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Personal Finance Personal Finance दक्षिण अफ्रीका से लौटकर
दक्षिण अफ्रीका में बड़े उद्यमियों के साथ ही कम पूंजी के सहारे कारोबार करने वालों की तादाद लगातार बढ़ रही है। एक ओर यहां विजय माल्या का माबुला रिसॉर्ट दुनिया में नाम कमा रहा है, तो दूसरी ओर अंबानी की नजर दूरसंचार कंपनी एमटीएन पर है। टाटा और मित्तल भी यहां अपना कारोबार बढ़ाने की फिराक में है, लेकिन इससे अलग कम पूंजी लगाकर कारोबार करने वाले भारतीय मूल के लोगों की संख्या हजारों में है।गुजरात के जयेश पटेल इसी भारतीय युवा पीढ़ी का हिस्सा हैं, जो पूरी दुनिया में छा जाने को बेताब हैं।
दक्षिण अफ्रीका के वूस्टर इलाके में टाटा के सबसे बड़े डिस्ट्रीब्यूटर पटेल बताते हैं कि पूरे वूस्टर में रिटेल सेक्टर पर भारतवंशियों की पकड़ है। इसमें गुजरात के 90 फीसदी और महाराष्ट्र के तकरीबन दस फीसदी लोग लगे हैं। वहीं, पूरे दक्षिण अफ्रीका का करीब 60 फीसदी रिटेल कारोबार भारतवंशियों के पास है। दक्षिण अफ्रीका में रह रहे भारतीयों ने अपनी परंपराओं और संस्कृति से मुंह नहीं मोड़ा है। कोई भी पर्व हो या फिर अन्य कार्यक्रम भारतीय इसे मिलकर मनाते हैं। यहां पर भारतीयों के समारोह देखकर दक्षिण अफ्रीकी भी इनके साथ हो जाते हैं और मिलकर खुशियां बांटते हैं।
बदलाव की बयार
पटेल बताते हैं कि बदलाव की बयार असल में 1994 से शुरू हुई। देश में लोकतंत्र स्थापित होने के बाद स्थानीय अश्वेत लोगों के साथ भारतवंशी लोगों की किस्मत ने भी करवट बदली है। यहां पर बड़े बदलाव हुए हैं।
नैनो पर निगाह
दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों की तरह ही नैनो कार को लेकर क्रेज है। माना जा रहा है कि टाटा कंपनी उसे यहां लांच कर सकती है।
सरकारी नौकरी में दखल
यहां की सरकारी नौकरियों में भी भारतवंशियों की अच्छी संख्या है। दरअसल अश्वेतों को दिए गए आरक्षण का फायदा यहां के भारतीय मूल के लोगों को भी बड़े पैमाने पर मिल रहा है, जिससे प्रशासन और सत्ता में वे बढ़चढ़कर भाग ले रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों की तरह ही नैनो कार को लेकर क्रेज है। माना जा रहा है कि टाटा कंपनी उसे यहां लांच कर सकती है।
माल्या की एयरलाइन
इसी तरह विजय माल्या यहां अपने वाइन लैंड का विस्तार करने के साथ अगले साल यहां से किंगफिशर एयरलाइन शुरू करने का इरादा रखते हैं। इस योजना के शुरू होने से साउथ अफ्रीका में रहने वाले भारतीयों के सा-साथ वहां की आम जनता को भी फायदा होगा।