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रिनी की हालत में सुधार

भोपाल. वन विहार में अब बची एकमात्र सफेद बाघिन ‘रिनी’ की हालत में सुधार हुआ है। डाक्टरों की उम्मीद है कि इस वृद्ध बाघिन के कैंसर का उपचार हो जाएगा। राष्ट्रीय उद्यान वन विहार में सोमवार को सफेद बाघिन ‘कीकू’ की मौत के बाद वन्य प्राणी प्रेमियों और सैलानियों को यह चिंता सता रही है कि शायद कुछ दिनों बाद उन्हें यहां सफेद बाघिन देखने को भी नहीं मिले।

वन विहार के डाक्टरों के अनुसार कैंसर से पीड़ित वन विहार में एकमात्र सफेद बाघिन रिनी वैसे तो अत्यंत वृद्ध है, लेकिन 14 जून से चल रहे कीमोथैरेपी के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ है। रिनी की खुराक पहले से ज्यादा बढ़ गई है।

ज्ञात हो कि 10 मई को रिनी की आंख का आपरेशन हुआ था, आपरेशन के दौरान आंख का ट्यूमर कैंसरग्रस्त होना पाया गया था। इसके बाद भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान केंद्र बरेली के मार्गदर्शन में रिनी के कैंसर का इलाज चल रहा है। वर्तमान में वह 17 साल की हो चुकी है। इस हिसाब से वह अब बहुत अधिक तो नहीं जिएगी, लेकिन कैंसर का उपचार हो जाने से उसकी आयु कुछ बढ़ सकती है।

हड्डीयुक्त मांस नहीं खा पा रहे जानवर : वन विहार के वन्य प्राणी चिकित्सक अतुल गुप्ता ने बताया कि आधे से अधिक ‘सिंह’ अपनी उम्र को पार कर चुके हैं। इनकी औसत उम्र 15 साल मानी जाती है। वन विहार में मौजूद 15 सिंहों में 8 सिंह वृद्ध हो चुके हैं।

अधिकतर सिंह हड्डीयुक्त मांस नहीं खा पा रहे हैं। अब इन्हें हड्डीयुक्त मांस की बजाय साफ्ट मांस दिया जा रहा है। इसके अलावा इनकी ताकत बढ़ाने और इन्हें स्वस्थ रखने के लिए समय-समय पर कैल्शियम और मल्टी विटामिन भी दिए जा रहे हैं। जैसा कि उम्र बढ़ने के साथ लीवर की शिकायत बढ़ जाती है, इसे ध्यान में रखते हुए वन विहार के वृद्ध हो चुके सिंहों को लीवर टानिक भी दी जा रही है।

ये सिंह हो चुके वृद्ध
रेहाना, इंदर, जॉनी, अमर, एंथोनी, बादल, अकबर एवं रामू

ये बाघ हो चुके वृद्ध
सलमा (पांव में मोटी गठान), शिवानी

>> अधिकतर बाघ और सिंह वृद्ध हो चुके हैं। इनकी पूरी देखभाल की जा रही है। ‘रिनी’ धीरे-धीरे स्वस्थ हो रही है। इसका अच्छी तरह उपचार किया जा रहा है।
एके खरे सहायक संचालक, वन विहार





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