भोपाल. साउथ टीटी नगर में बन रहे सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर में। इसके निर्माण के लिए यहां एक हजार हरे-भरे पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाई जा सकती है, अगर ऐसा होता है तो इस जगह पर शहर वासियों को केवल कांक्रीट के जंगल देखने को मिलेंगे।
न्यू मार्केट से होकर माता मंदिर और सेकंड स्टॉप से आगे के इलाके हरियाली को लेकर अपनी अलग पहचान रखते हैं, लेकिन इस इलाके में बहने वाली विकास की बयार यहां की हरियाली को उड़ा ले जाने की तैयारी में है। जिस जगह आज प्लेटिनम प्लाजा बसा है, उस जगह पूर्व में सरकारी आवास थे जिनमें आम, अमरूद, जामुन, आंवला और सफेदे के पेड़ लगे थे।
वर्तमान में हरियाली के नाम पर यहां सड़क के किनारे लगाए गए गिने चुने छोटे पेड़ ही बाकी हैं। वर्तमान में साउथ टीटी नगर क्षेत्र में बने जी और एच टाइप आवास तोड़ने का कार्य जारी है। यहां गैमन इंडिया कंपनी द्वारा सेन्ट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट बनाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए यहां के 15 एकड़ क्षेत्र में लगे लगभग 1000 पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलने की आशंका है।
विकास की बयार
न्यू मार्केट से लगे इन जी टाइप सरकारी आवासों को तोड़ने का काम तेजी से जारी है। यह जगह शॉपिंग मॉल, होटल और मल्टी प्लेक्स बनाने के लिए गैमन इंडिया कंपनी द्वारा खरीद ली गई है। हाउसिंग बोर्ड के उप-आयुक्त आरके यादव बताते हैं कि यह जगह 3 सौ 38 करोड़ रुपए में कंपनी द्वारा सरकार से खरीदी गई है। एक साल के अंदर इस प्रोजेक्ट के लिए नक्शे तैयार हो जाएंगे और योजना के मुताबिक पांच साल में यहां हाउसिंग बोर्ड के सहयोग से कंपनी द्वारा तैयार नक्शे के आधार पर निर्माण कार्य पूर्ण हो जाएगा।
फिलहाल नहीं पहुंचा आवेदन
नगर निगम सीमा में लगे पेड़ काटने के लिए निगम से अनुमति लेना जरूरी होता है, हालांकि गैमन इंडिया कंपनी द्वारा फिलहाल सिर्फ आवासों को तोड़ने का काम किया जा रहा है और नगर निगम के पास यहां लगे पेड़ों को काटने से संबंधित कोई भी आवेदन नहीं पहुंचा है।
अरविन्द दुबे अपर आयुक्त (1) नगर निगम कहते हैं कि फिलहाल इस प्रोजेक्ट के लिए पेड़ काटने से संबंधित कोई आवेदन निगम के पास नहीं आया है, जब आवेदन आएगा तो पूरी जांच के बाद ही फैसला लिया जाएगा।
खतरे में हरियाली
प्रयत्न संस्था के सचिव अजय दुबे बताते हैं कि गैमन इंडिया कंपनी द्वारा सेन्ट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट बनाने के लिए खरीदे गए 15 एकड़ इलाके में 40 साल से भी पुराने आम, जामुन, नीम, कटहल, आंवला और सफेदे जैसे 1000 हरे पेड़ हैं। इनके काटे जाने से उसका सीधा असर प्रकृति पर होगा।
क्षतिपूर्ति के लिए एक के बदले अगर चार पौधे भी लगाए जाते हैं, तब भी यह कैसे कहा जा सकता है कि रोपित पौधों की देखभाल अच्छी तरह की जाएगी। नए रोपे गए पौधों के बड़े होने तक सुरक्षित रहने की संभावना कम रहती है। श्री दुबे बताते हैं कि ऑक्सीजन के श्रोत वृक्षों को बचाने के लिए अब वे यहां चिपकों आन्दोलन भी चलाने पर विचार कर रहे हैं।
>> पेड़ काटने के लिए नगर निगम को कोई आवेदन अभी प्राप्त नहीं हुआ है। आवेदन आने पर जांच के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
अरविन्द दुबे, अपर आयुक्त (1) नगर निगम
>> तीन सौ अड़तीस करोड़ रुपए में कंपनी ने सरकार से यह जमीन खरीदी है। एक वर्ष में नक्शे तैयार हो जाएंगे व पांच साल में प्रोजेक्ट पूरा कर लिया जाएगा।
आरके यादव, उप-आयुक्त हाउसिंग बोर्ड