जोधपुर.
धोरों के शहर थार में इस बार फिर से बाढ़ कहर बरपा सकती है। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर व बाड़मेर में कम समय में अत्यधिक बरसात की संभावना बनी है। दो साल पहले बाड़मेर व जैसलमेर मे ७२ घंटे में हुई ६६0 मिलीमीटर बरसात से काफी जान-माल की हानि हुई थी। अब पहले से आधा पानी बरसने पर ही बाढ़ के हालात बन सकते हैं।
स्थिति यह है कि क्षेत्र के जैसलमेर और बाड़मेर क्षेत्र में एक जून से अब तक 100 एमएम से अधिक बारिश हो चुकी है, यदि यह सिलसिला यूं ही चला, तो बाढ़ के आसार गहराते जाएंगे। इसके अलावा झिनझिनयाली से कवास तक पानी के प्रवाह का नया मार्ग बनने और जिप्सम के भंडार में जमा पानी की वजह से कवास व बायतू के अलावा गिरल में बाढ़ भारी तबाही मचा सकती है। जबकि मलवा गांव और गिरल की खानों में दो साल पहले आया बाढ़ का पानी अभी तक जमा है।
मौसम वैज्ञानिकों की इस चेतावनी को भू-वैज्ञानिक काफी गंभीर मान रहे हैं। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के भू-विज्ञान विभाग के प्रोफेसर सुरेश माथुर के नेतृत्व में श्रीधर गौड़ व शंकरलाल आदि शोध छात्रों ने एक शोध पत्र तैयार किया है। उसके अनुसार बाड़मेर-जैसलमेर में अधिकतम 300 एमएम बारिश ही कहर बरपा सकती है। इधर, सरकार व प्रशासन ने पिछली तबाही से सबक नहीं लिया। अब तक बाड़मेर व जैसलमेर जिलों मे आपदा प्रबंधन व पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं की है।
आशंका की वजह : जैसलमेर व बाड़मेर मे दो साल पूर्व अत्यधिक बरसात होने पर झिनझिनयाली स्थित रोहली नदी से तेज बहाव में पानी एनीकट और रेतीले टीलों को बहाते हुए सांकड़ा, रोल, राजमथाई निम्बला, गूंगा व भाड़खा पहुंचा था। वहां से निम्बला नदी से गिरल होते हुए कवास पहुंचा। कवास, मलवा गिरल व बीसाला के पास जिप्सम के भंडार होने की वजह से पानी जमा हो गया था।
भू-वैज्ञानिकों के अनुसार इस मार्ग पर पानी का प्रवाह बनने के साथ ही मलवा गांव, गिरल की खानों, बीसाला व कवास के कई क्षेत्रों में आज भी पानी जमा है। जिप्सम की वजह से जमीन की पानी सोखने की क्षमता पहले से कम हो गई है। अब यदि जैसलमेर-बाड़मेर में पिछली बार की तुलना में कुछ कम ही बरसात हुई तो भी कवास व मलवा गांव फिर जलमग्न हो सकते हैं। जैसलमेर में 1 जून से अभी तक 164 मिलीमीटर बरसात हो चुकी है। जबकि बाड़मेर में 123 मिलीमीटर बरसात हुई। दो साल पूर्व की तरह मानसून के विदा होते वक्त कहर बरपाने की आशंका है।
तब मची थी तबाही : बाड़मेर व जैसलमेर में १९ अगस्त से २२ अगस्त २00६ तक लगातार बरसात होने से रेगिस्तान समंदर बन गया था। काजरी के मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग की वजह से राजस्थान के पश्चिमी इलाके जैसलमेर व बाड़मेर में कम समय में अतिवृष्टि का खतरा बना हुआ है। दो साल पहले की तरह फिर बाड़मेर व जैसलमेर में भारी बरसात होने के आसार हैं।
इनका कहना है
प्रशासन ने दो साल पूर्व आई बाढ़ से सबक नही लिया। अब तक आपदा प्रबंधन के लिए कोई खास कदम नहीं उठाए गए।
—प्रो. बी.एस पालीवाल,पूर्व विभागाध्यक्ष,भू-विज्ञान विभाग,जेएनयूवी।
‘सेटेलाइट से हाल में लिए गए चित्रों में मलवा व गिरल सहित कई इलाकों में अभी भी पानी और कवास में कीचड़ जमा है। सरकार ने पानी के प्रवाह के लिए सुझाया चैनल अभी तक नहीं बनाया है। बाड़मेर-जैसलमेर मे भारी बरसात से बाढ़ आ सकती है।’
-डा.जे आर शर्मा, निदेशक,स्टेट रिमोट सेंसिंग सेटर।
‘बाढ़ के हालात से निपटने के लिए तमाम उपकरणों से लेकर आपदा प्रबंधन की सभी तैयारियां कर ली गई हैं।
-रवि जैन, कलेक्टर, बाड़मेर।
आधी बरसात ही तबाही के लिए काफी
ग्लोबल वार्मिग की वजह से जैसलमेर व बाड़मेर में कम समय में अत्यधिक बरसात का खतरा बना हुआ है। इससे रेगिस्तान में बाढ़ आ सकती है’।
—डा.अम्लकार, विभागाध्यक्ष पर्यावरण, काजरी
इन क्षेत्रों में पिछली बार की तुलना में आधी बरसात होने पर ही बाढ़ तबाही मचा सकती है। जिप्सम के भंडार में जमा पानी की वजह से हालात काफी बिगड़ सकते हैं।
—सुरेश माथुर, प्रोफेसर, जना व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर