जोधपुर. आम आदमी के लिए बिना अनुमति भवन निर्माण पर आए दिन शिकंजा कसने वाले नगर निगम और नगर विकास न्यास को सरकारी महकमों की खता नजर नहीं आती। कोई विभाग शहर के व्यस्ततम चौराहे पर सेटबैक छोड़े बिना ही बहुमंजिला इमारत खड़ी कर रहा है, तो कोई महकमा पूरा भवन ही नया बनवा रहा है। ऐसे अनेक सरकारी निर्माण चल रहे हैं, जिनकी अनुमति शहरी निकायों ने नहीं दी है।
शहर में भवन निर्माण में एकरूपता व आदर्श मापदंडों की पालना सुनिश्चित करने के लिए निगम व न्यास ने समान नियम बना रखे हैं, लेकिन विडंबना यह है कि दूसरे सरकारी महकमे तो दूर, खुद न्यास व निगम के इंजीनियर ही सक्षम समिति से निर्माण की अनुमति नहीं ले रहे हैं।
अन्य विभागों के अफसर तो इस बात से ही बेखबर हैं कि कोई भी निर्माण से पहले उन्हें न्यास या निगम से अनुमति लेनी चाहिए। ऐसे निर्माणों पर अमूमन कोई अड़ंगा नहीं लगाता, लिहाजा नियमों को ताक में रखकर निर्माण चलता रहता है। पावटा चौराहे पर किसान भवन के निर्माण में मापदंडों की अनदेखी इसी लापरवाही का नतीजा है।
शहर में बनने वाले सामुदायिक भवन हों या एमडीएम अस्पताल में निर्माणाधीन सुविधा विस्तार इकाइयां, किसी भी निर्माण की इजाजत नहीं ली गई है। जबकि इनको बनाने का जिम्मा न्यास पर ही है।
नियमानुसार शहरी क्षेत्र में किसी तरह के भवन के निर्माण के लिए शहरी निकाय से अनुमति लेना आवश्यक है। यदि भवन सरकारी अथवा अर्धसरकारी है तो नक्शा एटपार पास किया जा सकता है। निर्माणाधीन भवनों की जानकारी प्राप्त करते हुए बिना अनुमति के हो रहे निर्माण के विरुद्ध उचित कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।
—अनिल माथुर, डीटीपी, नगर विकास न्यास