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छात्र हैं, शिक्षक नहीं

जोधपुर. teacher लगातार दसवीं के खराब नतीजों के बावजूद शिक्षा विभाग ने कोई सबक नहीं लिया है। नया शिक्षा सत्र शुरू होने के बावजूद भी जिले की प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है।

दसवीं के खराब नतीजों को देखते हुए शिक्षकों की कमी का खामियाजा लाखों विद्यार्थियों को इस साल फिर भुगतना पड़ेगा। जिले में प्राथमिक,उच्च प्राथमिक,माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों में 2024 शिक्षकों के पद रिक्त हैं।

जिले की 60 बालिका विद्यालयों को क्रमोन्नत किया गया है। माध्यमिक से उच्च माध्यमिक का दर्जा पाने वाली इन स्कूलों में प्रधानाध्यापकों के पद समाप्त कर प्राचार्य के पद सृजित किए गए हैं। जबकि यहां पहले से ही एक दर्जन प्राचार्यो के पद रिक्त हैं। ऐसे में इन स्कूलों का संचालन किस तरह होगा, इस पर कोई नीतिगत फैसला अब तक नहीं हो पाया है। शिक्षा विभाग की हालत यह है कि पहली कक्षा से सीनियर सेकंडरी की 4526 सरकारी स्कूलों में 6 लाख बच्चों के शिक्षण की चिंता ही नहीं है। जिले की इन स्कूलों में 2024 विभिन्न श्रेणी के शिक्षकों के पदों पर अब तक नियुक्ति नहीं कर सका है।

छात्र-शिक्षक अनुपात गड़बड़ाया : शिक्षा विभाग के नियमों के मुताबिक 40 छात्रों पर एक अध्यापक की नियुक्ति जरूरी है। जोधपुर जिले की सरकारी स्कूलों में 6 लाख छात्र हैं।इनके लिए करीब 15000 शिक्षकों की जरूरत है। जबकि यहां मात्र 12 हजार 915 पद शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं। उसमें से भी 2024 पद रिक्त हैं।विभाग में करीब 700 पद द्वितीय श्रेणी अध्यापकों के ही रिक्त हैं। लिपिकों के पद रिक्त होने से कई शिक्षकों को प्रतिनियुक्ति पर कार्यालय में लिपिक बनाया गया है। इस व्यवस्था ने शिक्षकों की कमी में और इजाफा किया है। प्रधानाध्यापक से तृतीय श्रेणी के शिक्षकों के पद रिक्त हैं।

कागजी कार्रवाई : पिछले कई सालों से नया शिक्षा सत्र के शुरू होने से पहले शिक्षा निदेशालय शिक्षकों व अन्य रिक्त पदों की सूची जिलों से मंगवा रहा है।रिक्त पदों की लंबी फेहरिस्त लेने के इन्हें फाइलों में बंद कर दिया जाता है। यहां तक कि शिक्षा अधिकारियों के पद पर बिना पदोन्नति के उसी वेतन पर प्राचार्यो को लगाकर काम चलाया जा रहा है।

क्या हो रहा है असर : हर शिक्षा सत्र में विषय विशेषज्ञों के अभाव में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों के छात्रों को अपने स्तर पर या ट्यूशन के जरिए पढ़ाई पूरी करनी पड़ रही है। स्कूलों में कई विषयों के कालांश ही नहीं लगते। वहीं प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में एक ही शिक्षक को कई विषय पढ़ाने पड़ते हैं।

शिक्षा अधिकारियों के पद भी रिक्त : माध्यमिक शिक्षा में लम्बे समय से जिला शिक्षा अधिकारी का पद रिक्त है। इस पद पर जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक को अतिरिक्त पदभार सौंपा गया है। इस कारण न तो प्रारंभिक और ना ही माध्यमिक शिक्षा का ही कार्य पूरा हो पाता है। ऐसी ही हालत उपनिदेशक कार्यालय की है जहां पर माध्यमिक शिक्षा के उप निदेशक का पदभार संभाल रहे अधिकारी को ही प्रारंभिक शिक्षा का काम करना पड़ रहा है।

रिक्त पदों की सूचना निदेशालय ने मांगी थी वो भिजवा दी गई है। शिक्षण कार्य बाधित नहीं हो इस तरह से ही कार्य का संचालन तय होगा। अभी सत्र शुरू हुआ है।तृतीय श्रेणी के कुछ पद तो भरे गए हैं। जिस स्कूल में कठिनाई आएगी,उस हिसाब से शिक्षण व्यवस्था कर दी जाएगी।
—एच.एल.मीणा, उप निदेशक, शिक्षा विभाग।





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