बावल रेवाड़ी.सरकार के तमाम दावों के बावजूद प्रदेश में अभी भी कुछ ऐसे गांव हैं जहां शिक्षा का प्रकाश नहीं पहुंचा है। ऐसा ही एक गांव है रेवाड़ी जिले का बिशनपुरा। लगभग 1200 की आबादी वाले इस गांव में पिछले करीब 200 सालों में मात्र 4 लड़कों ने स्नातक और सिर्फ एक लड़की ने मैट्रिक पास किया है।
इतना ही नहीं, गांव के सिर्फ आठ युवक ही सरकारी नौकरी में हैं और वह सभी सेना में सिपाही। राजस्थान की सीमा से सटे गांव बिशनपुर में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अभी तक न तो सरकार ने कोई कदम उठाया और न ही कभी गांववालों ने ही इसकी मांग की। गांव में 25 साल पहले एक प्राइमरी स्कूल खोला था, जो आज तक अपग्रेड नहीं हुआ।
यही वजह है कि पांचवीं पास करने के बाद 95 प्रतिशत लड़कियां व 50 प्रतिशत लड़के खेतीबाड़ी व मजदूरी में जुट जाते हैं। कुछ विद्यार्थी आगे की पढ़ाई के लिए दो किलोमीटर दूर गांव गुर्जर माजरी के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जाते हैं लेकिन यहां से भी अभी तक केवल एक लड़की रेशम पुत्री रतनलाल ही दसवीं पास कर पाई है। इसी तरह 4 लड़के ही उच्चतर पढ़ाई के नाम पर स्नातक कर पाए हैं।
जरूरत महसूस नहीं हुई
सरपंच प्रकाश सिंह का कहना है कि गांव के बच्चों को आगे पढ़ाने की कभी जरूरत ही महसूस नहीं हुई। सरपंच ने कहा कि ग्रामीण पूरी तरह से खेती पर निर्भर हैं। गांव का लिंगानुपात एक हजार लड़कों पर 850 लड़कियां हैं।