जयपुर.
राज्यपाल एस.के. सिंह ने कोलायत के विधायक देवीसिंह भाटी को शुक्रवार को यहां राजभवन में आयोजित एक समारोह में कैबिनेट मंत्री के पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
भाटी सहित राज्य मंत्रिपरिषद में अब 30 मंत्री हो गए हैं। भाटी को आबकारी पर्यटन विभाग सौंपा गया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भरतपुर सांसद विश्वेंद्र सिंह को अपना राजनीतिक सलाहकार नियुक्त करने की घोषणा की। उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है।
भाटी को मंत्री और भरतपुर सांसद विश्वेन्द्रसिंह की राजनीतिक सलाहकार बनाने से कई मंत्री नाराज हैं। चिकित्सा मंत्री नरपतसिंह राजवी और सार्वजनिक निर्माण मंत्री राजेन्द्रसिंह राठौड़ ने भाटी को मंत्री बनाए जाने से नाराज होकर अघोषित रूप से शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार किया।
शपथ समारोह में गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, समाज कल्याण मंत्री मदन दिलावर सहित कई कैबिनेट मंत्रियों की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय रही। कटारिया शुक्रवार सवेरे ही उदयपुर चले गए। दिखावे के लिए सार्वजनिक निर्माण मंत्री राजेन्द्र राठौड़ गुरुवार दोपहर तक भाटी के साथ रहे, लेकिन उसके बाद चूरू चले गए।
भाटी को मंत्रिमंडल में शामिल करने से पहले हालांकि राजपूत समाज के नाम पर प्रताप फाउंडेशन के भगवानसिंह रोलसाहबसर को राजी किया गया था। इधर, भाजपा के संगठन महामंत्री प्रकाशचंद भी शपथ ग्रहण समारोह से दूर रहे।
इसलिए है नाराजगी : चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री नरपतसिंह राजवी का भाटी से बीकानेर में लक्ष्मी विलास को लेकर पुराना विवाद चल रहा है। यही कारण है कि राजवी ने भाटी के मंत्री बनाने के उपलक्ष्य में राजपूत समाज की ओर से आयोजित कार्यक्रमों में गुरुवार को दूरी बनाए रखी।
सार्वजनिक निर्माण मंत्री राजेन्द्रसिंह राठौड़ की नाराजगी का कारण यह है कि भाटी समय-समय पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का विरोध करते रहे हैं। सामाजिक न्याय मंच के कार्यकर्ताओं ने 8 दिसंबर 2003 की रैली को धक्का-मुक्की करके खराब करने की कोशिश की थी। मुख्यमंत्री की परिवर्तन यात्रा, नहरी क्षेत्र की यात्रा को भी विफल करने का प्रयास किया गया था। इसके बावजूद भाटी को मंत्री बनाकर राठौड़ का राजनीतिक कद कम करने की कोशिश की जा रही है।
गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया की नाराजगी का कारण उनके साथ भाटी समर्थकों द्वारा बीकानेर में की गई धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार है। कटारिया उस समय विपक्ष के नेता थे और तब बीकानेर में मलेरिया फैल गया था। जब वे वहां गए तो सामाजिक न्याय मंच के कार्यकर्ताओं ने भाटी के नेतृत्व में उनके साथ अभद्र व्यवहार किया।
उद्योग मंत्री डॉ.दिगंबरसिंह शुरू से ही भरतपुर की राजनीति को लेकर भरतपुर राजघराने का विरोध करते रहे हैं। भरतपुर सांसद विश्वेन्द्रसिंह और दिगंबरसिंह की कई बार तनातनी हो चुकी है।
..निंदक नियरे राखिए
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के विरोधी माने जाते रहे सांसद विश्वेन्द्रसिंह को उनका राजनीतिक सलाहकार नियुक्त किए जाने के बारे में पूछे जाने पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष ओम प्रकाश माथुर ने मुस्कुराकर ‘निंदक नियरे राखिए’ वाली कहावत उद्धृत करते हुए कहा कि राजनीति में यह जरूरी है।
द ग्रेट राजस्थानी पॉलिटिकल थिएटर
मंत्री अपने चौके में दूसरे के प्रवेश से नाराज हैं। लेकिन पद और राजनीतिक विवशता के चलते खुलकर बोल नही पा रहे हैं। भाटी के शपथ समारोह में न आने के ऐसे बहाने बनाए कि सब कुछ पॉलिटिकल ड्रामे की तरह लगा..
राजवी के रिश्तेदार को खून की उल्टियां
मैं शपथ ग्रहण समारोह में नहीं गया। मेरे एक रिश्तेदार को खून की उल्टियां हो रही थीं। एसएमएस अस्पताल में मेरा उनके साथ रहना जरूरी था।
-नरपतसिंह राजवी, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री
राठौड़ सहकारी चुनाव में व्यस्त
मेरे क्षेत्र में शुक्रवार को सहकारी संस्थाओं के चुनाव थे। चूरू होलसेल भंडार के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव होना था। अगर मैं वहां नहीं होता तो हमारे अध्यक्ष और उपाध्यक्ष नहीं बन पाते।
-राजेन्द्रसिंह राठौड़, सार्वजनिक निर्माण मंत्री
दिलावर को पता ही नहीं
मुझे पता ही नहीं था कि भाटी को मंत्री बनाया जा रहा है। आज सुबह बारां में इसका पता चला । उसके बाद समय इतना कम था कि मैं कोशिश करके भी उनके शपथ ग्रहण समारोह में नहीं पहुंच सकता था।
-मदन दिलावर,सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री
दिगंबर को पता नहीं विश्वेंद्र से क्या फायदा
विश्वेन्द्रसिंह की राजनीतिक सलाहकार के रूप में नियुक्ति से क्या फायदा होगा, यह तो पता नहीं, लेकिन मुख्यमंत्री ने उन्हें नियुक्त किया है तो सोच-समझकर ही किया होगा।
-डॉ. दिगंबरसिंह, उद्योग मंत्री