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बच्चों के दिल का इलाज मुफ्त

रायपुर. छत्तीसगढ़ में ‘बाल हृदय सुरक्षा योजना’ आज अस्तित्व में आ गई। अब दिल की बीमारी से पीड़ित बच्चे की जान कम से कम इलाज के अभाव में नहीं जाएगी। सुरक्षा योजना के तहत पांच से 15 वर्ष के बच्चों की न सिर्फ मुफ्त सर्जरी होगी बल्कि जरुरत पड़ने पर उनका वाल्व भी बदला जाएगा।

आंबेडकर अस्पताल सहित राज्य के किसी भी सरकारी अस्पताल में बच्चों के दिल की सर्जरी की सुविधा नहीं है। ऐसी दशा में राज्य को सौगात देने के लिए सरकार ने बीएसआर भिलाई से करार(एमओयू) किया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत इस योजना के लिए चार करोड़ की राशि उपलब्ध करायी गई है।

जानकारों ने बताया कि योजना के तहत किसी भी परिवार से संबंधित बच्चे का इलाज कराया जा सकेगा। गरीबी रेखा से नीचे आने की शर्त नहीं रखी गई है। पांच साल से 15 वर्ष तक की आयु के बच्चों का आपरेशन होगा।

जरुरत पड़ने पर पांच साल से कम आयु के बच्चे की भी सर्जरी की जा सकेगी। इसके लिए तकनीकी समिति का अनुमोदन प्राप्त करना होगा शुक्रवार को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के संचालक डा. बीएस सार्वा ने सरकार और अपोलो अस्पताल भिलाई की ओर से डा.एसपी सावंत ने करारनामे में हस्ताक्षर किए। इस मौके पर स्वास्थ्य विभाग के सचिव आरएस विश्वकर्मा और एनएचआरएम के संचालक अजय पांडे भी उपस्थित थे।

योजना के संचालन के लिए स्वास्थ्य संचालनालय में डा.बीपी मालानी को नोडल अफसर बनाया गया है। आपरेशन करवाने के लिए पंजीयन संचालनालय में कराना होगा। सरकारी अस्पताल के डाक्टर जांच के बाद सर्जरी या वाल्व चेंज करने के लिए रिफर करेंगे। उन्हीं के दस्तावेजों के आधार पर नोडल अफसर पंजीयन करेंगे। जिला स्तर पर जिला अस्पताल के अधीक्षक नोडल अफसर का काम करेंगे।

ढाई लाख तक लिमिट
सरकार ने मरीज के उपचार के लिए दो लाख तीस हजार तक की लिमिट तय कर दी है। जानकारों ने बताया कि हृदय के सामान्य आपरेशन के लिए अधिकतम एक लाख 30 हजार रुपए दिए जाएंगे। इसके बावजूद अगर बच्चे के वाल्व बदलने की जरुरत पड़ती है, तो सरकार इसके लिए 50 हजार रुपए अलग से देगी। करार की शर्त अनुसार आपरेशन के बाद बिलों का भुगतान संजीवनी कोष के माध्यम से होगा। करार की शर्ताें के अनुसार हृदय के आपरेशन के बाद मरीज की छुट्टी होने पर भी निजी अस्पताल प्रशासन कम से कम तीन बार मुफ्त जांच करेगा।

मरीज के पंजीयन और भर्ती की प्रक्रिया से लेकर इलाज तक अधिकतम 20 दिन तक की जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। मरीज के दो रिश्तेदारों के ठहरने और भोजन की जिम्मेदारी तक अस्पताल प्रशासन ही करेगा।

कई थे कतार में
हृदय रोग से संबंधित आपरेशनों के लिए रामकृष्ण केयर, एस्कार्ट हार्ट सेंटर और अपोलो बिलासपुर भी कतार में थे। परंतु फिलहाल इन तीनों अस्पतालों में बच्चों के दिल की सर्जरी करने वाले सर्जन नियमित सेवाएं नहीं दे इस वजह तीनों अस्पताल के प्रबंधन से करार नहीं किया गया। भविष्य में इन अस्पतालों का भी नंबर आने के संकेत हैं।





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