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बीएएलएलबी भी खतरे में

बिलासपुर. पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में पांच वर्षीय बीएएलएलबी पाठ्यक्रम पिछले दो सालों से बिना मान्यता के चल रहा है। बार काउंसिल आफ इण्डिया ने इस कोर्स को 3 साल के लिए अस्थायी मान्यता दी थी। इसकी समयावधि 2005-06 में समाप्त हो गई। इसके बावजूद, रविवि प्रशासन ने पिछले दो साल से इस कोर्स में दाखिला जारी रखा है।

बार काउंसिल ने 2003 इस कोर्स को अस्थायी मान्यता देते हुए अध्ययनशाला में ढेरों कमियां गिनाई थी। कमियां दूर करने काउंसिल ने विवि को 3 साल की मोहलत दी थी। बताते हैं कि विवि ने 4 साल में जो सुविधाएं जुटाईं, बार कौंसिल उससे संतुष्ट नहीं है। सूत्रों ने बताया कि 6 जुलाई को बार काउंसिल आफ इण्डिया का दल अध्ययनशाला का निरीक्षण करने आ रहा है। इसके बाद कोर्स की मान्यता के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।

बार काउंसिल की टीम ने अस्थायी मान्यता देते हुए भवन की व्यवस्था, लाईब्रेरी, मूट कोर्ट, कंप्यूटर कक्ष सहित अन्य सुविधाएं जुटाने की हिदायत दी थी, लेकिन निरीक्षण के बाद सुविधाएं जुटाने की दिशा में कोई भी काम नहीं किया गया है और अध्ययनशाला की हालत जस की तस है। स्टूडेंट्स का कहना है कि अध्ययनशाला में योग्य शिक्षकों की भी कमी है।

अधिवक्ताओं के भरोसे अध्ययन का काम चल रहा है। इस पाठ्यक्रम के प्रथम बैच के स्टूडेंट्स के नतीजे दो दिन पहले ही घोषित किए गए हैं। इस साल पास होने वाले स्टूडेंट्स भी मान्यता को लेकर सशंकित हैं। उनका कहना है कि मान्यता नहीं मिली तो करियर चौपट हो सकता है। विधि अध्यनशाला के विभागाध्यक्ष डा. सीएल पटेल ने बताया कि इसके पहले वर्ष 2006 में काउंसिल की टीम ने निरीक्षण किया था, लेकिन किसी कारणवश निरीक्षण नहीं हो पाया था।

2007 में निरीक्षण की सूचना मिली था। इस बार भी तारीख आगे बढ़ा दी गई। कमियों को पूरा करने की कोशिश की जा रही है। भवन और लाइब्रेरी का काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि स्टूडेंट्स के भविष्य को देखते हुए मान्यता मिलने की संभावना है।





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