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कायदों में उलझी तनख्वाह

कोटा. राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय में 80 शक्षणिक और 240 अशक्षणिक स्टाफ को जून माह का वेतन नहीं मिलने से गुरुवार को शिक्षकों और कर्मचारियों ने गहरा आक्रोश जताया। उनका कहना है कि मुश्किल परिस्थितियों में अतिरिक्त कार्य करने के बावजूद वित्त विभाग द्वारा वेतन रोके जाने से वे बेहद परेशान हैं।

उधर, वित्त विभाग के सूत्रों का कहना है कि जून के वेतन बिल में पदोन्नत शिक्षकों का फिक्सेशन लाभ जोड़ दिए जाने से भुगतान रोका गया है, संशोधित बिल मिलते ही भुगतान कर दिया जाएगा। इस बीच गुरुवार को कुलपति ने वित्त अधिकारी को पत्र लिखकर विवि के हित में वेतन विवाद को अनावश्यक तूल नहीं देने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि शिक्षक विवि की रीढ़ है, जिन्हें वेतन नहीं मिलने से शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो सकता है।

विवाद के बिंदु
>> कॅरिअर एडवांस योजना का लाभ ब्रांच वार दिया जाए या किसी भी ब्रांच में जो भी पात्र हों, उन्हें यह लाभ दिया जाए।
>> इस स्कीम में प्रोफेसर के रिक्त पदों पर ही लाभ देने की स्वीकृति दी गई है, यदि पात्र व्यक्ति सीमा से ज्यादा हैं तो क्या विवि अपने संसाधनों से यह लाभ दे सकता है?

राज्य सरकार का जवाब
तकनीकी शिक्षा विभाग के विशेषाधिकारी आरके गुप्ता ने 19 अप्रैल, 08 को विवि के कुलसचिव को पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि विभाग ने 13 अप्रैल, 07 को रीडर से प्रोफेसर के पद पर पदोन्नति लाभ तत्काल प्रभाव से देने और प्रोफेसर के रिक्त पदों की सीमा तक लाभ देने की स्वीकृति दी थी।

जिस पर चयन समिति के पदोन्नति संबंधी निर्णय पर बॉम में विचार किया गया। इसमें सरकार के वित्तीय सलाहकार केएल शर्मा ने दो बिंदुओं पर असहमति जताई थी। पत्र में विशेषाधिकारी ने राजस्थान हाईकोर्ट में दायर याचिका का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि रिक्त पदों की सीमा से अतिरिक्त पदोन्नति दी जाती है तो इसका अतिरिक्त व्यव विवि ही वहन करेगा। राज्य सरकार इसमें अनुदान नहीं देगी।

कॅरिअर एडवांस स्कीम के नियम
राजस्थान विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा के लिए सीएएस 19 मई, 2001 को लागू की गई, जिसमें प्रावधान है कि योग्य अभ्यर्थियों को पात्रता तिथि से ही उच्च वेतनश्रंखला का लाभ दिया जाना चाहिए।

वेतन बिल से विवाद पैदा हुआ। इसमें सुधार करके संशोधित वेतन बिल वित्त विभाग को भेज दें जिससे समय पर सभी को भुगतान हो सके।
—सूरजभान जैमन, कुलसचिव

निदेशक ने आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया है, रिकॉर्ड का परीक्षण करने में समय लग सकता है, इसलिए पूर्व माह की तरह संशोधित वेतन बिल भेजने पर भुगतान कर दिया जाएगा।
—डॉ.देवराज, वित्त अधिकारी

आमने सामने

वित्त विभाग
>> कुलसचिव के आदेश के आधार पर 24 जनवरी, 08 के फिक्सेशन आदेश 4 माह बाद क्यों जारी किए गए।
>> प्रबंध मंडल की बैठक के मिनिट्स आपत्ति के बाद अभी तक स्वीकृत नहीं हुए हैं।
>> कुलसचिव के फिक्सेशन आदेश को निदेशक ने निरस्त कर दिया।
>> निदेशक ने इस संबंध में कोई कानूनी सलाह नहीं ली।
>> कुलसचिव के अनुसार फिक्सेशन आदेश अनियमित व अल्ट्रावायरस हैं।

कॉलेज
>> बॉम की बैठक में दो बिंदुओं पर आपत्ति के बाद मामला तकनीकी शिक्षा विभाग को भेजा गया था।
>> बैठक के मिनिट्स पर 15 दिन में आपत्ति ली जाती है, इसके बाद इसे स्वीकृत मान लिया जाता है, अगली बैठक में इसका अनुमोदन होता है।
>> पदोन्नति और फिक्सेशन से संबंधित सभी रिकार्ड विवि की स्थापना शाखा में उपलब्ध हैं।
>> निदेशक को नॉन प्लान के कर्मचारियों के वेतन सहित फिक्सेशन के आदेश निकालने का अधिकार है।





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