जयपुर. राजस्थान हाई कोर्ट ने राजस्थान आवासन मंडल के आयुक्त अजयसिंह चित्तौड़ा के राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) से भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) पद पर पदोन्नति के प्रकरण में शुक्रवार को सरकार से पूछा कि उसने चित्तौड़ा की वरीयता में गिरावट क्यों की।
न्यायाधीश ज्ञानसुधा मिश्रा व चतराराम की खंडपीठ ने अजय सिंह चित्तौड़ा की अपील पर सुनवाई करते हुए सरकार को यह भी आदेश दिया कि 7 जुलाई 2008 तक आईएएस बोर्ड के गठन की कार्रवाई पर यथास्थिति रखें व आईएएस पद पदोन्नति संबंधी बैठक न करें।
चित्तौड़ा ने सरकार की ओर से आईएएस पद पर पदोन्नति के लिए जारी की गई 24 जून 2008 की उस सूची को चुनौती दी थी जिसमें कि उन्हें आईएएस पदोन्नति की वरीयता सूची में 95वें स्थान पर रखा था। चित्तौड़ा की ओर से अधिवक्ता जी.के.गर्ग ने कहा कि 1991-92 की वरीयता सूची में चित्तौड़ा का नाम 37वें स्थान पर था, किन्तु बाद में 1992-93 में उन्हें 37वें स्थान से गिराकर 95वें स्थान पर रख दिया गया।
इस पर खंडपीठ ने अतिरिक्त महाधिवक्ता भरत व्यास से पूछा कि किस कारण से प्रार्थी की वरीयता इतनी नीचे की गई। व्यास ने कहा कि उन्हें इसके जवाब के लिए समय दें। खंडपीठ ने व्यास को समय देते हुए उनसे 7 जुलाई को जवाब मांगा।
कितने बनेंगे आईएएस : आरएएस से आईएएस में प्रमोशन के लिए 53 पद हैं। इतने ही आईएएस बनाए जाने हैं।
कितने आरएएस दावेदार : आईएएस के 53 पदों के लिए 172 आरएएस अधिकारी दावेदार हैं। इनकी अंतिम वरीयता सूची केन्द्रीय लोकसेवा आयोग को भिजवाई जा सकी है।
इससे पहले कब बने थे आईएएस: आरएएस से आईएएस में पिछली बार प्रमोशन वर्ष 1995 में हुआ था। कितने सालों से उलझा है मामला: आरएएस से आईएएस में पदोन्नति का मामला करीब 13 सालों से उलझा हुआ है।
क्यों उलझा है मामला : आरएएस अधिकारियों की वरिष्ठता का मुद्दा तय नहीं हो पा रहा है। वरिष्ठता को लेकर आरएएस अधिकारी कई साल से मुकदमेबाजी में उलझे हुए हैं। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी जा चुका है।