बीकानेर.
अमरनाथ श्राइन बोर्ड को आबंटित जमीन वापस लेने के विरोध में विश्व हिंदू परिषद की ओर से गुरुवार को भारत बंद के आह्वान पर बीकानेर में भी बंद रहा। डेयरी व दवाओं की दुकानों के अलावा सभी दुकानें बंद रहीं।
मंडी में पहुंची सब्जियों के ट्रक खाली नहीं हो सके। इसलिए लोगों को ताजी सब्जियां भी नसीब नहीं हुई। इस बंद के समर्थन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बजरंग दल, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय किसान संघ, भारतीय मजदूर संघ, भारतीय जनता पार्टी के नेता-कार्यकर्ताओं ने अधखुले शटर वाली दुकानों को बंद करवाया।
शिक्षण संस्थाओं को बंद करवाने के लिए भी जत्थे घूमते रहे। कई स्थानों पर जत्थों के जाने के बाद दुकानें खोल भी ली गई। गोगागेट क्षेत्र में इस तरह दुकान खोल लेने की वजह से तनाव की स्थिति पैदा हो गई लेकिन स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मामला बिगड़ने से बच गया।
जयपुर रोड स्थित केंद्रीय विद्यालय नंबर एक को बंद करवाने गए युवकों की वहां तैनात सदर थाना एसएचओ ओमप्रकाश किलानिया से झड़प हो गई जिससे मामला गर्मा गया। बाद में यहां पहुंचे भाजपा नेताओं ने एसएचओ को सस्पेंड करने की मांग की। संघ के कार्यकर्ताओं के साथ बदतमीजी करने के विरोध में भाजपा नेताओं ने एसपी के सामने एसएचओ को सस्पेंड करने की मांग रखी।
काफी देर तक इस मांग को लेकर गहमागहमी बनी रही। बंद की वजह से पूगल रोड सब्जी मंडी में पहुंची सब्जी भी स्थानीय बाजार के लिए उपलब्ध नहीं हो सकी। यहां सुबह ही भाजपा युवामोर्चा के कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर कामकाज बंद करवा दिया। कोटगेट, स्टेशन रोड, रानीबाजार, केईएम रोड, दाऊजीरोड की सारी दुकानें इस दौरान बंद रही। कांपलैक्सेस, मॉल और मार्केट भी बंद रखे गए। रेस्टोरेंट और होटलों के अंदर भोजन आदि की व्यवस्था होती रही लेकिन बाहर से इन्हें बंद ही रखा गया।
कॉलोनियों में बनी दुकानों में बंद का कोई खास असर देखने को नहीं मिला। मुक्ताप्रसाद, पवनपुरी, जयनारायण व्यास कॉलोनी, करणीनगर, गांधीनगर, समता नगर आदि क्षेत्रों में रोजमर्रा की तरह व्यापार-व्यवसाय चलता रहा। बंद करवाने वाले पहुंचे तो उनकी बात को मान लिया गया और ग्राहकों ने सामान देने के लिए कहा तो उन्हें भी खाली नहीं लौटाया गया। बैदों के बाजार में बंद का असर रहा। लोगों ने खाली पड़े बाजार को खेल का मैदान बनाया और दिनभर क्रिकेट खेला। मोहताचौक, भुजिया बाजार आदि क्षेत्रों में भी ऐसा ही माहौल रहा।
ये रहे सक्रिय
सोमदत्त श्रीमाली, सुभाष जोशी, अशोक परिहार, बाबूसिंह राजपुरोहित, नंदकिशोर सोलंकी, नंदलाल व्यास, द्वारकाप्रसाद तिवाड़ी, गोपाल गहलोत, शशि शर्मा, युधिष्ठिरसिंह भाटी, मोहन सुराना, दीपक पारीक, एडवोकेट सुरेश शर्मा, विजय कोचर, विजय उपाध्याय,राजेश गहलोत, नंदन जोशी,आनंद जोशी, गायत्री प्रसाद शर्मा, भगवानसिंह मेड़तिया, सुरेंद्रसिंह शेखावत, अशोक भाटी, ओम रामावत, किसन चौधरी, अरविंद किशोर आचार्य, कुंती द्विवेदी, मीना आसोपा, मधुरिमासिंह, योगेश श्रीमाली, दुर्गासिंह।