News
International International एजेंसी.भारत से प्रतिभा पलायन अब गुजरे जमाने की बात हो गई है। भारतीय अर्थव्यवस्था में आ रही तेजी के कारण पैदा हुए रोजगार के बेहतर अवसर ब्रिटेन के प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों से निकले प्रोफेशनल्स और ग्रेजुएट्स को अपनी ओर आकषिर्त कर रहे हैं। येलोग भी अपना कैरिअर चमकाने के लिए भारत आने को आतुर हैं। दोनों देशों के बीच अच्छे व्यापारिक रिश्ते भी इसकी मुख्य वजह है।
ब्रिटेन में छंटनी
इसके विपरीत ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में आई मंदी के कारण यहां हजारों लोग अपनी नौकरी गंवाने की आशंकाओं से जूझ रहे हैं। इसके अलावा हाल ही के महीनों में यहां जीवन-यापन के खर्च में हुई बढ़ोतरी के कारण भी पेशेवर भारत आने को इच्छुक हैं।
बाहरी देश में नौकरी पाने वालों में ब्रिटिश नागरिकों और वहां बसे एशियाई लोगों के अलावा ऑस्ट्रेलिया, पोलैंड और नाइजीरिया जैसे देशों के उच्च कुशलता वाले पेशेवर भी ब्रिटेन छोड़ रहे हैं।
मुंबई में लगेगा भरती मेला
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से हाल ही में एमबीए करके निकले छात्रों को कहना है कि ऑक्सफोर्ड सैड बिजनेस स्कूल ने 30 और 31 जुलाई को मुंबई में भरती मेला आयोजित करने की पहल की है। उन्हें अच्छी कंपनियों से सकारात्मक जवाब भी मिले हैं।
रोजगार की अपार संभावनाएं
इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी रिसर्च का कहना है कि प्रवासी भारतीयों के लिए अपने देश में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। भारत में निजी अस्पताल प्राय: ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) में काम करने वाले डॉक्टरों को अपने यहां भरती करते हैं। इनमें वे डॉक्टर भी शामिल हैं जो कुछ समय पहले ब्रिटेन गए थे और अब बेहतर कार्य स्थितियों के लिए वापस घर लौटना चाहते हैं।
कॉल सेंटर्स में दो लाख भर्तियां
हाल ही में किए गए एक सर्वे ने खुलासा किया है कि 2009 तक ब्रिटिश ग्रेजुएट्स भारतीय कॉल सेंटर्स में दो लाख पदों को भरने की तैयारी कर चुके हैं। कई भारतीय और ब्रिटिश कॉल सेंटर एशियाई लोगों की बहुलता वाले क्षेत्रों से ब्रिटिश ग्रेजुएट्स की भर्तियां करते हैं। भारत के कॉल सेंटरों में काम करते वक्त ब्रिटेन के लोगों से बात करने के दौरान इन लोगों का उच्चरण काफी मददगार होता है।
नौकरी छोड़ना बनी खबर
भारतीय कॉल सेंटर में काम करने के लिए स्कॉटलैंड के एक स्नातक द्वारा 21 हजार पाउंड के वार्षिक पैकेज वाली स्काई टेलीविजन की नौकरी छोड़ना चर्चा का विषय बन गया है।
‘हमारे छात्रों को जानने के लिए भारत की कंपनियों के पास यह बड़ा मौका है और छात्रों को भी उनमें रुचि दिखाने वाले संस्थानों से सीखने का अवसर प्राप्त हुआ है।’
शिमोन टनकार्ड (आक्सफोर्ड सैड बिजनेस स्कूल के कैरियर हेड )