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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर. ट्रांसफार्मर लगाने वाली कंपनी को 14 करोड़ 10 लाख रुपए का भुगतान किए जाने के मामले की उच्च स्तर पर जांच शुरू हो गई है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने दो वर्ष बाद सिटी सर्कल में लगाए गए 769 ट्रांसफार्मरों में से 70 को आखिर फेल घोषित कर ही दिया। हालांकि फेल ट्रांसफार्मरों की संख्या ढाई सौ है। बिजली कंपनी की यह नींद दैनिक भास्कर में 20 जून को इस आशय की खबर छपने के बाद टूटी।
बिजली कंपनी सूत्रों के अनुसार, सन् 2005-06 में एलटी लेस योजना के तहत 769 वितरण ट्रांसफार्मर सिटी सर्कल में लगाए जाने का काम मुंबई की एक कंपनी को मिला था। उस कंपनी ने स्वयं काम न करके स्थानीय ठेकेदारों से काम कराया। विनयनगर जोन के लधेड़ी विद्युत उपकेन्द्र के अंतर्गत नई लाइन डालने, ट्रांसफार्मर लगाने आदि का काम हुआ था।
घटिया स्तर का काम होने से गारंटी पीरियड में लधेड़ी उपकेन्द्र के अंतर्गत सौ और सिटी सर्कल में स्थापित डेढ़ सौ यानी ढाई सौ ट्रांसफार्मर फेल हो गए। बिजली कंपनी ने दो वर्ष में इन ट्रांसफार्मरों को फेल घोषित नहीं किया। ऐसा न करने से गारंटी पीरियड भी निकल गया। उन ट्रांसफार्मरों को ठीक भी नहीं कराया गया। इतना ही नहीं, इस योजना के तत्कालीन सीईओ (अधीक्षण यंत्री सिटी सर्कल) ने उस कंपनी को 14 लाख 10 हजार रुपए का भुगतान भी कर दिया था।
ऊर्जा मंत्री और सीएमडी ने दैनिक भास्कर में खबर छपने के बाद स्थानीय विद्युत अधिकारियों से इस मामले की जानकारी ली और कार्रवाई करने के निर्देश दिए। स्थानीय स्तर पर विनय नगर जोन के लधेड़ी उपकेन्द्र के 70 ट्रांसफार्मरों को फेल घोषित कर दिया। बताया गया कि संबंधित कंपनी को 14 लाख 10 हजार रुपए का भुगतान किए जाने के मामले की उच्च स्तर पर बिजली कंपनी ने जांच भी शुरू करा दी है।
>> लधेड़ी उपकेन्द्र में सर्वे कराया था, वहां अभी तक 70-80 ऐसे ट्रांसफार्मर मिले हैं, जो डेमेज हुए हैं। बाकी जगह सर्वे चल रहा है।
राजहंस सेठ अधीक्षण यंत्री शहर वृत्त मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ग्वालियर
सिटी सर्कल में ट्रांसफार्मरों की स्थिति
वर्ष स्थापित फेल प्रतिशत
2004-05 1522 254 16.69
2005-06 2077 231 11.12
2006-07 2729 215 7.88
2007-08 2886 180 6.24
चार अधिकारी संकट में
लधेड़ी विद्युत उपकेन्द्र विनयनगर जोन के अंतर्गत आता है, इसका पूर्व में चार्ज नगर संभाग उत्तर के अतिरिक्त अधीक्षण यंत्री एसके सचदेवा, उसके बाद अरुण शर्मा अब इसका चार्ज विनोद कटारे पर है। ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद उसे न तो ठीक कराया और न ही उसे फेल घोषित किया था। पूर्व अधीक्षण यंत्री पीके मिश्रा ने संबंधित कंपनी को 14 लाख 10 हजार रुपए का भुगतान किया था।