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Bilaspur Bilaspur बिलासपुर.
सजे-धजे रथ में आज भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व सुभद्रा की सवारी निकली। रथ खींचने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु उमड़ पड़े। भगवान की रथयात्रा की शुरुआत स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल ने पूजा व छेरापहरा कर की। प्रमुख मार्गो से होकर रथयात्रा मौसी मां मंदिर पहुंची, जहां 10 दिनों तक देवताओं की प्रतिमाएं रखी जाएंगी।
रथ द्वितीया पर शनिवार की सुबह रेलवे क्षेत्र में उड़िया स्कूल के पास जगन्नाथ मंदिर का पट खुलते ही श्रद्धालु दर्शन व पूजा-अर्चना करने के लिए उमड़ने लगे थे। सुबह मंगला आरती से रथ द्वितीया के अनुष्ठानों की शुरुआत हुई। इसके बाद सूर्य पूजा, द्वारपाल पूजा, नवग्रह पूजा में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
11 बजे नेत्रोत्सव मनाकर भगवान का नेत्र स्नान कराया गया। ध्वजारोहण, महाप्रसाद अर्पण के बाद रथ प्रतिष्ठा हुई और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व सुभद्रा की नयनाभिराम प्रतिमाएं मंदिर के गर्भगृह से निकालकर रथ पर स्थापित की गईं। दोपहर करीब तीन बजे स्वास्थ्य मंत्री श्री अग्रवाल ने राजा की वेशभूषा धारण कर रथ पर विराजे देवताओं की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और रथ के सामने झाड़ू लगाकर छेरापहरा किया।
रथयात्रा के लिए रथ को फूलों व रंग-बिरंगे कपड़ों से आकर्षक तरीके से सजाया गया था। रथ के आगे लगे दो रस्सों को खींचते ही भगवान की रथयात्रा शुरू हो गई। रथ को खींचने के लिए यहां भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। रथ के आगे भजन मंडली भजन-कीर्तन करती चल रही थी, पीछे सैकड़ों श्रद्धालु जगन्नाथ के जयकारे लगाते चल रहे थे।
राह में सैकड़ों महिलाओं ने भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना की। रथ पर सवार पुजारी प्रसाद बांटते चल रहे थे। मंदिर से निकलकर यह रथयात्रा झूमते-गाते भक्तों के साथ तितली चौक, रेलवे स्टेशन, 12 खोली चौक, तारबाहर चौक, रविंद्रनाथ टैगोर चौक, हाईकोर्ट रोड, गांधी चौक, दयालबंद चौक, भगत चौक, रेलवे क्षेत्र होते मंदिर के पास उड़िया स्कूल के जन्माष्टमी मंडप में बनाए गए मौसी मां मंदिर तक पहुंचकर समाप्त हुई।
रथयात्रा जहां-जहां से गुजरी, लोग रथ को धकेलने और रस्सा खींचने के लिए आते गए। इनमें उत्कल समाज के लोगों के अलावा बड़ी संख्या में महिलाएं व बच्चे भी शामिल थे। भगवान की प्रतिमाओं को मौसी मां मंदिर में 10 दिनों तक रखा जाएगा। यहां भगवान की नियमित पूजा-अर्चना होगी, जिसमें श्रद्धालु भाग ले सकेंगे।
प्रतिदिन शाम को रात में उत्कल समाज के बच्चों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इस बीच 8 जुलाई की रात हेरापंचमी मनाई जाएगी। 14 जुलाई को दोपहर 2:15 बजे मौसी मां मंदिर से बहुड़ा यात्रा निकलेगी। इसमें जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा की प्रतिमाओं को रथ पर स्थापित कर उसी रास्ते से पुन: मंदिर तक लाया जाएगा।
जगह-जगह हुआ स्वागत : राह में रथयात्रा का जगह-जगह भव्य स्वागत किया गया। जगमल चौक पर पूर्व पार्षद प्रियनाथ तिवारी के नेतृत्व में नागरिकों ने भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना कर प्रसाद वितरित किया। इस मौके पर रतन भानुशाली, राहुल शर्मा, संजय मिश्रा, केशव विश्वकर्मा, गोपेंद्र गोले, ओमप्रकाश, मनीष तिवारी, ओपी विश्वकर्मा, सोनू साजिद, मनीष ठक्कर, पिंकू अवस्थी, हरिसिंह ठाकुर, प्रकाश चावड़ा, मनोज कसेर सहित अन्य उपस्थित थे।
बूंदाबांदी हुई : रथयात्रा का दिन हो और बारिश न हो, ऐसा कम ही होता है। मान्यता है कि रथद्वितीया पर मेघ जरूर बरसते हैं। हर साल रथयात्रा के मंदिर से रवाना होने व मौसी मां मंदिर पहुंचने के दौरान कम ही सही, लेकिन बारिश जरूर होती है। इस बार भी भगवान की सवारी निकलने के बाद हल्की बूंदाबांदी हुई।
बताया जाता है कि पुरी में यदि रथयात्रा के दौरान बारिश नहीं हुई तो यात्रा रोक दी जाती है और भगवान का रथ दूसरे दिन गुंडिचा मंदिर पहुंचता है। कहते हैं कि इस दिन बारिश न होने पर अकाल की आशंका होती है।