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उत्कल एक माह के लिए कैंसिल?

बिलासपुर. उत्कल एक्सप्रेस और बिलासपुर-टाटा पैसेंजर को 10 जुलाई तक रद्द रखा गया है, जिसके बारे में तकनीकी विभाग से जुड़े जानकार बताते हैं कि लाइन दुरुस्त और पुलिया निर्माण में कम से कम महीने भर का समय लग सकता है। तब तक उत्कल के पटरी पर आने की कोई संभावना नहीं है। हालांकि एसईसीआर ने अभी इस संबंध में कोई घोषणा नहीं की है।

गौरतलब है कि विगत 17 जून से हावड़ा लाइन प्रभावित है। इसके कारण कई ट्रेनें प्रभावित हुईं हैं। वहीं खड़गपुर-भद्रक रेल खंड में खड़गपुर से वालटेयर, बालासोर, पुरी वाली लाइन और बस्ता रेलवे स्टेशन के पास पुलिया भी भारी वर्षा और सुगंध रेखा नदी में आई बाढ़ से बह गई थी, जिससे इस तरफ की सभी गाड़ियों पर इसका असर पड़ा।

उत्कल एक्सप्रेस को 18 जून से परिवर्तित मार्ग से चलाया जा रहा था, जिसके अनुसार यह ट्रेन कटक, अंगुल, संबलपुर, झारसुगड़ा होते हुए गंतव्य के लिए चल रही थी। इसके बाद इस ट्रेन को 20 से 23 जून तक केवल बिलासपुर एवं हरिद्वार के बीच ही चलाया जा रहा था, पुरी के लिए यह गाड़ी बंद कर दी गई थी। इसके बाद परिस्थिति को देखते हुए उत्कल एक्सप्रेस को 22 जून से 3 जुलाई तक पूरी तरह रद्द कर दिया गया था।

इसके बाद से इस ट्रेन को 10 जुलाई तक रद्द कर दिया गया है। वहीं बिलासपुर से टाटा के बीच चलने वाली 321/322 बिलासपुर-टाटा पैसेंजर को भी 10 जुलाई तक रद्द कर दिया गया है। ज्ञात हो कि इससे पूर्व इस ट्रेन को भी 20 जून से 3 जुलाई तक रद्द रखा गया था, जिससे इस ट्रेन का परिचालन बंद है।

रेलवे सूत्र बताते हैं कि किसी तरह टाटा पैसेंजर तो चल सकती है, लेकिन पुरी लाइन में अभी जो स्थिति है, उससे पुलिया बनने-सूखने, रेल लाइन की फिलिंग और इसके बाद टेस्टिंग में काफी समय लग सकता है। इससे जुलाई के इस महीने में तो कम से कम उत्कल एक्सप्रेस का इस लाइन पर चल पाना संभव नहीं है।

फलकनामा व यशवंतपुर एक्सप्रेस भी रहेगी प्रभावित : 2703/2704 हावड़ा-सिकंदराबाद फलकनामा एक्सप्रेस एवं 2863/2864 यशवंतपुर-हावड़ा-यशवंतपुर एक्सप्रेस अब भी परिवर्तित मार्ग से चल रही है। यह ट्रेनें झारसुगड़ा, बिलासपुर, दुर्ग, गोंदिया, नागपुर एवं बल्लारशाह होते हुए अपने गंतव्य के लिए जा रही है। 10 जुलाई तक उक्त ट्रेनों को इसी तरह चलाने की बात कही गई है, लेकिन, परिस्थति को देखते हुए इन ट्रेनों का परिचालन भी महीने भर तक सामान्य होने की स्थिति नहीं दिखती।

ईस्टकोस्ट रेलवे में 40 गाड़ियां प्रभावित : अधिकारिक सूत्रों के अनुसार बारिश से लाइनें इस तरह प्रभावित हुईं कि ईस्ट कोस्ट रेलवे में लगभग 40 ट्रेनों पर इसका असर पड़ा है। इनमें कई ट्रेनें रद्द कर दी गईं हैं, तो वहीं कई ट्रेनों को परिवर्तित मार्ग से चलाना पड़ रहा है, जिससे ट्रेनें अन्य लाइनों पर भारी दबाव पड़ रहा है और ट्रेनें विलंब से चल रहीं हैं।

मालगाड़ी का फंडा : इस पूरे घटनाक्रम में यात्री गाड़ियों पर तो असर पड़ा है, लेकिन मालगाड़ी पर इसका असर अपेक्षाकृत ही है। रेलवे के लिए मालगाड़ियां अधिक आमदनी देने वाली होती हैं। इससे रेलवे माल लदान का रिकार्ड बनाने और अपनी आमदनी बढ़ाने का कोई मौका खोना नहीं चाहता। इसीलिए मालगाड़ियों का परिचालन निरंतर जारी है। इसके लिए कई स्थानों में यात्री गाड़ियों को रोक दिया जा रहा है।

रेलवे की मर्जी : हीराकुंड एक्सप्रेस और इसी रूट पर चलने वाली अन्य गाड़ियां झारसुगड़ा से संबलपुर, रायगढ़ा, खुरदारोड, भुवनेश्वर होते हुए विशाखापट्टनम जाती हैं। वहीं उत्कल एक्सप्रेस को झारसुगड़ा से चक्रधरपुर, टाटा, खड़गपुर, खुरदारोड और भुवनेश्वर होते हुए पुरी तक ले जाया जाता है। यदि रेलवे चाहे तो इस ट्रेन को हीराकुंड एक्सप्रेस की तरह भुवनेश्वर से पुरी की ओर चलाया जा सकता है। इससे तकरीबन 350 किमी. की दूरी भी कम हो जाएगी, लेकिन यह रेलवे की मर्जी पर निर्भर है, जिससे हजारों यात्री परेशान हैं।

डेढ़ करोड़ का नुकसान : रेलवे अधिकारियों का मानना है कि उत्कल और टाटा पैसेंजर रद्द होने से उसे प्रतिदिन लगभग 3 लाख, 50 हजार रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस लिहाज से जब से उक्त ट्रेनों का परिचालन बंद है और आगे तकरीबन महीने भर इसके चलने की संभावना नहीं दिखती, एसईसीआर को तकरीबन 1 करोड़, 44 लाख रुपए का नुकसान उठाना पड़ेगा।

स्थिति के अनुसार रेलवे बोर्ड इस संबंध में निर्णय लेता है, जिसका परिपालन हमें करना होता है। महीने भर तक उत्कल का परिचालन प्रभावित रहने या इसे रद्द करने के बारे में अभी बोर्ड से ऐसा कोई निर्देश यहां नहीं आया है, जिससे इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता।
—अंकुश गुप्ता, सीपीआरओ एसईसीआर





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