अजमेर.
कानपुर में यूपी एसटीएफ के हत्थे चढ़े संदिग्ध आतंकी ने ख्वाजा गरीबनवाज की दरगाह में हुए बम विस्फोट के राज खोले हैं। उसने वारदात को अंजाम देने वालों के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं।
एसटीएफ की सूचना पर तफ्तीश कर रही डीआइजी पुन्नू चामी के नेतृत्व में गठित स्पेशल टीम सक्रिय हो गई है। पुन्नू चामी का कहना है कि सूचना की तस्दीक की जा रही है। कानपुर में यूपी एसटीएफ की गिरफ्त में आए हैदराबाद के मूल निवासी सईद ने दरगाह इलाके के मदरसे में लंबे समय तक रहने की जानकारी दी है। उसने बम ब्लास्ट के बारे में कई राजफाश किए हैं।
यूपी एसटीएफ ने उसे गतिविधियां संदिग्ध करार देते हुए पकड़ा था। अजमेर में उसके सम्पर्क सूत्रों का खुलासा होने के बाद एसटीएफ ने राजस्थान पुलिस को जानकारी दी है।
बम ब्लास्ट की तफ्तीश कर रही स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम के प्रभारी पुन्नूचामी का कहना है कि सईद से पूछताछ की जाएगी। उसके बयानों की तस्दीक के बाद ही नतीजा सामने आएगा।
हैदराबादी ही था प्राइम सस्पेक्ट : पुलिस तफ्तीश की प्रारम्भिक दिशा हैदराबाद की ओर थी। घटना के तार हैदराबाद की मक्का मस्जिद में हुए विस्फोट से जोड़े गए थे। विस्फोट में मारे गए एक व्यक्ति की शिनाख्त से जांच को बल मिला। मृतक हैदराबाद का निवासी था और अजमेर में रह रहा था। पुलिस मानकर चल रही थी कि हरकत-उल-जिहाद-ए-इस्लामी (हूजी) ने स्थानीय व्यक्ति की मदद ली होगी। हैदराबाद के विस्फोट में हूजी का हाथ बताया गया था। सईद भी हैदराबाद का निवासी है।
11 अक्टूबर..
दरगाह में रोजा इफ्तार के वक्त बम फटा था। तीन लोगों की जान गई व 22 घायल हुए। दरगाह परिसर में एक अन्य बम बरामद हुआ था। जांच स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम को सौंपी गई थी।
जांच अंजाम तक नहीं पहुंची : ब्लास्ट के नौ महीने के दौरान जांच किसी अंजाम तक नहीं पहुंच पाई है। दहशतगर्र्दो की पहचान तक नहीं हो पाई। कई लीड्स पर काम कर रही स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम के पास बताने के लिए कुछ खास नहीं है। दरगाह परिसर में 11 अक्टूबर को बम धमाका हुआ था। करीब एक महीने तक स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम के अफसर पुलिस अन्वेषण भवन में पड़ाव डाले रहे।
कार्रवाई के नाम पर सीकर के खंडेला से शमीम, झारखंड से खुशीबुर्रहमान, दिल्ली से नासिर, उस्मानाबाद से इमरान शेख और मुरादाबाद से अतीक को हिरासत में लिया गया, लेकिन सबूत नहीं होने के कारण इन्हें छोड़ना पड़ा। दो महीने पहले इंदौर में पकड़े गए सिमी के नेताओं से भी एसआइटी ने तफ्तीश की थी।
दरगाह बम ब्लास्ट
घटना : 11 अक्टूबर 07
समय : शाम 6 बजकर 12 मिनट
जगह : आस्ताने शरीफ का आहता-ए-नूर। पेड़ के चबूतरे पर पॉलिथीन बैग में बम उस समय फटा, जब रोजा खोलने के लिए लोग तोप दागे जाने का इंतजार कर रहे थे।
मृतक व हताहत : विस्फोट में तीन लोगों की मौत हुई और 22 घायल हुए।
तफ्तीश : डीआइजी पुन्नूचामी के नेतृत्व में जांच जारी है।