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रह-रह कर होता रहा पथराव

इंदौर. क्या बंद को लेकर की गई नारेबाजी महज बहाना थी और हकीकत वही थी जो उदापुरा से लेकर मुकेरीपुरा होते हुए जिंसी तक उपद्रव के रूप में बरसी। चंद मिनटों में देखते ही देखते सड़कें पत्थरों से पट जाना, सैकड़ों लोगों का उपद्रवी बनकर सड़कों पर जुट जाना और दूसरे पक्ष के साथ पुलिस से भी मोर्चा लेना पुलिस-प्रशासन और उसके नए हाकिमों के लिए ही अप्रत्याशित हो सकता है।

इसे वे स्वीकार भी चुके हैं लेकिन लोग तो तैयार थे ही। क्या यह सब चुनावी वर्ष के चलते हुआ? यह सवाल सत्तारुढ़ दल की ओर ही अंगुली उठाता है क्योंकि उपद्रव की शुरुआत करने वाले उसका झंडा थामे थे और बचाव के लिए तैनात लोग उसके मातहत।

दोपहर बारह बजे मुकेरीपुरा में भारी पथराव के बाद पुलिस ने अश्रुगैस व गोली चलाकर उग्र भीड़ को खदेड़ा तो वह नारे लगाती उदापुरा में घुसी। इसके पहले कुछ लोगों ने सांठा बाजार में पाकीजा शोरूम पर धावा बोल दिया था। पुलिस पहुंचती तब तक उपद्रवी पथराव कर सारे कांच फोड़ चुके थे। कई दंगे झेल चुके उदापुरा में आज का नजारा देख दिल दहल गया।

गली के एक छोर पर लोधीपुरा व नृसिंह बाजार से आगे बढ़ी उग्र भीड़ थी तो दूसरी और बंबई बाजार के मुहाने पर और गली की दो ऊंची इमारतों पर मोर्चा संभाले उन्मादी। पौन घंटे तक आमने-सामने द्वंद चलता रहा जिसमें पुलिस मूकदर्शक से ज्यादा कुछ नहीं थी। पत्थर, ईंट, फर्शियों को टुकड़े, टयूबलाइट, पेट्रोल से लिपटे चिथड़े.. जो हाथ आया फेंका गया।

नारे लगाती भीड़ जैसे ही आगे बढ़ती सामने से बरसते पत्थर पीछे हटने पर मजबूर कर देते। आमने-सामने की दो छतों से आठ-दस साल के बच्चों से लेकर पचास-साठ साल के बुजुर्ग मजहबी नारे लगाते हुए पत्थर फेंक रहे थे। नीचे खड़े लोग उसी शैली में जवाब देने की कोशिश कर रहे थे लेकिन पत्थर ऊपर नहीं पहुंच पाते। वे अपशब्द कहते लौटते और नारे लगाने लगते।

पौन घंटे के इस उपद्रव में 25 मिनट तो पुलिस का अस्तित्व ही नहीं दिखा। सायरन बजाते पहुंची पुलिस की गाड़ियां भी पथराव के कारण पीछे हट गई। अश्रुगैस के गोले असर दिखाते उससे पहले ही लोगों ने नालियों में फेंक दिए। कई पुलिसवाले लोगों की गालियां सुनकर ही आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। रैपिड एक्शन फोर्स के जवान कहते रहे हमें आदेश मिलेगा तभी आगे बढ़ेंगे। उनके इस जवाब ने लोगों को और भड़का दिया।

इसी बीच अपर कलेक्टर रेणु पंत पहुंची और अपनी गाड़ी में लगे लाउड स्पीकर से भीड़ से हटने की अपील करने लगी। तभी उनकी गाड़ी पर ही पत्थर आ लगा। टीआई, पंढरीनाथ अपनी जीप से पहुंचे तो लोगों ने जमकर खरी-खोटी सुनाई। उन्हें मजबूरन लौटना पड़ा। एडीएम रमेश भंडारी, एडीशनल एसपी मनोजसिंह और सीएसपी प्रमोद सिन्हा कभी भीड़ को लोधीपुरा की ओर धकेलते, तो कभी बंबई बाजार वापस भेजते।

इमारतों पर खड़े लोग उन्हें देख नीचे छिप जाते। नाराज लोगों को समझाने में एकलव्यसिंह गौड़ और कैलाश शर्मा को भी पसीना आ गया। शांताबाई जव्हेरी अस्पताल के पीछे एक मकान की छत पर खड़े लोगों को पत्थर फेंकने से रोकने के सारे प्रयास विफल हो गए तो पुलिस को उनके घरों पर निशाना साधकर अश्रुगैस के गोले दागने पड़े।

इसी दौरान खेमराज माखीजा (निवासी सिंधी कॉलोनी गली नंबर-दो) के सिर में गोली लगी और उन्हें ठेले में मोहल्ले से बाहर लाए। फिर अस्पताल भेजा। उनकी बाद में मृत्यु हो गई। यहां पुलिस को अश्रुगैस के अलावा तीन बार हवा में गोलियां भी चलाना पड़ी।

हालात बेकाबू हो गए तो साढ़े बारह बजे कफ्यरू की घोषणा की गई। इसका भी आधे घंटे तक कोई असर नहीं दिखा। तब तक कई घायल अस्पताल पहुंच चुके थे। गली के कई घरों से महिलाओं-बच्चों को भी बाहर भेजा जा चुका था।





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