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घबराए पीएमटी टॉपर्स प्राइवेट की चौखट पर

चंडीगढ़.pmt पंजाब के तीन सरकारी मेडिकल कॉलेजों- अमृतसर, पटियाला और फरीदकोट-की मान्यता पर लटक रही मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की तलवार से प्री मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट (पीएमईटी) के टॉपर भी परेशान हैं।

नियमानुसार पीएमईटी टॉपर्स को सरकारी कॉलेजों में दाखिला मिलना तय है लेकिन इनकी मान्यता खतरे में होने के कारण टॉपर्स प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों से संपर्क साधने में जुट गए हैं।

टॉपर्स की नजर प्राइवेट कॉलेजों में सरकारी मैनेजमेंट कोटे की सीटों पर टिकी है और वह कई गुना ज्यादा फीस चुकाकर एमबीबीएस करने को तैयार हैं। कई स्टूडेंट और उनके अभिभावक प्राइवेट कॉलेजों की मैनेजमेंट कोटे की सीटों के लिए फार्म भर रहे हैं।

सरकारी कॉलेजों में जहां टॉपर्स को केवल 13 हजार रुपए सालाना फीस देनी होगी वहीं निजी कॉलेजों में सरकारी मैनेजमेंट कोटे की फीस 1.15 लाख रुपए सालाना है। प्रॉस्पेक्ट्स और प्रोसेसिंग फीस इससे अलग है।

गुरु रामदास कॉलेज में प्रॉस्पेक्ट्स 1500 रुपए और प्रोसेसिंग फीस 3500 रुपए है। ज्ञान सागर कॉलेज का प्रॉस्पेक्ट्स 1500 रुपए और प्रोसेसिंग फीस 2500 रुपए है। आदेश मेडिकल कॉलेज और डीएमसी कुल एक हजार रुपए ले रहे हैं। कई छात्र तो सभी कॉलेजों में आवेदन कर रहे हैं।

सरकार को नहीं सूझ रहा जवाब : तीनों कॉलेजों को लेकर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) द्वारा उठाए गए सवालों का सरकार को कोई जवाब नहीं सूझ रहा।

वीरवार को दिनभर मेडिकल एजूकेशन सचिव जगजीत पुरी के ऑफिस में मीटिंगों का दौर चलता रहा लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया। दो दिन पहले पुरी दिल्ली में एमसीआई के पदाधिकारियों से मिलकर भी आए थे। एमसीआई ने अपनी रिपोर्ट में इन कॉलेजों में फैकल्टी, मरीजों और इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी जैसे मुद्दे उठाते हुए सरकार को इनके हल के लिए एक महीने का समय दिया है। यदि एक माह से सबकुछ ठीक नहीं हुआ तो एमसीआई तीनों कॉलेजों की मान्यता रद्द कर देगी।

एमसीआई के ऐतराज

>> तीनों मेडिकल कॉलेजों में 30 से 35 फीसदी स्टाफ कम है। राज्य सरकार ने मेडिकल टीचिंग स्टाफ की रिटायरमेंट ऐज 60 साल करके और गैस्ट फैकल्टी रखकर इसे कुछ हद तक पूरा करने की कोशिश की है। निजी कॉलेजों में अधिक वेतन मिलने के कारण टीचर सरकारी कॉलेजों में नहीं आना चाहते।

>> तीन माह पहले अपने दौरे में एमसीआई ने पाया था कि कॉलेज ‘प्रति सीट 6 मरीज’ की शर्त पूरी नहीं करते। पटियाला में 60 फीसदी, अमृतसर में 56 फीसदी मरीज थे।

>> सीटी स्कैन, रेडियोग्राफी, मरीजों का रिकॉर्ड रखने की सुविधाएं भी नहीं है।





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