भोपाल. केंद्र सरकार एक ओर पूरे देश में वायु प्रदूषण को रोकने के लिए ‘भारत स्टेज-3’मापदंड की गाड़ियां चलाने पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर राजधानी समेत पूरे प्रदेश में प्रदूषण को नापने से लेकर रोकने तक का कोई इंतजाम नहीं है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार भोपाल, इंदौर और जबलपुर शहर में सबसे अधिक प्रदूषण वाहनों के कारण ही होता है। देश का दिल कहे जाने वाले भोपाल में चार पहिया वाहनों से फैलने वाले प्रदूषण को नापने से लेकर नियंत्रण करने तक के लिए कोई इंतजाम नहीं है, जिसके कारण शहर में वायु प्रदूषण का शिकंजा कसता जा रहा है।
राजधानी में आज की तारीख में करीब 75 हजार से अधिक चार पहिया वाहन दौड़ रहे हैं, लेकिन एक वर्ष में १क्क् वाहनों का भी प्रदूषण चेक नहीं हो पाता है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश के छोटे शहरों की क्या स्थिति होती होगी।
शहर में कुछ वष्रो पहले चार पहिया वाहनों के प्रदूषण को नापने के लिए बकायदा एक मुहिम शुरू की गई थी, लेकिन भारी विरोध के कारण परिवहन विभाग को अपना हाथ पीछे खींचना पड़ा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अभियान के तहत वाहनों की जांच करता है।
परिवहन विभाग के पास इसकी कोई व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण शहर में आज भी कई पुराने वाहन दौड़ रहे हैं। वर्ष 2007-08 में मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 98 चार पहिया वाहनों की जांच की थी। जिसमें से 9 वाहन प्रदूषण फै लाने के दायरे में आए।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2007-08 में ही इंदौर में 314 चार पहिया वाहनों का प्रदूषण नापा गया, जिसमें 11 वाहन प्रदूषण की मार झेल रहे थे, जबकि इसी अवधि में रतलाम में तीन चार पहिया वाहनों का प्रदूषण नापा गया था। होशंगाबाद में 21, ग्वालियर में 19, जबलपुर 93, सतना में 2 और रीवा में 7 चार पहिया वाहनों का प्रदूषण चेक किया गया।
केंद्रीय सरकार की क्या है घोषणा
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने घोषणा की है कि 1 अप्रैल 2010 से यूरो-4 के समकक्ष भारत स्टेज - 4 मापदंड वाली गाड़ियां ही देश के 11 बड़े महानगरों में चलेंगी, जबकि भारत स्टेज-3 मापदंड बाकी सभी शहरों में लागू होंगे। प्रदेश में भारत स्टेज -3 मापदंड वाले ही चार पहिया वाहन चलेंगे।
केंद्रीय परिवहन व राजमार्ग मंत्री टी.आर. बालू ने पिछले दिनों कहा कि मंत्रालय इस नियम को जल्दी ही अधिसूचित कर देगा। यह निर्णय ऑटो-फ्यूल पॉलिसी की मशेल्कर समिति की रिपोर्ट पर आधारित है, जिसके तहत हवा की गुणवत्ता को सुधारने का प्रयास किया गया है।
शहर चेक किया गया प्रदूषित वाहन
भोपाल 98 9
होशंगाबाद 21 1
इंदौर 314 11
ग्वालियर 19 0
जबलपुर 93 3
सतना 2 0
रीवा 7 3
>> चार पहिया गाड़ियों के प्रदूषण को नापने की जिम्मेदारी परिवहन विभाग की है, लेकिन यह काम पिछले कुछ बरसों से बंद पड़ा है। हमने कुछ निजी कंपनियों को इसकी जिम्मेदारी दी थी, लेकिन किसी कारणवश इसे बंद करना पड़ा।
दिनेश जैन, आरटीओ