेकर आ गए थे। अब दुबारा भी मैंने उनका तबादला कराया है तो इसमें नया क्या है। अतिक्रमण से नाराजगी वाली बात कहां पैदा हो गई।
—शंकरसिंह सोलंकी, नगरपालिका अध्यक्ष, डूंगरपुर

पालिका में लेखाधिकारी का पद ही नहीं
डूंगरपुर. अधिशासी अधिकारी दिनेश शर्मा का कहना है कि डूंगरपुर नगरपालिका में लेखाधिकारी का पद ही नहीं है। करीब दस माह पूर्व दिलीप कुमार गुप्ता का तबादला बांसवाड़ा से डूंगरपुर नगरपालिका में कर दिया गया था। तब चेयरमैन सोलंकी ने स्वायत्त शासन विभाग को पत्र लिखकर कहा कि नगरपालिका डूंगरपुर की वित्तीय स्थिति दयनीय है।

अत: लेखाधिकारी दिलीप गुप्ता को यहां ज्वाइन नहीं कराया जा सकता। उन्होंने लेखाधिकारी गुप्ता को बेरंग लौटा दिया था। नियमानुसार छह माह तक तबादला आदेशों की पालना नहीं होने पर उक्त आदेश स्वत: ही निरस्त हो जाता है। इसके बावजूद दिलीप गुप्ता को लेखाधिकारी पद पर नियुक्ति दे दी गई।





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