भोपाल/इंदौर.
इंदौर में गुरुवार को भारत बंद से शुरू हुई हिंसा शुक्रवार को भी जारी रही। दूसरे दिन करीब आधा दर्जन स्थानों पर जमकर पथराव, तोड़फोड़ एवं गोलीबारी हुई। जूना रिसाला में दो लोगों की मौत हो गई। इसे मिलाकर दो दिन में उपद्रव से मरने वालों की संख्या छह हो गई है। ज्यादातर स्थानों पर पुलिस-प्रशासन ही उपद्रवियों के निशाने पर रहा। उज्जैन-सतना भी तनावग्रस्त रहा।
उधर राजधानी समेत प्रदेश के अन्य हिस्सों में कड़ी सुरक्षा के बीच जन जीवन सामान्य रहा। उज्जैन के महाकाल रोड ओर बेगमबाग इलाके में दो गुटों के बीच पथराव के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। सतना में भी माहौल तनावपूर्ण रहा। बंद के विरोध में यहां के सराफा व्यवसायी हीरालाल सोनी से आत्मदाह कर लिया था। उनके परिजनों ने आरोपियों के खिलाफ नामजद एफआईआर की मांग को लेकर अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया।
उन्होंने एक लाख रु. की सरकारी सहायता लेने से भी इंकार कर दिया। भोपाल में शुक्रवार को उपद्रवग्रस्त इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। यहां स्थिति सामान्य रही। केवल न्यू लोहा मंडी में दो पक्षों के बीच आमने-सामने पथराव हुआ।
स्थिति बिगड़ते देख दोपहर बाद प्रशासन ने पहले रावजी बाजार एवं छोटी ग्वालटोली थाना क्षेत्र में कफ्यरू लगाया और बाद में पूरे शहर में लगा दिया गया। कर्फ्यू की घोषणा के बाद शहर में अफरा-तफरी मच गई। जरूरी सामान के इंतजाम और घर जल्दी पहुंचने की होड़ के चलते सड़कों पर बार-बार जाम लगे। उधर, गुरुवार को जिन क्षेत्रों में कफ्यरू लगा था, वे अपेक्षाकृत शांत रहे। शुक्रवार को उपद्रव की शुरुआत सुबह 9.30 बजे आजादनगर से हुई। यहां दो-ढाई हजार लोग सड़कों पर उतर आए और पथराव करने लगे। दरअसल गुरुवार की घटना के मद्देनजर एक समुदाय ने अघोषित तौर पर बंद की घोषणा की थी। सुबह से ही समुदाय के व्यापारियों की दुकानें बंद थी। ये लोग भी इसी के मद्देनजर बाहर निकले थे। अचानक इन लोगों ने दो घरों पर पथराव कर दिया। पुलिस ने लाठियां भांजकर उन्हें खदेड़ा। इसके बाद तो जैसे सिलसिला चल निकला।
खजराना में दोपहर 1 बजे के लगभग गुरुवार को हुए उपद्रव में मृत युवकों में से तीसरे के जनाने के समय गोलियां चलीं और जमकर पथराव हुआ। इससे आरपीएफ के तीन जवान घायल हो गए। दंगाइयों ने सीधे पुलिस को ही निशाना बनाया। जवाब में पुलिस ने भी हवाई फायर किए। काफी जद्दोजहद के बाद यहां स्थिति काबू में आई, तो उधर, 1.45 बजे एक स्कूटर में आगजनी की घटना पूरा जिंसी क्षेत्र झुलस गया। तीन तरफ से लोगों की भीड़ पुलिस की ओर बढ़ने लगी। देखते ही देखते आसपास के पूरे हिस्से में हिंसा भड़क उठी। एक धर्म स्थल की आड़ लेकर जबरदस्त पथराव किया गया। पेट्रोल बम फेंके और गोलियां भी चलाईं। आधा दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए। जवाब में पुलिस ने भी हवाई फायर किए। यहां तक कि एडिशनल एसपी मनोजसिंह ने सिपाही की बंदूक लेकर गोलियां दागी। हिंसा चौथी पल्टन पुलिस लाइन तक फैल गई। यहां भी जमकर पथराव व तोड़फोड़ हुई। गोलियां भी चली। इससे दो लोगों की मौत हो गई।
दूसरी ओर ढाई बजे रानीपुरा में भी हिंसा भड़क उठी। नमाज से लौट रहे लोगों ने नारेबाजी और पथराव शुरू कर दिया। गाड़ियों में तोड़फोड़ की और गली नंबर चार में एक बाइक में आग भी लगा दी गई। लुनियापुरा सहित आसपास के क्षेत्रों में भी उपद्रव शुरू हो गया। दंगाइयों ने जमकर गोलियां चलाई। पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और हवाई फायर कर बड़ी मुश्किल से स्थिति पर काबू पाया। लगभग इसी समय न्यू लोहा मंडी में उपद्रव शुरू हुआ। एक पक्ष द्वारा पथराव के बाद दोनों ओर से आमने-सामने पत्थर, फर्शियां और पेट्रोल बम चले।
मौके पर तैनात मुट्ठीभर पुलिसकर्मी असहाय खड़े नजर आए। दंगाई छतों पर चढ़ गए और वहां से पत्थर सन्नाने लगे। आंसू गैस के गोले और हवाई फायर का भी उन पर कोई असर नहीं हुआ। स्थिति बिगड़ती देख 3 बजे प्रशासन ने रावजी बाजार और छोटी ग्वालटोली थाना क्षेत्र में कफ्यरू की घोषणा की, लेकिन जब स्थिति काबू में आती नजर नहीं आई तो पूरे शहर में कर्फ्यू लगा दिया। इसके बाद अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्कूल, कॉलेजों में पहले से ही छुट्टी थी लेकिन दफ्तरों, कोर्ट व कफ्यरू रहित क्षेत्रों में खुली चुनिंदा दुकानों से घर पहुंचने के लिए लोगों में होड़ मच गई। इस बीच विजयनगर में एक मेडिकल स्टोर्स पर भी तोड़फोड़ हुई।
दूसरी ओर खजराना को छोड़कर जिन क्षेत्रों में गुरुवार को कफ्यरू लगाया गया था, वहां की स्थिति शांत रही। जूमे की नमाज भी शांतिपूर्वक संपन्न हुई। इन क्षेत्रों में कफ्यरू को लेकर भी पुलिस ने ज्यादा सख्ती नहीं दिखाई। लोग घरों के बाहर बैठ कर समय बीताते रहे।
खासी जद्दोजहद के बाद एक किमी क्षेत्र में निकली यात्रा
छत्रीबाग स्थित व्यंकटेश मंदिर से शुक्रवार को भगवान की रथयात्रा निकलने वाली थी। यात्रा मार्ग कफ्यरू प्रभावित हिस्सों से होकर जाता है। इसे लेकर गुरुवार शाम से ही जद्दोजहद चल रही थी। प्रशासन ने यात्रा की अनुमति निरस्त कर दी थी। बावजूद इसके परंपरा की वजह से आयोजक यात्रा निकालने पर अड़े हुए थे। बड़ी मुश्किल से बात सांकेतिक यात्रा निकालने पर तय हुई। शाम को सगीनों के साए में एक किमी के क्षेत्र में यात्रा निकाली गई। 40 मिनट में भगवान आसपास का भ्रमण कर मंदिर लौट आए।
दो दर्जन मुकदमे दर्ज
हिंसक वारदातों को लेकर अब तक पूरे प्रदेश में 24 मुकदमे अज्ञात आरोपियों के खिलाफ दर्ज किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक इंदौर में पांच, जबलपुर में पांच, झाबुआ में तीन, मंदसौर, विदिशा, उज्जैन, हरदा और भोपाल में दो दो मुकदमे दर्ज किए गए हैं। सतना, छतरपुर, नीमच, और बालाघाट में एक एक मुकदमा दर्ज किया गया है।