नई दिल्ली.
यूएनपीए की एका का दावा करने वाली सपा ने अचानक तेजी दिखाते हुए सहयोगी दलों को विश्वास में लिए बिना शुक्रवार को एटमी डील को राष्ट्रहित में बताया। इस बीच, यूपीए का नेतृत्व कर रही कांग्रेस ने वाममोर्चा की ओर से जारी तीन दिन के अल्टीमेटम को नजरअंदाज करते हुए ‘समय पर मदद के लिए’ सपा को धन्यवाद कहा।
समाजवादी पार्टी ने करार के मसले पर यूपीए सरकार की राह आसान कर दी है। सपा के प्रमुख नेताओं- मुलायम सिंह यादव तथा अमर सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की। इस मुलाकात से उभर रहे नए गठजोड़ के बाद कांग्रेस लेफ्ट की धमकी से बेपरवाह है तो यूएनपीए का अस्तित्व ही खतरे में आ गया है। यूएनपीए के वरिष्ठ नेता ने सपा के अकेले निर्णय पर प्रतिक्रिया में कहा, ‘करार पर हमारा विरोध जारी रहेगा।’ तेलुगु देशम पार्टी के प्रवक्ता एमवीएम रेड्डी ने भरोसा जताया कि यूएनपीए बाकी पार्टियों के साथ बरकरार रहेगा।
सपा नेताओं के अनुसार, उन्होंने डील का समर्थन किया है लेकिन यूपीए सरकार को समर्थन की घोषणा यूएनपीए से चर्चा के बाद होगी। उन्होंने राजनीति के बजाय देशहित को अपनी प्राथमिकता बताया।
गुरुवार को यूएनपीए बैठक के बाद यादव व अमर सिंह पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से मिले थे। अब वे जिस प्रकार प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष को समर्थन का भरोसा देने पहुंचे उससे नए राजनैतिक समीकरणों की तस्वीर साफ हो गई है। समझा जाता है कि कांग्रेस और सपा में अब बातचीत केवल राजनैतिक लेनदेन पर चल रही है। सूत्रों के मुताबिक सपा सार्वजनिक रूप से भले ही सरकार में शामिल होने से इनकार कर रही हो,लेकिन वह केंद्र सरकार का हिस्सा बनने की पूरी तैयारी में है।
सपा के एकदम पलटने से खिन्न वामदलों ने सरकार से जानना चाहा कि परमाणु करार पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) में जाने संबंधी खबरों में कितनी सचाई है। मोर्चा की ओर से इस मसले पर समन्वय की भूमिका निभा रहे विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी को लिखे पत्र में कहा गया है कि सरकार 7 जुलाई तक वाममोर्चा को अपनी स्थिति से अवगत कराए।
मोर्चा की बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि सरकार इस पत्र का कोई जवाब देती है तो 8 जुलाई को बैठक कर अगला कदम तय किया जाएगा। वामदलों ने 14 जुलाई से अखिल भारतीय अभियान चलाकर लोगों को यह भी बताने का निश्चय किया कि वे करार का विरोध क्यों कर रहे हैं।
माकपा महासचिव प्रकाश ने एक साक्षात्कार में कहा, ‘यदि करार के मुद्दे पर संसद में विश्वास प्रस्ताव लाया जाता है तो हम सरकार के खिलाफ वोट डालेंगे। ऐसा तभी किया जाएगा जब सरकार औपचारिक रूप से करार पर आगे बढ़ने का फैसला सूचित करेगी।’
वामदलों की धमकी नजरअंदाज
कांग्रेस महासचिव अभिषेक सिंघवी ने वाममोर्चा की धमकी को नजरअंदाज करते हुए कहा,‘संप्रभु सरकारें या राजनीतिक पार्टियां डेडलाइन से बंधी नहीं होतीं।’ मीडिया विभाग के अध्यक्ष वीरप्पा मोइली ने कहा कि ऐसा करना एक जिम्मेदार राजनीतिक गठबंधन को शोभा नहीं देता। संसदीय मामलों के मंत्री वायलर रवि ने कहा, ‘जब हमें लोकसभा में बहुमत साबित करने को कहा जाएगा तो हम ऐसा करने तैयार हैं।’
प्रधानमंत्री से मिला अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल
गैरी एकरमैन नीत अमेरिकी संसद का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को प्रधानमंत्री से मिला। समझा जाता है कि उसने करार के बारे में कहा है कि समय निकला जा रहा है।
ऐसे तय होगा संकट से समाधान तक का सफर
जुलाई 7 : सरकार वाम मोर्चा को यह बताएगी कि वह परमाणु करार के अनुमोदन के लिए आईएईए के पास जाने का इरादा रखती है या नहीं।
जुलाई 9 : प्रधानमंत्री नाश्ते पर बुश से मुलाकात करेंगे। इस दौरान डील के क्रियान्वयन को अंतिम रूप देने के लिए समय सीमा तय की जा सकती है।
जुलाई 10 : इसके बाद वाम मोर्चा किसी भी समय समर्थन वापस ले सकता है। समर्थन वापसी की तारीख आईएईए के साथ प्रक्रिया शुरू करने की सरकार की घोषणा पर निर्भर होगी।
मध्य जुलाई :
सरकार आईएईए के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के समक्ष करार को रख सकती है, लेकिन इससे पहले राजनीतिक गणित पूरी की जाएगी।
जुलाई का अंत : अगर लेफ्ट समर्थन वापस लेता है तो मनमोहन सिंह सरकार समय से पूर्व ही विश्वास मत हासिल कर सकती है। इसके कुछ समय बाद समाजवादी पार्टी सरकार में शामिल हो जाएगी।
अगस्त : करार को एनएसजी के समक्ष रखा जाएगा। अमेरिका वैश्विक परमाणु व्यापार में भारत को छूट देने का प्रस्ताव रख सकता है।
सितंबर : भारत-बुश प्रशासन को उम्मीद है कि 123 समझौते पर अमेरिकी कांग्रेस की मुहर लगने से पहले आईएईए के सुरक्षा मानकों, एनएसजी की रियायत और राष्ट्रपति के अनुमोदन वाले काम पूरे हो जाएंगे।
अंतिम चरण : समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद करार लागू हो जाएगा। 123 समझौते पर अमेरिकी कांग्रेस की मुहर लगने के बाद यह किसी भी समय यह क्रियान्वित हो सकता है।