जयपुर/उदयपुर. राज्य सरकार ने उदयपुर की दक्षिणी विस्तार योजना के निकट तीन गांवों में 23.0750 हैक्टेयर (लगभग 92 बीघा) बेशकीमती जमीन अवाप्त करने की तैयारी कर ली है। यह जमीन आईटी प्रोजेक्ट के नाम पर अवाप्त की जा रही है।
बताया जा रहा है कि यह वन राज्यमंत्री प्रतापसिंह सिंघवी के रिश्तेदारों ने खरीद रखी है। इस जमीन की अवाप्ति को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और स्वायत्त शासन राज्यमंत्री सुरेन्द्र गोयल से हरी झंडी मिल चुकी है। अब विभागीय स्तर पर धारा चार के तहत अवाप्ति का नोटिस जारी किया जाना है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी मुख्यमंत्री के निर्देश पर सिंघवी की अलवर जिले में भिवाड़ी के पास कुछ जमीन अवाप्त की गई थी।
यहां हैं जमीने : नैला गांव में 15.050 हैक्टेयर, सबीना गांव में 0.9900 हैक्टेयर और तीतरड़ी गांव में 7.700 हैक्टेयर । इस तरह कुल 23.0750 हैक्टेयर जमीन अवाप्त की जाएगी। यहां जमीन का भाव 14 से 15 लाख रुपए बीघा बताया रहा है। यह क्षेत्र अरावली हिल्स से सटा हुआ है।
कोटा की जमीन भी ली जाएगी : सरकार ने कोटा की कुछ जमीनों से संबंधित फाइलें भी मंगवाई हैं। इसमें जयपुर-कोटा रोड पर 68 बीघा जमीन भी शामिल है। इस जमीन को अवाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्दी ही इसकी अवाप्ति के आदेश भी जारी होने की संभावना है।
सिंघवी क्यों हैं निशाने पर : कुछ बड़े प्रोजेक्टों को हरी झंडी देने के कारण सिंघवी पिछले साल ही मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कोपभाजन बने हुए हैं। नाराजगी के कारण मुख्यमंत्री ने उनसे स्वायत्त शासन एवं नगरीय विकास विभाग तो लिया ही, उनकी बेनामी संपत्ति बताकर उनके रिश्तेदारों और करीबी लोगों की जमीनें भी अवाप्त करवानी शुरू कर दीं।
अजयपाल भी हैं निशाने पर : मानसरोवर में लिबर्टी प्रोजोन को जमीन देने के प्रस्ताव को मंजूर नहीं करने और प्रताप नगर में आईसीआईसीआई बैंक जमीन विवाद को लेकर हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष सरदार अजयपालसिंह भी मुख्यमंत्री के निशाने पर हैं। अजमेर रोड पर उनके माय हवेली प्रोजेक्ट की जमीन अवाप्ति में ली जा चुकी है। टोंक रोड पर बन रहे माइल्स स्टोन द्वितीय का काम भी रुकवा दिया गया था। बाद में अजयपालसिंह ने अदालती की शरण लेकर काम शुरू किया।
जनहित में सरकार ले रही है तो ले : अवाप्त हो रही जमीनों से मेरा दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। इस तरह की जमीनों से मुझे जोड़कर कुछ लोग बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। जनहित के लिए जमीनें अवाप्त करना सरकार का काम है। सार्वजनिक जरूरत के लिए यदि जमीन की जरूरत है तो सरकार को लेनी ही चाहिए। अगर मेरे किसी रिश्तेदार के पास कोई संपत्ति है तो यह कैसे माना जा सकता है कि उससे मेरा कोई संबंध है।
-प्रतापसिंह सिंघवी, वन राज्यमंत्री
जमीन अवाप्ति का रूटीन काम है : उदयपुर और कोटा में जो जमीनें अवाप्त की जानी है, वे सब रुटीन की फाइलें हैं। मैंने देखा नहीं है कि वे जमीनें किसके नाम हैं अथवा किसकी हैं। मुझे जहां तक ध्यान है, उनमें प्रतापसिंह सिंघवी की कोई जमीन नहीं है। जरूरत के हिसाब से जमीनें लेते रहते हैं।
-सुरेन्द्र गोयल, स्वायत्त शासन राज्यमंत्री