सचिन तेंडुलकर मैदान से बाहर हों या भीतर टीम के लिए उनका योगदान कभी कम नहीं होता। हाल में मास्टर-ब्लास्टर सचिन की सलाह से भारतीय टीम को एशिया कप के दौरान काफी फायदा मिला है। सचिन का ही सुझाव था कि बाएं हाथ के बल्लेबाज सुरेश रैना को तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए भेजा जाए। जिसका अब तक भरपूर फायदा टीम इंडिया को मिला है। एशिया कप में पिछले हफ्ते पाकिस्तान के विरुद्ध मैच में रैना को तीसरे नंबर पर खेलने के लिए भेजा गया।
उस समय 300 रनों का पीछा करने उतरी भारत की टीम की शुरुआत काफी खराब थी। गंभीर के 12 रन पर आउट हो जाने के बाद तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे रैना (84) ने सहवाग (119) के साथ मिलकर दूसरे विकेट के लिए 198 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी कर मैच का रुख भारत की ओर मोड़ दिया। तीसरे नंबर पर उतरे रैना ने अपनी इस शानदार पारी में 69 गेंदों में 10 चौके और तीने छक्के की मदद से 84 रनों की पारी खेली। सुरेश रैना ने एशिया कप में अब तक दो शतक और एक अर्धशतक लगा चुके हैं। सचिन का स्पष्ट रूप से मानना है कि न केवल वनडे में बल्कि टेस्ट मैचों में भी नंबर तीन के स्थान पर भारत की ओर से खेलने के लिए रैना सबसे सशक्त खिलाड़ी हैं।
सचिन ने रैना को नंबर तीन पर भेजने की सलाह सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया में चल रही वीबी सीरीज के दौरान पिछले सीजन में दी थी। पर उस त्रिकोणीय सीरीज के किसी भी मैच में रैना को खेलने का मौका नहीं मिला। इंडियन प्रीमियर लीग में अच्छा प्रदर्शन कर रैना ने एक बार फिर एशिया कप के लिए चुने जानी वाली टीम में स्थान पक्का किया। सचिन ग्रोइन की चोट की वजह से एशिया कप के दल में शामिल नहीं हुए। सचिन ने टूर्नामेंट की शुरुआत में ही कोच गैरी कस्र्टन को और बाद में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को फोन कर रैना को बल्लेबाजी के लिए ऊपर क्रम में भेजने का सुझाव दिया था।
गौरतलब है कि सचिन वनडे के न सिर्फ सबसे सफल खिलाड़ी हैं, बल्कि पिछले सीजन में धोनी को कप्तानी दिलाने में भी उनकी अहम भूमिका रही। कप्तान धोनी ने सचिन की इस सलाह को माना और रैना को भी इससे अवगत कराया कि उन्हें ऊपर के क्रम में बल्लेबाजी के लिए भेजा जाएगा।
रैना को तीसरे नंबर पर भेजने के सचिन के तर्क का मूल यह है कि बाएं हाथ का बल्लेबाज नंबर तीन के पोजीशन पर प्राय: फिट बैठता है और उत्तर प्रदेश का यह बल्लेबाज टीम के लिए लंबे समय तक खेल सकता है। सचिन के इस सलाह के पीछे की मुख्य वजह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिकतर तेज गेंदबाजों को बाएं हाथ के बल्लेबाज को गेंद फेंकने में दिक्कत होती है। भारतीय तेज गेंदबाज भी अपवाद नहीं हैं। दाएं हाथ के तेज गेंदबाजों को खब्बू बल्लेबाजों को गेंद फेंकने के लिए अपनी फील्ड प्लेसमेंट से लेकर अपनी लाइन लेंग्थ को बार-बार एडजस्ट करना पड़ता है।