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खाकी पर खून : फर्जी मुठभेड़ में सुमेध सिंह सैनी पर केस दर्ज

चंडीगढ़.आतंकवाद के दौर में पंजाब में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पंजाब विजिलेंस विभाग के डायरेक्टर आईजी सुमेध सिंह सैनी के खिलाफ सीबीआई ने अपहरण, अवैध तरीके हिरासत में रखने, आपराधिक षड्यंत्र, अन्य मामलों में केस दर्ज किया है। सीबीआई ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में शुक्रवार को यह जानकारी दी।

सीबीआई ने 1991 में सैनी पर जानलेवा हमला करने वाले कुछ आरोपियों के फर्जी एनकाउंटर में मार दिए जाने के संबंध में जांच के बाद यह केस दर्ज किया है। सीबीआई ने हाईकोर्ट द्वारा 5 अक्टूबर 2007 को दिए आदेशों के बाद जांच की थी। सैनी पर हमले में आरोपी बलवंत सिंह मुल्तानी के पिता दर्शन सिंह, आरोपी दविंदर भुल्लर द्वारा दायर शपथ पत्रों के आधार पर हाईकोर्ट ने सीबीआई को जांच के लिए कहा था।

एनकाउंटर में मार डाला

दर्शन सिंह का आरोप था कि उसके बेटे को पुलिस ने ही फर्जी एनकाउंटर में मार गिराया है, वहीं दविंदर भुल्लर का कहना था कि उसके पिता को एनकाउंटर में मारा गया है। शुक्रवार को सीबीआई ने बलवंत सिंह मुल्तानी व बलवंत भुल्लर के टॉर्चर के संबंध में रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपी।

टॉर्चर के आरोप भी लगे

शुक्रवार को सीबीआई द्वारा पेश स्टेट्स रिपोर्ट में सैनी पर आरोप हैं कि उन्होंने उन पर हमला करने वालों को मातहत चंडीगढ़ पुलिस के कर्मचारियों से टॉर्चर करवाया। एसपी सीबीआई ने रिपोर्ट में लिखा है कि 11 दिसंबर 1991 को चंडीगढ़ पुलिस के डीएसपी बलदेव सैनी की अगुवाई में पुलिस पार्टी ने रेड मारकर बलवंत मुल्तानी को गिरफ्तार किया था। उसे 13 दिसंबर तक हिरासत में रखा गया और इसके तीन दिन बाद गिरफ्तारी दिखाई गई।

इसके बाद सुमेध सिंह सैनी की मौजूदगी में बलदेव सिंह और उसके सहकर्मियों ने उसे टार्चर किया और उससे दविंदर भुल्लर की जानकारी मांगी। इस दौरान मुल्तानी न तो चल सकता था और न ही बोल सकता था। 18 दिसंबर को एसआई जगीर सिंह की अगुवाई में उसे अन्य आरोपी नवनीत की गिरफ्तारी के लिए कादिंया थाने में ले जाया गया, जहां से उसे लापता बताया गया। पुलिस आरोपी दविंदर भुल्लर के पिता बलवंत भुल्लर को भी उठाकर लाई और सुमेध सैनी की मौजूदगी में ही टॉर्चर किया।

पुलिस बलवंत भुल्लर को इंवेस्टिगेशन के लिए 2 फरवरी 1992 को दयालपुर भाईके ले गई। इस दौरान बलवंत भुल्लर का चेहरा सूजा हुआ था। इसके बाद पुलिस उसे फिर चंडीगढ़ लाई और सैनी की मौजूदगी में उसका टार्चर किया गया, जिससे उसका मानसिक संतुलन खराब हो गया और वह चलने फिरने में नाकाम हो गया था। इसके बाद से बलवंत भुल्लर की जानकारी नहीं है। हालांकि सीबीआई ने कहा है कि सुमेध सैनी ने उनके एक गवाह को बाद में बताया था कि बलवंत की मौत प्राकृतिक थी। पूरे मामले की जांच सीबीआई के डीएसपी सतीश डागर कर रहे हैं।

कई धाराएं लगी: सैनी समेत चंडीगढ़ पुलिस के अन्य कर्मचारियों के खिलाफ आईपीसी सेक्शन 120बी, 364, 343, 330, 167 और 193 के तहत एफआईआर 2 जुलाई शाम तीन बजे दर्ज की गई थी।

एक मुकद्मा पहले से:

इससे पहले सुमेध सैनी पर लुधियाना के सैनी मोटर्स के दो भाईयों के अपहरण के मामले में सीबीआई ने मुकदमा दर्ज कर रखा है। इस मामले में तो दिल्ली स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में सैनी को चार्जशीट भी किया जा चुका है।

4 माह का वक्त मिला: एफआईआर की कॉपी देने के बाद सीबीआई ने मामले की जांच पूरी करने के लिए हाईकोर्ट से 6 माह का वक्त देने की मांग की। इस पर सैनी पर हमले के आरोपी देवेंद्र भुल्लर के वकील ने एतराज जताते हुए कहा कि 6 माह का वक्त ज्यादा है। इसके बाद जस्टिस महबात सिंह गिल ने सीबीआई को 4 माह देते हुए जांच पूरी कर रिपोर्ट देने को कहा है। सैनी पर हमले के एक अन्य आरोपी नवनीत सिंह के राजस्थान पुलिस द्वारा एनकाउंटर में मारे गिराने की बात भी हाईकोर्ट ने मान ली है।

किन-किन के खिलाफ केस

सुमेध सिंह सैनी-तत्कालीन एसएसपी चंडीगढ़ और वर्तमान पंजाब विजिलंेस डायरेक्टर।

बलदेव सिंह सैनी-तत्कालीन डीएसपी चंडीगढ़ और पंजाब पुलिस से रिटायर्ड एसपी।

हरसहाय शर्मा-तत्कालीन एसआई, वर्तमान में एसएचओ सेक्टर-3 थाना चंडीगढ़।

जगीर सिंह- तत्कालीन एसआई एवं वर्तमान एसएचओ इंडस्ट्रियल एरिया इसके अलावा चंडीगढ़ पुलिस और कादियां थाने के कुछ पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकद्मा दर्ज किया गया है।

क्या है मामला

29 अगस्त 1991 को चंडीगढ़ सेक्टर -17 में तत्कालीन यूटी एसएसपी सुमेध सिंह सैनी पर जानलेवा हमला हुआ। इस हमले में तीन पुलिसकर्मियों की जान गई और सैनी को मिलाकर 6 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। मामले में नवनीत, बलवंत मुल्तानी, मनमोहन मंजीत, प्रताप सिंह, गुरचरन और दविंदरपाल सिंह भुल्लर को आरोपी बनाया गया। इसके बाद जिला अदालत चंडीगढ़ ने इस मामले में दविंदरपाल भुल्लर और प्रताप सिंह, गुरचरन को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। जबकि बलवंत सिंह मुल्तानी और अन्य को भगौड़ा घोषित कर दिया गया। इन आरोपियों के बरी होने के खिलाफ ही चंडीगढ़ प्रशासन ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

इस अपील पर सुनवाई के दौरान भगौड़ा घोषित बलवंत सिंह मुल्तानी के पिता आईएएस अधिकारी दर्शन सिंह मुल्तानी ने हाईकोर्ट को बताया कि उसके बेटे को पुलिस गिरफ्तार करके ले गई थी और वह तभी से गायब है। उसने आशंका जताई थी कि उसके बेटे को पुलिस ने फर्जी एनकाउंटर में मार दिया है। आरोपी दविंद्र भुल्लर ने भी हाईकोर्ट में एफिडेविट दायर कर कहा था कि मेरे पिता बलवंत सिंह भुल्लर को भी पुलिस ने एनकाउंटर में मार दिया है।





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