HomeNewsMetrosBhopal Bhopal

रूट-लूट में उलझे अफसर

भोपाल. राजधानी में लूट का भूत अधिकारियों पर कुछ इस तरह हावी है कि उनसे रूट की बात करने पर वे लूट के बारे में बताने लगते हैं। इसका उदाहरण हाल ही में देखने मिला। राष्ट्रपति और भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की भोपाल यात्रा को लेकर जिला और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने सीएसपी और थाना प्रभारियों की बैठक ली।

वरिष्ठ अधिकारियों ने राष्ट्रपति और श्री आडवाणी की यात्रा को लेकर तय किए गए रूट के संबंध में सीएसपी से पूछा। फिर क्या था दो सीएसपी असमंजस में पड़ गए कि यात्रा को लेकर बैठक में लूट पर क्यों चर्चा हो रही है। वरिष्ठ अधिकारियों से वे पूछ भी नहीं सकते थे कि उन्होंने पूछा क्या है, सो वे अपने संभाग की लूट बताने लगे। जब उन्हें बताया गया कि लूट नहीं रूट के संबंध में पूछा जा रहा है, तो वे बगले झांकने लगे। महिला से नजदीकियां
वर्दी की आड़ में महिलाओं से अवैध संबंध के किस्से अब आम हो चले हैं। यह संबंध चाहे महिला पुलिसकर्मियों से हो या फिर अन्य किसी महिला से, पुलिस अफसर भी इसमें पीछे नहीं है।

ऐशबाग थाने के एक तेजतर्रार एएसआई भी कुछ इसी मिजाज के हैं। थाना क्षेत्र में रहने वाली एक महिला से उनकी नजदीकियां चर्चा में है। ऊपर तक पहुंची शिकायतों के अनुसार समय मिलते ही ये साहब महिला के घर पहुंच जाते हैं। कुछ देर समय बिताने के बाद वापस उनकी ड्यूटी शुरू हो जाती है। ऐसा न हो कि साहब को कुछ समझ में आए इसके पहले ही यह नजदीकियां गले की हड्डी न बन जाएं।

व्यवस्थाओं में अनुभव की कमी
भारत बंद के दौरान राजधानी के पुराने शहर में पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं पुलिस के सामने हरुई। अधिकारी हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं के सामने नत मस्तक थे। कार्यकर्ता जबरदस्ती दुकान बंद करा रहे थे, लेकिन पुलिस उन्हें ऐसा करने से नहीं रोक पाई। इसके बाद हुए पथराव और उपद्रव को रोकने के लिए अधिकारियों के पास रणनीति का अभाव था।

पुलिस भी इस दौरान पत्थर खाती रही। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए? तीन घंटे से ज्यादा समय तक भोपाल टाकीज चौराहे पर यही नजारा था। पहले ही सूझबूझ से रास्ता रोक देते तो कितने ही वाहन टूटने से बच सकते थे, लेकिन बात वही अनुभव की कमी।

मदद करना भाई
भारत बंद का आह्वान सत्तारूढ़ दल के समर्थक संगठनों द्वारा किए जाने से राजधानी के कई थाना प्रभारी बेहद परेशान रहे। कुछ थाना प्रभारियों ने तो बुधवार की रात से ही अपने इलाके में बंद को लेकर तैयारी शुरू कर दी थी।

एक थाना प्रभारी अपने इलाके के पेट्रोल पंप संचालकों से कह रहे थे- यार पंप बंद रखना ही ठीक रहेगा, यदि किसी सिरफिरे ने पत्थर फेंक दिया तो जबरन नुकसान हो जाएगा। इसी तरह एक अन्य थाना प्रभारी ने व्यापारियों को फोन करके कहा- मौसम अच्छा है इसलिए आप लोग दुकानें बंद रखकर केरवा डेम पर गोट (सहभोज) करने चले जाओ। जाहिर है, टीआई कोई रिस्क नहीं लेना चाहते थे। उनकी इस नेक सलाह पर व्यापारियों ने अमल भी किया।

थाना प्रभारियों ने ली राहत की सांस
तबादला सूची जारी होने के बाद शहर के थाना प्रभारी खुश हैं। इनमें वे थाना प्रभारी भी शामिल हैं, जिनका तबादला नहीं हुआ। तबादला होने वाले इसलिए खुश हैं कि उन्होंने जहां की इच्छा जाहिर की थी, उन्हें वहीं भेज दिया गया।

अब वे किसी नए मामले में हाथ नहीं डाल रहे। वे इस इंतजार में हैं कि कब वे रिलीव हों और नए जिले में नई पारी की शुरुआत करें। यहां किसी मामले में उलझ गए तो लेने के देने भी पड़ सकते हैं। वे अब यह कहते नहीं थकते कि नौकरी करना है, जहां भेजा है वहां चले जाएंगे।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: