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वर्ल्ड हेरिटेज दर्जा खतरे में

जयपुर. परिंदों के लिए पानी के संकट को लेकर घना अभयारण्य का वल्र्ड हेरिटेज का दर्जा खतरे में पड़ा हुआ है। घना को वल्र्ड हेरिटेज से निकालने के संबंध में विचार के लिए कनाडा में वल्र्ड हेरिटेज कमेटी की बैठक हो रही है। दो से छह जुलाई तक चलने वाली इस बैठक में घना के भविष्य पर फैसला होगा।

यूनेस्को के इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर की वल्र्ड हेरिटेज कमेटी इस साल मार्च महीने में राज्य का दौरा कर घना अभयारण्य को वल्र्ड हेरिटेज से बाहर निकालने की आशंका जता चुकी है।

भारत में अभी वल्र्ड हेरिटेज के चार नेचुरल पाइंट्स हैं। इनमें घना के अलावा नंदादेवी (उत्तराखंड) तथा काजीरंगा व मनास (असम) शामिल हैं। कनाडा में हो रही बैठक में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के विशेषज्ञ विनोद माथुर घना अभयारण्य के लिए भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। बैठक की कार्यसूची में घना को प्रमुखता से लिया गया है।

राज्य में दौरे के दौरान यूनेस्को के दल ने घना पक्षी अभयारण्य को बचाने के लिए जून माह तक वहां परिंदों के लिए पानी के इंतजाम करने की जरूरत बताई थी। हालांकि पानी के लिए पुख्ता इंतजाम अभी तक नहीं हुए हैं, लेकिन मानसून की अच्छी बरसात से इस साल घना में पानी की उपलब्धता हो गई है।

राज्य सरकार ने यमुना नदी का पानी गोवर्धन ड्रेन के जरिए घना अभयारण्य तक लाने के लिए 56 करोड़ 20 लाख रुपए की परियोजना बनाई है। इसके तहत 17.1 किमी लंबी भूमिगत पाइपलाइन बिछाई जानी है। इससे घना को करीब 350 मिलियन क्यूबिक फीट पानी हर साल मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा घना में पानी पहुंचाने के लिए चिकसाना केनाल भी बनाई गई है। इससे करीब 60-70 मिलियन क्यूबिक फीट पानी हर साल मिलने की संभावना है। घना अभयारण्य को 550 मिलियन क्यूबिक फीट पानी की हर साल जरूरत है।पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी ने भी भी घना में पानी पहुंचाने के लिए की जाने वाली वैकल्पिक व्यवस्था पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया था।

क्यों मंडरा रहा है खतरा
पानी की कमी के चलते परिंदों की रौनक घटने से घना अभयारण्य आने वाले सैलानियों की तादाद लगातार घट रही है। इसलिए दुनिया की इस ऐतिहासिक धरोहर पर खतरा पर मंडरा रहा है।

घना के भविष्य का फैसला कनाड़ा में हो रही वल्र्ड हेरिटेज कमेटी की बैठक में होगा। इसमें तय होगा कि घना का वल्र्ड हेरिटेज का दर्जा कायम रहे या हटा दिया जाए।
आर.एन. मेहरोत्रा, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक





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