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राजनेताओं में इच्छाशक्ति नहीं

बीकानेर. समाज धन केन्द्रित होने से कमजोर हो गया और प्रतीत होता है सरकारों ने इसका फायदा उठाते हुए न केवल भगवान राम वरन् हिन्दू धर्मस्थलों-तीर्थस्थलों का नामोनिशान तक मिटा देने की साजिश रच डाली है।

अयोध्या में राममंदिर से लेकर सेतु समुद्रम तक की परियोजना जहां राम का नाम मिटा डालने की साजिश है वहीं उत्तर में विकास के नाम पर हो रहे अंधाधुंध प्रयोगों से गंगा विलुप्त होने के कगार पर पहुंच रही है। जोशीमठ और आस-पास के गांवों में रहने वाले लोगों को पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा और पहाड़ भोथरे होकर धराशायी होने की स्थिति में पहुंच रहे हैं।

यह कहना है जगद्गुरु शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती महाराज का। ‘भास्कर’ से बातचीत में उन्होंने जहां इन सबके लिए स्वार्थी राजनीति को दोषी बताया वहीं समाज की धनलोलुपता पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, धार्मिक आयोजन के नाम पर लोग एकत्रित होते हैं मगर बात को एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल देते हैं।

लोभवश समाज और राजनीति के लोग ऐसे व्यक्तियों को धर्माचार्य के रूप में प्रतिष्ठित कर देते हैं जो इसके योग्य नहीं होते। नतीजन समाज कमजोर होता है। ऐसी ही कमजोरी का नमूना है, अमरनाथ में हुआ भूमि विवाद।

इस विवाद का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक धारा 370 को खत्म नहीं किया जाता ऐसे विवादों से सामना होता रहेगा। धारा 370 हटाने की इच्छाशक्ति राजनेताओं में नहीं है। इसे हटवाने के लिए हिन्दू समाज को संगठित होना पड़ेगा। उत्तर के पर्वतीय क्षेत्रों में बांधों के लिए हो रहे गंगा के दोहन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, पहाड़ भोथरे हो रहे हैं।

टिहरी बांध चार साल में नहीं भरा। तीन टर्मिनल और बनाने की योजना है। इन सबके बीच पानी जमीन में समाता जा रहा है और लोग प्यासे हैं। उन्होंने दावा किया कि ‘विष्णुप्रयाग’ योजना विफल होगी। ऐसी योजनाओं का खमियाजा हमें पर्वतीय अंचल खोकर उठाना पड़ेगा।

धनीनाथ गिरिमठ पंचमंदिर के अधिष्ठाता स्वामी विशोकानंद भारती ने कहा, धर्म, इतिहास का गौरव और संस्कृति को बचाना है तो समाज को जागृत होना होगा, अच्छे-बुरे की पहचान कर अच्छाई के साथ संगठित रूप से खड़ा होना होगा। शनिवार शाम को मोहता पैलेस में हुई धर्मचर्चा में भी शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती ने धर्म व संस्कारों का पालन करने को कहा। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने वर्ण के अनुसार सभी कर्म पूरे करने चाहिए। महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद भारती ने संबोधित किया।





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