एशिया कप टूर्नामेंट में सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर भारत के लिए काफी रन बटोर रहे हैं। गंभीर की बल्लेबाजी तकनीक में काफी निखार आया है। उनकी तकनीक को देखकर लगता है कि इस एशिया कप में वे भारत के बल्लेबाजी कोच हैं। पिछले कुछ महीने से बाएं हाथ के इस सलामी बल्लेबाज द्वारा लगातार रन बनाया जाना ताजी हवा के झोंके के समान है। दिल्ली के इस सलामी बल्लेबाज का स्पिन आक्रमण को खेलने में कोई सानी नहीं है। वे स्पिन आक्रमण को कुंद कर देने की अपनी क्षमता का पाकिस्तान में चल रही एशिया कप में बखूाबी उपयोग कर रहे हैं।
झुलसा देने वाले गर्मी के कारण कराची के नेशनल स्टेडियम की पिच काफी धीमी हो गई है। जिस वजह से इस पिच पर स्पिनर अपनी टीमों के लिए बेहद अहम साबित हो रहे हैं। ऐसे में भारत के सलामी बल्लेबाजी गंभीर ने अपने खेल से यह साबित कर दिया कि वे किसी भी तरह के स्पिन आक्रमण के सामने बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
गंभीर ने अपने छोटे से करिअर में यह दिखाया है कि उन्हें शेन वार्न और मुथैया मुरलीधरन जैसे दिग्गज स्पिनर्स की गेंदों पर भी आगे निकलकर हिट लगाने में कोई डर नहीं लगता। टीम में गंभीर की मुख्य भूमिका बल्लेबाजों को यह गाइड करने की है कि किस तरह स्पिनर की गेंद पर स्वीप शॉट नहीं खेलें। गंभीर के अनुसार जब स्पिनर की गेंद में गति कम हो, तो उस पर स्वीप शॉट खेलने से बचें, विशेष रूप से वैसी परिस्थिति में जब कि मैदान काफी बड़ा हो।
गंभीर की दूसरी सलाह है कि अगर स्वीप शॉट खेलना मजबूरी हो जाए उस सूरत में ‘स्लॉग स्वीप’ मारने की कोशिश करनी चाहिए। ‘स्लॉग स्वीप’ स्क्वायर लेग के सामने लगाई जाती है। गंभीर कहते हैं कि इस तरह की स्वीप मारते समय गेंद के हवा में उठ जाने से डरना नहीं चाहिए। गंभीर की इस बेशकीमती सलाह को युवराज सिंह ने स्पिनर्स के खिलाफ अपने प्रदर्शन को सुधारने के लिए आजमाने का फैसला किया है।
गौरतलब है कि युवराज की यह आदत है कि स्पिनर्स के खिलाफ वे अपने अधिकतर शॉट्स ऑन साइड में खेलते हैं। ऐसे में धीमे गेंदबाजों के खिलाफ पैरों के मूवमेंट को एडजस्ट करने और शॉट्स खेलने की तकनीक सीखाने में गंभीर युवराज के काफी काम आ सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया में हुई पिछली त्रिकोणीय सीरीज में 440 रन और बांग्लादेश में हुए किटप्लाई कप की तीन पारियों में गंभीर ने 209 रन बनाए।