bhaskar Web English
HomeNewsMetrosJaipur Jaipur

रिंग रोड का फैसला आज संभव

जयपुर. रिंग रोड पर पिछले लंबे समय से चल रही प्रशासनिक कसरत शुक्रवार को होने वाली हाईपावर कमेटी की बैठकके बाद थमने की संभावना है। रिलांयस एनर्जी की ओर से बैठक में 2700 करोड़ रुपए का रेवेन्यू मॉडल पेश किया जाएगा।

यानी रिंग रोड का निर्माण करने के अलावा सरकार को कंपनी की ओर से यह राशि दी जाएगी। रिलांयस के इस प्रस्ताव को सरकार के स्तर पर मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इससे पहले रिलांयस की ओर से रिंग रोड के बदले एक हजार करोड़ रुपए के प्रस्ताव को हाईपावर कमेटी नामंजूर कर चुकी है।

उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि रिलायंस एनर्जी की ओर से शुरुआती दौर में रिंग रोड बनाने के बदले राज्य सरकार से सब्सिडी की मांग की जा रही थी, जबकि हाईपावर कमेटी ने कंपनी को बदले में दी जाने वाली जमीन की कीमत को देखते हुए निर्माता कंपनी को पॉजिटिव बिड का प्रस्ताव देने के लिए कहा।

इस पर चार माह पहले रिलायंस ने रिंग रोड के बदले 15 करोड़ रुपए का प्रस्ताव दिया था, जिसे सरकार ने नामंजूर कर दिया। बाद में रिलायंस ने इसे बढ़ाकर एक हजार करोड़ का रेवेन्यू मॉडल पेश किया, लेकिन हाईपावर कमेटी ने इस राशि को 2500 से 3000 करोड़ के बीच लाने पर जोर देते हुए संशोधित रेवेन्यू मॉडल पेश करने के लिए कहा था।

सूत्रों ने बताया कि रिलांयस एनर्जी की ओर से राज्य सरकार के समक्ष 2700 करोड़ रुपए का रेवेन्यू मॉडल पेश करने की मौखिक सहमति दे दी गई है, यानी यदि रिंग रोड का निर्माण रिलांयस एनर्जी करती है तो सरकार को 2700 करोड़ रुपए की आय होगी। सरकार के स्तर पर भी इस राशि को संतोषजनक माना गया है।

अब शुक्रवार को होने वाली हाईपावर कमेटी की बैठक में रिलायंस एनर्जी इस मॉडल को पेश करेगी, जिस पर अंतिम फैसला होने की उम्मीद है। बैठक में सकारात्मक फैसला होने की स्थिति में रिंग रोड के लिए टेंडर आयोजित किए जा सकेंगे।

दूसरी कंपनी मैदान में आई तो लंबा खिंचेगा मामला
रिंग रोड प्रोजेक्ट स्विस चैलेंज सिस्टम के तहत पूरा होना है। स्विस चैलेंज के तहत जो कंपनी प्रोजेक्ट की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करती है, प्रोजेक्ट का निर्माण करने के लिए पहला हक उसी का बनता है। ज्यादा कंपनियां आने पर आपस में प्रतिस्पर्धा होगी। यदि टेंडर में कोई दूसरी कंपनी रिंग रोड बनाने के लिए आगे आती है तो टेंडर फाइनल होने में ज्यादा समय लगेगा।

धरातल पर कई काम बाकी
145 किलोमीटर में प्रस्तावित रिंग रोड के लिए अभी तक अजमेर रोड से आगरा रोड के बीच सिर्फ 47 किमी क्षेत्र में किसानों की भूमि अवाप्त हो पाई है। इसके अलावा आगरा रोड से दिल्ली रोड होते हुए वापस अजमेर रोड तक 98 किमी क्षेत्र में तो भूमि अवाप्ति की प्रक्रिया ही शुरू नहीं हो पाई है।

रिलायंस कंपनी की ओर से इस क्षेत्र में किए गए अलाइनमेंट में भी कई कमियां हैं, जिनको पूरा करने के लिए जेडीए ने कंपनी को कहा है। इसके अलावा संपूर्ण रिंग रोड पर दस जगह इंटरचेंज (फ्लाईओवर का विकसित रूप) बनाए जाने हैं। अभी तक इनके निर्माण में काम आने वाली जमीन का खसरा प्लान तैयार नहीं हुआ है। खसरा प्लान बनने के बाद ही भूमि अवाप्ति संभव है।

रिंग रोड के संबंध में शुक्रवार को हाईपावर कमेटी की बैठक होगी। रिलांयस की ओर से इस बैठक में संशोधित रेवेन्यू मॉडल रखा जाएगा। उम्मीद है कि इस मॉडल पर सहमति बन जाएगी और टेंडर जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
—रामबाबू गुप्ता, सलाहकार, रिंग रोड प्रोजेक्ट





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: