Manoranjan
Cinema
Bollywood Bollywood परदे के पीछे.एक अनुभवी फिल्मकार हैं, जिन्होंने अपने लंबे कैरियर में सिर्फ एक बड़ी हिट बनाई और ढेरों बहुसितारा डब्बे बनाए हैं। वह किसी तरह से सितारों की भीड़ जुटा लेता है और खुद को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक मानता है। उसका दृढ़ भरोसा है कि जिसके साथ भी उसका विवाद होता है ईश्वर उसे दंडित करते हैं। उनके मतानुसार ईश्वर का एकमात्र काम उनके विरोधियों को दंड देना है। यह कैसे संभव है कि ईश्वर केवल एक व्यक्ति के लिए ही सक्रिय रहे। उन्होंने अपने निजी बौनेपन से अपने ईश्वर का कद भी छोटा कर दिया है। हम सभी अपने ईश्वर की छवि अपनी महत्वाकांक्षाओं, सपनों और डर के अनुरूप गढ़ते हैं।
गोयाकि दिव्य गुण नहीं अपनाते हुए अपनी कल्पना का अपना निजी ईश्वर गढ़ते हैं। महान लोग ईश्वर से सबके कल्याण की प्रार्थना करते हैं। चोर, मवाली और झूठे लोगों की भी ईश्वर की अपनी कल्पना होती है, अपना यकीन होता है। हमारे इतिहास के एक दौर में ठग लोग काली मां के जबरदस्त भक्त रहे हैं अर्थात ईश्वर या उसकी कल्पना पर किसी का एकाधिकार नहीं है। अच्छे काम करने वाला अपने काम के पहले शायद प्रार्थना नहीं करे परंतु बुरे लोग यकीनन अपने ईश्वर से अपनी सफलता की प्रार्थना करते हैं राजकपूर की ‘बूट पॉलिश’ में बस्ती का मवाली जॉन चाचा प्रार्थना करता है कि आज नकली दारू बेचने में कामयाबी देना क्योंकि भारी बारिश में बच्चा लोग भूखा है। वह अनाथ बच्चों की खातिर ईश्वर से बुरे काम में सफलता के लिए प्रार्थना करता है, बहरहाल ईश्वर निजी कल्पना के क्षेत्र में आते हैं।
कुणाल कोहली की ‘दुश्मन’ और ‘मैरी पॉपिंस’ से प्रेरित सैफ-रानी अभिनीत खिचड़ी और फूहड़ फिल्म ‘थोड़ा प्यार थोड़ा मैजिक’ में यूं तो सारे पात्र यथार्थ से दूर और फॉमरूले की कोख से जन्मे हैं परंतु इसमें ईश्वर का पात्र जिसे ऋषिकपूर ने बखूबी निभाया है बड़ा ही खिलंदड़ और मनमौजी प्राणी है, ये दोस्ताना पात्र है। अमीषा पटेल की पार्टी को बच्चों ने नष्ट कर दिया और हताशा में उसके मुंह से निकलता है ‘ओह गॉड’ और ईश्वर सफाई कर्मचारी के रूप में अवतरित होकर अमीषा से पूछते हैं कि क्या वे उसकी कुछ मदद कर सकते हैं। अमीषा उनकी ओर हिकारत से देखती है। किसी भी व्यक्ति को हिकारत से मत देखिए जाने ईश्वर किस भेष में आए हों। आखिरी सीन में भी वे रानी से कहते हैं कि जा दुष्ट परी अब तुझसे नहीं मिलूंगा। डांट सा दिखने वाला यह संवाद रानी के लिए आशीर्वाद है क्योंकि वह प्यार के कारण मनुष्य रूप में धरती पर ही रहना चाहती है।
फिल्मों में ईश्वर से नायक द्वारा सीधे संवाद के दृश्य अनेक बार आए हैं। अमिताभ बच्चन ने युवा आक्रोश की मुद्रा में ही प्रार्थना की है। हॉलीवुड की ‘फिडलर ऑन द रूफ’ का नायक ईश्वर से मित्र की तरह बात करता है। दक्षिण भारत में बनी एक हिंदी फिल्म में गरीब महत्वाकांक्षी नायक ईश्वर से प्राय: बात करता है। धन कमाने में सफल होते ही, धन के लिए भागदौड़ करते हुए अब बार-बार दवा खाना पड़ती है, कभी फलाना मायसिन तो कभी डिमाका मायसिन। मित्र ईश्वर अवतरित होकर कहते हैं कि यह माय सिन (मेरा अपराध) है-मायसिन (दवाई) नहीं।
मजे की बात यह है कि व्यक्ति का जो व्यवसाय होता है, उसकी कल्पना के ईश्वर उस व्यवसाय के जानकार होते हैं। इसलिए सटोरिया अपने ईश्वर से सट्टे का अंक पूछता है। यह भी विचारणीय है कि पुरुष पात्र अपने ईश्वर से बेतकल्लुफ हो जाते हैं और मित्रवत बतियाते हैं परंतु नारी पात्र हमेशा पूरी गंभीरता से प्रार्थना करती है। संस्कार के नाम पर सदियों से जैसा नारियों को ढाला है, उसके अनुरूप ही उनका ईश्वर भी है।