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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस सतीश कुमार अग्निहोत्री ने वैकल्पिक नवाचारी अनुदेशक एवं अनुदेशिका कल्याण संघ विरुद्ध भारत शासन की याचिका की सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि अनुदेशकों को शिक्षाकर्मी के रूप में भर्ती नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने याचिका निराकृत करने का आदेश देते हुए लिखा कि याचिकाकर्ता चाहे तो अपना अभ्यावेदन कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं।
प्रकरण के अनुसार याचिकाकर्ता राजीव गांधी शिक्षा मिशन में वैकल्पिक एवं नवाचारी शिक्षा केंद्रों के अनुदेशक एवं अनुदेशिका के रूप में जांजगीर-चांपा तथा जशपुर जिले में कार्यरत थे। वर्ष 2006 में जिला मिशन संचालक के द्वारा वैकल्पिक शिक्षा केंद्रों को यह कहते हुए बंद कर दिया गया कि समस्त बच्चों को मुख्य धारा में जोड़ने के लिए मिशन के प्राथमिक शाला एवं उच्च प्राथमिक शाला में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए तथा वार्षिक कार्य योजना में बजट की अनुपलब्धता के अभाव में भी जिले के समस्त शिक्षा केंद्रों को बंद किया जा रहा है।
याचिकाकर्ता ने 14 अगस्त 2006 को जारी कलेक्टर के उक्त आदेश को निरस्त करने, समस्त अनुदेशक एवं अनुदेशिका को मानदेय देने तथा उन्हें शिक्षाकर्मी के रूप में भर्ती की मांग की थी। याचिका के जवाब में शासन एवं राजीव गांधी शिक्षा मिशन ने हाईकोर्ट को बताया कि वैकल्पिक व नवाचारी शिक्षा योजना है।
सर्वशिक्षा अभियान प्रारंभिक शिक्षा के लोक व्यापीकरण के लिए लागू किया गया प्रथम देशव्यापी अभियान है। इसके अंतर्गत 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों को वर्ष 2010 तक कक्षा आठवीं तक की गुणवत्तायुक्त शिक्षा विद्यालय और समुदाय की भागीदारी से प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है।
शासन ने अपने जवाब में यह भी बताया कि याचिकाकर्ता को शिक्षा कर्मी के पद पर साक्षात्कार में उन्हें अनुभव के रूप में यदि वे 3 वर्ष कार्य करते हैं, तो उन्हें 10 अंक दिए जाएंगे। इसके अलावा इन आदिवासी जिलों में इन शिक्षा केंद्रों को बंद किया गया है, तो उनके स्थान पर नव ज्योति विद्यालय प्रारंभ किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से वकील पराग कोटेचा, मनोज सिन्हा एवं शिक्षा मिशन की ओर से आशुतोष सिंह कछवाहा ने पैरवी की।