बीकानेर. नगर विकास न्यास की ओर से मुरलीधर व्यास नगर योजना में एक्सचेंज पॉलिसी के तहत दिए गए प्लाट का कब्जा अभी तक नहीं दिया गया है। दूसरी ओर ब्लॉक के आवेदक अभी तक कतार में ही हैं।
दस साल से इन लोगों के पास प्लॉट का नंबर तो है लेकिन मुरलीधर व्यास नगर की कौनसी जमीन उनके प्लॉट के लिए मुकर्रर की गई है, यह उन्हें नहीं पता। पिछले दस साल से अपने प्लॉट की बाट जोह रही गीतादेवी को आज भी विश्वास नहीं है कि उनके नाम दूसरा प्लाट आबंटित कर दिया गया है। उन्हें विश्वास दिलाने के लिए परिजन न्यास कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ भी नहीं मिल रहा है।
हालांकि नगर विकास न्यास यह श्रेय लेने में कसर नहीं छोड़ रहा है कि लंबित मामले को निबटा दिया गया है लेकिन सच्चई यह है कि अभी तक किसी को भी प्लॉट नसीब नहीं हुआ है। ये ऐसे आबंटी हैं जिन्हें जो प्लॉट आबंटित हुए, वहां पहले से ही लोग काबिज थे। यहां काबिज लोगों के पास यहां रिहायश के प्रमाण थे।
इन प्रमाणों के साथ न्यायालय में गए लोगों के खिलाफ लड़ते हुए कई साल हो गए तो न्यास ने यह फैसला किया कि इन्हें दूसरी जगह आबंटित की जाए। इस फैसले की क्रियान्विति भी हो गई लेकिन आज भी मामला वहीं का वहीं है। लगभग आठ सौ लोगों को प्लॉट देने का दावा करने वाले नगर विकास न्यास ने अभी तक एक को भी प्लॉट नहीं दिया है।
दूसरी ओर ऐसे लोग हैं जो अभी भी कतार में हैं। जिन लोगों को दूसरे प्लॉट अलॉट हो चुके हैं, उन्हें अगस्त में मुख्यमंत्री के आने से पहले भूखंड पर कब्जा मिलने की उम्मीद है लेकिन ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं है जिनके प्लॉट पर अभी तक फैसला भी नहीं हुआ है। राजकुमारी व्यास और रामचंद्र शर्मा जैसे कई आवेदक चाहते हैं कि उन्हें भी दूसरी जगह प्लॉट मिल जाए तो मकान का निर्माण शुरू करें लेकिन इस विषय पर न्यास मौन है।
मुरलीधर व्यास कॉलोनी में गीतादेवी के नाम वर्षो पहले द्वितीय-डी-119 नंबर प्लॉट अलॉट हुआ लेकिन मौका देखा तो पता चला कि इस प्लॉट पर पहले से ही अतिक्रमण है। लंबे समय बाद न्यास ने गीतादेवी को दूसरा प्लॉट देने का फैसला किया। दूसरा प्लॉट मुरलीधर नगर विस्तार योजना के सेक्टर सात में 76 नंबर प्लॉट बताया गया है लेकिन इस प्लॉट का भी आज तक कब्जा नहीं दिया गया है।
श्रीमती राजकुमारी के नाम ए-171 और रामचंद्र के नाम ए-223 नंबर प्लॉट मुरलीधर व्यास कॉलोनी में आबंटित किए गए। दोनों ने ही प्लॉट के लिए मांगी गई सारी राशि का भुगतान कर दिया लेकिन दोनों को ही अपना प्लॉट नहीं मिला। दोनों किराये के घर में रहते हैं। अपना घर बनाना चाहते हैं लेकिन पिछले दस साल से यह सपना ही है।