जयपुर.
मंत्री के दरवाजे पर आज सुदामा नहीं, लेकिन हालात जस के तस हैं। भरी दुपहरी में भीड़ जमा है। मंत्रीजी अंदर हैं। एक महिला, गार्ड के आगे गड़गिड़ाते हुए हाथ जोड़ती है। मंत्री तक अपनी अर्जी पहुंचाने की दरख्वास्त। सफलता नहीं मिलती। ..अनजान लोगों से भी अनुनय ..आखिर धैर्य जवाब दे गया और वह फफक कर रोने लगती है।
कुछ देर बाद मंत्री बाहर निकले। भीड़ चीरते हुए महिला भी आगे बढ़ी, अपनी अर्जी सरकाई। बोलना शुरू करती, इससे पहले ही वर्मा बोले, कितनी बार आओगी? कह दिया न देख लेंगे, तुम्हारा मामला। मंत्री अर्जियों पर दस्तखत करते हुए आगे बढ़े और गाड़ी में बैठकर चल दिए...। यह है राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक स्कूल बली जस्साखेड़ा (राजसमंद) की प्रधानाध्यापिका राजकुमारी शर्मा। जयपुर में रहती हैं।
उनके दोनों हाथ जैसे विनय की मुद्रा में आपस में बंध चुके हैं। बताती हैं कि अरसे से मंत्रियों के चक्कर लगा रही हूं। पिछले 20 साल से ग्रामीण सेवा में हूं। परिणाम अच्छा रहा है, लेकिन तबादले की कोई सुनता ही नहीं। आज फिर से मंत्री के यहां आई तो उन्होंने डपट दिया। जब महिला मुख्यमंत्री के राज में हमारा यह हाल है तो आगे भगवान ही मालिक है।
वे बताती हैं कि घर में दो बड़ी बेटियां हैं। बुजुर्ग सास-ससुर अकसर बीमार रहते हैं। पति मेरी नौकरी से इतने तंग आ चुके हैं कि जान देने की धमकी देने को मजबूर हो जाते हैं। अब परिवार टूटने की नौबत आ गई है। पीड़िता को रोता देख लोग उन्हें संबल दिलाते हैं। एक रिटायर्ड कर्नल द्वारका प्रसाद भी महिला को सब-कुछ ठीक होने का दिलासा देते हैं।
राजकुमारी कहती है कि दो सौ बच्चों और दस शिक्षकों को हैंडल करने वाली महिला आज मंत्री के दरवाजे पर रोने को मजबूर है। यदि महिला के आंसू से भी मंत्री का दिल नहीं पसीजता है तो वे शुक्रवार को अपनी अर्जी लेकर मुख्यमंत्री के पास जाएंगी। शायद महिला राज में एक दुखियारी को न्याय मिल जाए..।
मंत्री की पत्नी से मुलाकात की कोशिश : कहने को तो शिक्षा विभाग में तबादलों का काम खत्म होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन शिक्षा राज्यमंत्री के आवास पर दिनभर भीड़ जमी रहती है। यह सिलसिला गुरुवार को भी बना रहा। मंत्री की गैरमौजूदगी में राज्य के विभिन्न भागों से आए कर्मचारी यहां-वहां बैठे मंत्री का इंतजार करते रहे। कई ने तो कर्मचारियों के मार्फत मंत्री की पत्नी से भी मुकाकात की कोशिश की, लेकिन निराशा हाथ लगी।