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सिम्स और डेंटल में दाखिला नहीं

रायपुर. मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) ने बिलासपुर मेडिकल कालेज ‘सिम्स’ में दाखिले पर लगी रोक को हटाया नहीं है। डेंटल कालेज की डिग्री की मान्यता का फैसला भी अटका हुआ है। इसी वजह से 25 जुलाई तक पहली काउंसिलिंग करवाने के नियमों में बंधे अफसरों ने केवल रायपुर और जगदलपुर मेडिकल कालेज में प्रवेश के लिए काउंसिलिंग कराने का निर्णय लिया है।

पं. जवाहरलाल नेहरु मेडिकल कालेज के आडिटोरियम हाल में 22,23 और 24 जुलाई को काउंसिलिंग होगी। चिकित्सा शिक्षा के अफसर इस उलझन में हैं कि काउंसिलिंग के लिए मेरिट लिस्ट में कितने कट आफ तक उम्मीदवारों को बुलाया जाएगा। विभाग के कुछ अफसरों को अभी भी उम्मीद है कि 25 जुलाई के पहले बिलासपुर मेडिकल और शासकीय डेंटल कालेज में दाखिले की अनुमति मिल जाएगी।

ऐसी दशा में वे दबाव डाल रहे हैं कि चारों कालेजों की सीटों के हिसाब से विद्यार्थियों को काउंसिलिंग के लिए बुलाया जाए। दूसरी ओर अफसरों का दूसरा तबका यह मानता है कि दोनों कालेजों के भविष्य का फैसला इतनी जल्दी नहीं हो सकेगा। अगर चारों कालेजों की सीटों के हिसाब से उम्मीदवारों को बुलाया जाता है और केवल दो कालेजों की ही काउंसिलिंग कराई जाती है, तब सैकड़ों उम्मीदवार अनावश्यक रुप से तीन दिन तक परेशान होंगे। ऐसे हालात में वे केवल दो कालेजों की सीटों के मुताबिक अनुमानित कट आफ के अनुसार उम्मीदवारों को बुलाने के पक्ष में हैं। दूसरी और तीसरी काउंसिलिंग 30 सितंबर तक होगी।

जानकारों का कहना है कि बिलासपुर मेडिकल कालेज के साथ-साथ शासकीय डेंटल कालेज की मान्यता अटकने से काउंसिलिंग की तैयारियों में जुटे अफसरों के होश गुम है। अगर दोनों कालेजों को एमसीआई की अनुमति नहीं मिली तो राज्य में सरकारी मेडिकल कालेज की केवल 150 सीटें रह जाएंगी।

सिम्स के बैन का फंडा
बिलासपुर मेडिकल कालेज की डिग्री को पिछले साल मान्यता मिल चुकी है। उसके बावजूद एमसीआई ने पेंच लगाकर दाखिला रोक दिया है। चिकित्सा शिक्षा के अफसरों का दावा है कि ऐसे हालात एमसीआई और केंद्र सरकार के विवाद के कारण बने है।

दूसरी ओर जानकारों का कहना है कि बिलासपुर मेडिकल कालेज में एमसीआई द्वारा मान्यता के निर्धारित मापदंडों के लिहाज से काफी कमियां हैं, इस वजह से कालेज की डिग्री को मान्यता मिलना अधर में था। हालात को देखते हुए चिकित्सा शिक्षा के अधिकारियों ने एमसीआई को ठेंगा दिखाकर सीधे भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय से बिलासपुर कालेज को मान्यता दिलवा दी थी।

इस बात का खुलासा होने पर एमसीआई ने भारत सरकार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रति दिखाकर बतला दिया कि स्वास्थ्य मंत्रालय एमसीआई की अनुशंसा के बिना सीधे मान्यता नहीं दे सकता। चूंकि अफसरों ने एमसीआई की परवाह नहीं की थी, इसलिए एमसीआई का रवैया छत्तीसगढ़ के प्रति कड़ा हो गया है।

डेंटल कालेज में भी कई पेंच
राज्य के इकलौते शासकीय डेंटल कालेज में स्टाफ की जबरदस्त कमी है। कालेज में रेग्यूलर डीन नहीं है। तकनीकी स्टाफ, पैरामेडिकल और नियमित डाक्टर्स भी कालेज की डिग्री को मान्यता देने के हिसाब से पर्याप्त नहीं है।

डेंटल चेयर और दूसरे उपकरण भी निर्धारित मापदंडों के अनुसार नहीं है। इस वजह से डिग्री की मान्यता लटक गई है। गौरतलब है कि डेंटल कालेज को पांच साल पूरे हो चुके हैं। इस वर्ष डिग्री को मान्यता मिल जाने के बाद कालेज में हर साल प्रवेश के पहले डेंटल काउंसिल आफ इंडिया से अनुमति लेने की जरुरत नहीं पड़ेगी।

अभी काउंसिलिंग होने में काफी दिन हैं। हमें उम्मीद है कि इस दौरान दोनों कालेजों में प्रवेश की अनुमति मिल जाएगी।
-डा.एसएल आदिले, चिकित्सा शिक्षा संचालक





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